8 अक्टूबर 2026
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सेंसेक्स 492 अंक टूटा, 72,175 पर; वैश्विक बॉन्ड यील्ड और FPI बिकवाली से लगातार दूसरे सत्र में दबाव

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सेंसेक्स 492 अंक टूटा, 72,175 पर; वैश्विक बॉन्ड यील्ड और FPI बिकवाली से लगातार दूसरे सत्र में दबाव

सारांश

वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज़ी और FPI की भारी बिकवाली ने भारतीय बाज़ारों को लगातार दूसरे दिन झकझोरा। सेंसेक्स 492 अंक टूटकर 72,175 पर आया। RBI की रेपो दर बढ़ोतरी के बाद इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव और बढ़ा — फार्मा व आईटी ने राहत दी, लेकिन वित्तीय और ऑटो सेक्टर दबाव में रहे।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 8 अक्टूबर 2026 को 492 अंक (0.67%) गिरकर इंट्रा-डे लो 72,175.95 पर पहुँचा।
निफ्टी 50 153.35 अंक गिरकर 22,445.70 के निचले स्तर पर आया।
FPI ने बुधवार को भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹6,121 करोड़ से अधिक निकाले; DII ने ₹4,596 करोड़ की खरीदारी से सहारा दिया।
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेज़री यील्ड 5.3% से ऊपर बनी रही, जो उभरते बाज़ारों पर दबाव का प्रमुख कारण है।
RBI की 25 आधार अंकों की रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद इक्विटी वैल्यूएशन पर अतिरिक्त दबाव; फार्मा व आईटी सेक्टर 0.59% की बढ़त के साथ आउटपरफॉर्म।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,439 मुख्य सपोर्ट और 23,100 ऊपरी लक्ष्य।

बीएसई सेंसेक्स गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में रहा और 492 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ इंट्रा-डे लो 72,175.95 तक पहुँचा। इसी दौरान निफ्टी 50 भी 153.35 अंक गिरकर 22,445.70 के निचले स्तर को छू गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा मौद्रिक नीति के असर का आकलन — तीनों मिलकर बाज़ार की धारणा को कमज़ोर कर रहे हैं।

बाज़ार का उद्घाटन और गिरावट का सफर

कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर से करीब 4 अंक नीचे 22,599.05 पर खुला, जबकि सेंसेक्स 72,668 पर सपाट खुलकर शुरुआती कारोबार में 29.30 अंकों की मामूली बढ़त में था। हालाँकि वैश्विक नकारात्मक संकेतों ने जल्द ही बाज़ार पर दबाव बना दिया और दोनों प्रमुख सूचकांक तेज़ी से नीचे फिसल गए।

यह लगातार दूसरा सत्र है जब बाज़ार बिकवाली के दबाव में रहा, जो बताता है कि निवेशकों की धारणा में अल्पकालिक सुधार की संभावना सीमित है।

सेक्टोरल प्रदर्शन: फार्मा और आईटी में राहत, फाइनेंशियल पर दबाव

निफ्टी आईटी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा इस सत्र के सबसे बेहतर प्रदर्शन वाले सूचकांक रहे और इनमें 0.59 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टरों में भी हल्की मज़बूती देखी गई।

दूसरी तरफ निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (एक्स-बैंक) और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स दबाव में रहे और इनमें 0.38 प्रतिशत तक की गिरावट आई। ऑटो सेक्टर में भी कमज़ोरी बनी रही। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊँची ब्याज दरों के परिवेश में फार्मा जैसे ब्याज-असंवेदनशील क्षेत्रों की ओर निवेशकों का झुकाव स्वाभाविक रूप से बढ़ रहा है।

FPI बिकवाली और DII की खरीदारी

बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹6,121 करोड़ से अधिक की निकासी की — यह हालिया हफ्तों की बिकवाली की कड़ी में एक और बड़ा आँकड़ा है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग ₹4,596 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को आंशिक सहारा दिया।

गौरतलब है कि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेज़री यील्ड 5.3 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जो उभरते बाज़ारों से पूँजी के प्रवाह को बाधित कर रही है और भारतीय बड़े शेयरों के वैल्यूएशन पर सीधा दबाव डाल रही है।

RBI नीति और ब्याज दर का असर

विश्लेषकों का कहना है कि RBI के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाज़ार के वैल्यूएशन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। ऊँची ब्याज दरें फिक्स्ड इनकम उत्पादों को इक्विटी की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे ग्रोथ स्टॉक्स और हाई-वैल्यूएशन कंपनियों पर दबाव बढ़ता है।

बाज़ार जानकारों के अनुसार, ऊँचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अभी अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा है।

तकनीकी संकेत और आगे की राह

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बाज़ार फिलहाल एक समेकन (कंसोलिडेशन) के दौर में प्रवेश कर सकता है। निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर निकटतम महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 23,100 का लक्ष्य व्यापक दृष्टिकोण में बरकरार है।

वैश्विक स्तर पर भी माहौल सतर्कतापूर्ण बना हुआ है — कच्चे तेल की कीमतों में मज़बूती और भू-राजनीतिक तनावों ने एशियाई बाज़ारों को भी प्रभावित किया, जहाँ गुरुवार को मिश्रित रुख देखा गया। जब तक अमेरिकी यील्ड में नरमी नहीं आती और FPI प्रवाह स्थिर नहीं होता, विशेषज्ञ भारतीय बाज़ारों में सतर्क रवैये की सलाह दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

121 करोड़ का एकल-दिवसीय निकास बताता है कि विदेशी पूँजी अभी भी भारत को 'होल्ड' मोड में देख रही है, 'बाय' मोड में नहीं। DII की खरीदारी राहत ज़रूर दे रही है, लेकिन वह गिरावट को थाम नहीं पा रही। असली चिंता यह है कि अमेरिकी यील्ड में नरमी के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं, और RBI की नई नीति के बाद घरेलू मोर्चे पर भी लिक्विडिटी का दबाव बना रहेगा — जो मिड और स्मॉलकैप की तेज़ी पर ब्रेक लगा सकता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स कितना गिरा और क्यों?
8 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स 492 अंक यानी 0.67 प्रतिशत गिरकर इंट्रा-डे लो 72,175.95 पर आया। इसके पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना, FPI की भारी बिकवाली और RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद इक्विटी वैल्यूएशन पर बढ़ता दबाव प्रमुख कारण रहे।
FPI ने भारतीय बाज़ार से कितनी निकासी की?
बुधवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹6,121 करोड़ से अधिक की निकासी की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग ₹4,596 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को आंशिक सहारा दिया।
RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी का शेयर बाज़ार पर क्या असर है?
RBI ने 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख अपनाते हुए रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। विश्लेषकों के अनुसार इससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि ऊँची ब्याज दरें फिक्स्ड इनकम उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाती हैं और ग्रोथ स्टॉक्स की कीमतों पर नकारात्मक असर डालती हैं।
आज के कारोबार में कौन-से सेक्टर बेहतर और कौन-से कमज़ोर रहे?
निफ्टी आईटी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा 0.59 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ सबसे बेहतर रहे। वहीं निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (एक्स-बैंक), निफ्टी एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर 0.38 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ दबाव में रहे।
निफ्टी के लिए अगले महत्वपूर्ण सपोर्ट और प्रतिरोध स्तर क्या हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर निकटतम महत्वपूर्ण सपोर्ट है। ऊपर की ओर 23,100 का लक्ष्य व्यापक दृष्टिकोण में बरकरार माना जा रहा है, हालाँकि बाज़ार फिलहाल समेकन के दौर में प्रवेश कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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