सेंसेक्स 315 अंक उछला, 73,895 पर बंद; तेल कीमतों में नरमी से बाजार में रिकवरी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 23,140.50 पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका-ईरान युद्धविराम की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक किया।
दिन का कारोबार: उतार-चढ़ाव के बाद मजबूती
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर 73,580.54 से 54.61 अंक नीचे 73,525.92 पर कमज़ोर शुरुआत की। लेकिन कारोबार के दौरान इंडेक्स ने रफ्तार पकड़ी और 387.51 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,968.05 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर छुआ।
वहीं, निफ्टी 23,035 पर खुला — पिछले बंद से 28 अंक नीचे — और दिन के दौरान 23,162.70 तक पहुँचा। यह रिकवरी उल्लेखनीय है क्योंकि गुरुवार को बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
सेक्टरवार प्रदर्शन: रियल्टी और ऑटो में तेजी
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो सबसे ज़्यादा लाभ में रहे। दूसरी ओर निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में बिकवाली का दबाव बना रहा।
व्यापक बाजार में मिला-जुला रुझान रहा — निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.15 प्रतिशत बढ़त के साथ बंद हुआ।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी 50 में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो शीर्ष लाभार्थी शेयरों में रहे।
वहीं, मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इन्फोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊँचे स्तर पर बने रहने से रिकवरी सीमित दायरे तक रही। महंगाई, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और उभरते बाजारों (EM) की मुद्राओं पर दबाव की चिंताएँ बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि बेंचमार्क इंडेक्स का 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिके रहना घरेलू लिक्विडिटी की मज़बूती का संकेत है। उनके मुताबिक, बेहतर वैल्यूएशन और घरेलू विकास की सकारात्मक संभावनाएँ चुनिंदा खरीदारी को प्रोत्साहन दे रही हैं, हालाँकि वैश्विक यील्ड और तेल की कीमतें निकट भविष्य में जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर सकती हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह रिकवरी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आई, जब निवेशक आम तौर पर सतर्क रहते हैं। अगले हफ्ते वैश्विक मैक्रो संकेत — विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयान और कच्चे तेल के भाव — बाजार की दिशा तय करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा बाजारों को अस्थिर बनाए हुए हैं, और वैश्विक निवेशक हर खबर पर नज़र रख रहे हैं।