मुंबई रिडेवलपमेंट से 2031 तक ₹1.50 लाख करोड़ के 59,000 नए घर तैयार होंगे: नाइट फ्रैंक रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई की रिडेवलपमेंट पाइपलाइन 2031 तक लगभग 59,000 नए आवास बाज़ार में लाएगी, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹1.50 लाख करोड़ होगी। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक इंडिया की 15 जून 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में मुंबई का आवासीय ढाँचा व्यक्तिगत पुराने मकानों से बड़े बहुमंज़िला परिसरों की ओर तेज़ी से स्थानांतरित हो रहा है।
रिडेवलपमेंट की मौजूदा स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में रिडेवलपमेंट गतिविधियाँ उल्लेखनीय रूप से मज़बूत रही हैं। इस वर्ष के पहले 90 दिनों में लगभग 70 डेवलपर एग्रीमेंट (DA) संपन्न हुए, जो 2025 के पूरे वर्ष में हुए कुल एग्रीमेंट्स का 30 प्रतिशत है। मुंबई में डेवलपर एग्रीमेंट का कुल आँकड़ा 2020 के बाद पहली बार 1,050 का आँकड़ा पार कर गया है।
वर्तमान में 1,094 सोसाइटियाँ रिडेवलपमेंट की प्रक्रिया में हैं और इनके अंतर्गत 432 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य जारी है।
सरकार को राजस्व का अनुमान
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि सोसाइटी रिडेवलपमेंट परियोजनाओं से राज्य सरकार को ₹9,115 करोड़ की स्टांप ड्यूटी प्राप्त हो सकती है। यह आँकड़ा राज्य के राजस्व के लिहाज़ से भी रिडेवलपमेंट की अहमियत को रेखांकित करता है।
उपनगरों में केंद्रित हो रहा रिडेवलपमेंट
रिडेवलपमेंट गतिविधियाँ तेज़ी से मुंबई के उपनगरीय इलाकों में सिमट रही हैं — पाइपलाइन का 95 प्रतिशत हिस्सा उपनगरों में है। इनमें वेस्टर्न सबर्ब्स सबसे आगे हैं, जहाँ 773 सोसाइटियों का पुनर्विकास हो रहा है। सेंट्रल सबर्ब्स में 261 सोसाइटियाँ इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
पुरानी इमारतें और जनसंख्या घनत्व
रिपोर्ट में मुंबई के बढ़ते शहरी घनत्व और जर्जर होते आवासीय स्टॉक को रिडेवलपमेंट की मुख्य वजह बताया गया है। शहर में लगभग 1.6 लाख इमारतें 30 वर्ष से अधिक पुरानी हैं और इन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट के दायरे में रखा गया है। इनमें वेस्टर्न सबर्ब्स में सर्वाधिक 46 प्रतिशत इमारतें हैं, इसके बाद आइलैंड सिटी (28 प्रतिशत) और ईस्टर्न सबर्ब्स (26 प्रतिशत) का स्थान है।
मुंबई का जनसंख्या घनत्व लगभग 30,600 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो टोक्यो, न्यूयॉर्क और सिंगापुर जैसे वैश्विक महानगरों से भी काफी अधिक है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि रिडेवलपमेंट अब केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं, बल्कि शहरी ज़रूरत बन चुका है।
आगे क्या
रिडेवलपमेंट की इस रफ़्तार को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई का आवासीय बाज़ार अगले पाँच वर्षों में संरचनात्मक रूप से बदल जाएगा। यदि परियोजनाएँ समय पर पूरी होती हैं, तो यह न केवल आवास की उपलब्धता बढ़ाएगा, बल्कि शहर की पुरानी इमारतों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को भी दूर करेगा।