21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एनएफआई का 7वां संस्करण लॉन्च, भारत WHO मरीज सुरक्षा रैंकिंग में 123वें से 8वें स्थान पर पहुँचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एनएफआई का 7वां संस्करण लॉन्च, भारत WHO मरीज सुरक्षा रैंकिंग में 123वें से 8वें स्थान पर पहुँचा

सारांश

भारत WHO मरीज सुरक्षा डेटाबेस में 123वें से सीधे 8वें स्थान पर — यह महज रैंकिंग सुधार नहीं, बल्कि देश के स्वदेशी फार्माकोविजिलेंस तंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है। NFI के 7वें संस्करण और बायोविजिलेंस कार्यक्रम की मंजूरी के साथ, भारत दवा और प्रत्यारोपण सुरक्षा में नया मानक स्थापित कर रहा है।

मुख्य बातें

21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में NFI के 7वें संस्करण और ADR-PVPI 2.0 के iOS संस्करण का शुभारंभ किया गया।
भारत WHO के मरीज सुरक्षा डेटाबेस में 2009-14 के 123वें स्थान से अब 8वें स्थान पर पहुँच गया है।
केंद्र सरकार ने बायोविजिलेंस कार्यक्रम को मंजूरी दी — अंग-ऊतक प्रत्यारोपण से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी होगी।
अस्पतालों के लिए मेडिकल डिवाइस प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग संबंधी मार्गदर्शिका जारी।
NFI ऑनलाइन , IP ऑनलाइन , ADR-PVPI 2.0 ऐप और ADRMS — चार डिजिटल प्लेटफॉर्म दवा सुरक्षा रिपोर्टिंग को सुलभ बनाएँगे।
राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 17 से 23 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा आयोजित छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) के 7वें संस्करण और ADR-PVPI 2.0 मोबाइल ऐप के iOS संस्करण का शुभारंभ किया। इसके साथ ही देश में मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की निगरानी को डिजिटल रूप से और सशक्त बनाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की गई।

मुख्य घोषणाएँ और नई पहलें

कार्यक्रम में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अस्पतालों के लिए 'मेडिकल डिवाइस से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की सुरक्षा निगरानी और रिपोर्टिंग' संबंधी मार्गदर्शिका भी जारी की। यह मार्गदर्शिका स्वास्थ्य संस्थानों को चिकित्सा उपकरणों से उत्पन्न दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग के लिए एक मानकीकृत ढाँचा प्रदान करेगी।

इसके अलावा, भारत के बायोविजिलेंस कार्यक्रम को औपचारिक मंजूरी दिए जाने की भी घोषणा की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाली दवाओं तथा जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा — जिसमें दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों को दी जाने वाली जैविक सामग्री शामिल होगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्मों का विस्तार

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, NFI का सातवाँ संस्करण अब NFI ऑनलाइन के माध्यम से डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं की मानकीकृत जानकारी तत्काल और सुगमता से मिल सकेगी।

मंत्री ने बताया कि NFI ऑनलाइन, IP ऑनलाइन, ADR-PVPI 2.0 मोबाइल ऐप और एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम (ADRMS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म दवाओं से जुड़ी प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे हैं। गौरतलब है कि ADR-PVPI 2.0 का iOS संस्करण पहले से उपलब्ध Android संस्करण की पूरक कड़ी है।

वैश्विक रैंकिंग में भारत की छलाँग

अनुप्रिया पटेल ने एक उल्लेखनीय आँकड़ा साझा किया — भारत 2009-14 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मरीज सुरक्षा डेटाबेस में 123वें स्थान पर था, जबकि अब देश 8वें स्थान पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रगति इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल दूसरे देशों से प्राप्त सुरक्षा आँकड़ों पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वयं वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार कर वैश्विक स्तर पर योगदान भी दे रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत दवा निर्माण में विश्व के अग्रणी देशों में शुमार है और घरेलू फार्माकोविजिलेंस तंत्र की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय दवाओं की साख के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर

मंत्री ने जोर देकर कहा कि दवाओं का संतुलित और तर्कसंगत उपयोग तथा उनकी निरंतर सुरक्षा निगरानी सार्वजनिक स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक मरीज को सही गुणवत्ता वाली उचित दवा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।' मंत्रालय के अनुसार, फार्माकोविजिलेंस, मैटेरियोविजिलेंस और बायोविजिलेंस की त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं की सुरक्षा को व्यापक रूप से कवर करेगी।

आगे की राह

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 17 से 23 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नियामक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता और दवा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न हितधारक भाग ले रहे हैं। अनुप्रिया पटेल ने भारत के स्वदेशी दवा सुरक्षा तंत्र को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और संकेत दिया कि आने वाले समय में इन डिजिटल प्लेटफॉर्मों को और अधिक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुँचाने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सुधार ज़मीन पर दवा दुष्प्रभाव की रिपोर्टिंग में परिलक्षित होता है — या यह मुख्यतः डेटा-सबमिशन की मात्रा बढ़ने का नतीजा है। भारत में हर साल लाखों मरीज दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों से प्रभावित होते हैं, पर रिपोर्टिंग अभी भी मुख्यतः बड़े अस्पतालों तक सीमित है। बायोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस को औपचारिक ढाँचे में लाना सही दिशा है, लेकिन इसकी सफलता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ज़िला अस्पतालों में डिजिटल प्लेटफॉर्मों की पहुँच और स्वास्थ्यकर्मियों की रिपोर्टिंग संस्कृति पर टिकी है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) का 7वाँ संस्करण क्या है?
NFI का 7वाँ संस्करण भारत सरकार द्वारा जारी दवाओं की मानकीकृत सूची और उनके उपयोग संबंधी दिशानिर्देशों का अद्यतन संस्करण है, जो अब NFI ऑनलाइन के माध्यम से डिजिटल रूप में भी उपलब्ध है। इसे 21 सितंबर 2026 को छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह में लॉन्च किया गया।
ADR-PVPI 2.0 मोबाइल ऐप का iOS संस्करण क्या काम करता है?
ADR-PVPI 2.0 ऐप का iOS संस्करण डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों को दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्ट सीधे भारतीय फार्माकोपिया आयोग को करने की सुविधा देता है। यह ऐप दवा सुरक्षा डेटा संग्रह को अधिक सुलभ और त्वरित बनाता है।
भारत का बायोविजिलेंस कार्यक्रम क्या है और इसे क्यों मंजूरी दी गई?
बायोविजिलेंस कार्यक्रम अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी, रिपोर्टिंग और रोकथाम के लिए है। इसे केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दी है ताकि दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
WHO मरीज सुरक्षा रैंकिंग में भारत की स्थिति में कितना सुधार हुआ है?
भारत 2009-14 में WHO के मरीज सुरक्षा डेटाबेस में 123वें स्थान पर था और अब 8वें स्थान पर पहुँच गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के अनुसार, यह सुधार भारत के स्वदेशी वैज्ञानिक साक्ष्य-निर्माण की क्षमता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 कब मनाया जा रहा है?
राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 का आयोजन 17 से 23 सितंबर 2026 के बीच किया जा रहा है। इस आयोजन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नियामक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और दवा सुरक्षा से जुड़े हितधारक भाग ले रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले