एनएफआई का 7वां संस्करण लॉन्च, भारत WHO मरीज सुरक्षा रैंकिंग में 123वें से 8वें स्थान पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा आयोजित छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) के 7वें संस्करण और ADR-PVPI 2.0 मोबाइल ऐप के iOS संस्करण का शुभारंभ किया। इसके साथ ही देश में मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की निगरानी को डिजिटल रूप से और सशक्त बनाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की गई।
मुख्य घोषणाएँ और नई पहलें
कार्यक्रम में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अस्पतालों के लिए 'मेडिकल डिवाइस से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की सुरक्षा निगरानी और रिपोर्टिंग' संबंधी मार्गदर्शिका भी जारी की। यह मार्गदर्शिका स्वास्थ्य संस्थानों को चिकित्सा उपकरणों से उत्पन्न दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग के लिए एक मानकीकृत ढाँचा प्रदान करेगी।
इसके अलावा, भारत के बायोविजिलेंस कार्यक्रम को औपचारिक मंजूरी दिए जाने की भी घोषणा की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाली दवाओं तथा जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा — जिसमें दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों को दी जाने वाली जैविक सामग्री शामिल होगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्मों का विस्तार
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, NFI का सातवाँ संस्करण अब NFI ऑनलाइन के माध्यम से डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं की मानकीकृत जानकारी तत्काल और सुगमता से मिल सकेगी।
मंत्री ने बताया कि NFI ऑनलाइन, IP ऑनलाइन, ADR-PVPI 2.0 मोबाइल ऐप और एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम (ADRMS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म दवाओं से जुड़ी प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे हैं। गौरतलब है कि ADR-PVPI 2.0 का iOS संस्करण पहले से उपलब्ध Android संस्करण की पूरक कड़ी है।
वैश्विक रैंकिंग में भारत की छलाँग
अनुप्रिया पटेल ने एक उल्लेखनीय आँकड़ा साझा किया — भारत 2009-14 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मरीज सुरक्षा डेटाबेस में 123वें स्थान पर था, जबकि अब देश 8वें स्थान पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रगति इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल दूसरे देशों से प्राप्त सुरक्षा आँकड़ों पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वयं वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार कर वैश्विक स्तर पर योगदान भी दे रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत दवा निर्माण में विश्व के अग्रणी देशों में शुमार है और घरेलू फार्माकोविजिलेंस तंत्र की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय दवाओं की साख के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर
मंत्री ने जोर देकर कहा कि दवाओं का संतुलित और तर्कसंगत उपयोग तथा उनकी निरंतर सुरक्षा निगरानी सार्वजनिक स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक मरीज को सही गुणवत्ता वाली उचित दवा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।' मंत्रालय के अनुसार, फार्माकोविजिलेंस, मैटेरियोविजिलेंस और बायोविजिलेंस की त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं की सुरक्षा को व्यापक रूप से कवर करेगी।
आगे की राह
राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 17 से 23 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नियामक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता और दवा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न हितधारक भाग ले रहे हैं। अनुप्रिया पटेल ने भारत के स्वदेशी दवा सुरक्षा तंत्र को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और संकेत दिया कि आने वाले समय में इन डिजिटल प्लेटफॉर्मों को और अधिक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुँचाने की योजना है।