2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीति आयोग की कोलकाता में SDG बजटिंग कार्यशाला, 32 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीति आयोग की कोलकाता में SDG बजटिंग कार्यशाला, 32 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल

सारांश

नीति आयोग ने कोलकाता में 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ एसडीजी बजट टैगिंग पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। यूएनडीपी और सीएजी के सहयोग से तैयार गाइड पर चर्चा हुई, जो 2030 की समयसीमा से पहले सरकारी खर्च को विकास लक्ष्यों से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार और यूएनडीपी के सहयोग से कोलकाता में एसडीजी बजटिंग पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की।
32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में भाग लिया।
वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि एसडीजी बजट टैगिंग बजट आवंटन और विकास लक्ष्यों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित करती है।
नीति आयोग , सीएजी और यूएनडीपी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार 'राज्य के बजट को एसडीजी से जोड़ने के लिए गाइड' पर विस्तृत चर्चा हुई।
वार्षिक बजट प्रक्रिया में संस्थागत जिम्मेदारियाँ, गुणवत्ता आश्वासन और प्रदर्शन ऑडिट जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
एक विशेष सत्र में एसडीजी प्राप्ति में निजी क्षेत्र की भूमिका और नवाचारी वित्तपोषण पर प्रकाश डाला गया।

नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के तकनीकी समर्थन से कोलकाता में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) बजटिंग पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आयोजन नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्यों की योजना और बजट प्रक्रियाओं को सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालना तथा राज्य स्तर पर एसडीजी बजट टैगिंग को संस्थागत रूप देना था।

कार्यशाला का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हुई जब 2030 की एसडीजी समयसीमा तेज़ी से निकट आ रही है और देश के कई राज्यों में सरकारी व्यय तथा विकास प्राथमिकताओं के बीच सामंजस्य की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया गया कि बजट आवंटन और वास्तविक खर्च को एसडीजी लक्ष्यों से स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए, ताकि नीतिगत जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

मुख्य वक्तव्य और विचार-विमर्श

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि एसडीजी बजट टैगिंग विकास लक्ष्यों, निर्धारित लक्ष्यों, बजट आवंटन और खर्च के लिए ज़िम्मेदार एजेंसियों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि इससे यह समझना सुलभ होता है कि सरकारी व्यय किस प्रकार विकास प्राथमिकताओं को समर्थन दे रहा है।

नीति आयोग के सदस्य आर. बालासुब्रमण्यम ने रेखांकित किया कि राज्य सरकारों के खर्च को एसडीजी के साथ मैप करना एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सार्वजनिक व्यय वास्तव में उन क्षेत्रों में हो जो समावेशी और सतत विकास के लिए अनिवार्य हैं।

गाइड और तकनीकी रूपरेखा

कार्यशाला के दौरान 'राज्य के बजट को एसडीजी से जोड़ने के लिए गाइड' पर भी व्यापक चर्चा हुई। यह मार्गदर्शिका नीति आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और यूएनडीपी ने संयुक्त रूप से तैयार की है। इसमें राज्यों के बजट को एसडीजी के साथ जोड़ने के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

विचार-विमर्श में यह प्रश्न केंद्रीय रहे कि एसडीजी टैगिंग के लिए किन व्ययों की पहचान की जाए, टैगिंग का उचित स्तर क्या हो, व्यय को संबंधित लेखा शीर्षों और एसडीजी लक्ष्यों से किस प्रकार जोड़ा जाए, तथा नीति आयोग की योजना-एसडीजी मैपिंग प्रणाली के माध्यम से मूल्यों का निर्धारण कैसे हो।

प्रतिभागिता और व्यापक भागीदारी

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। नीति आयोग, सीएजी, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और विभिन्न सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

यूएनडीपी, संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय, विकास भागीदार संस्थाओं, उद्योग संगठनों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी इस आयोजन में भाग लिया। एक विशेष सत्र में निजी क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया गया, जिसमें नीति ढाँचे, नवाचारी वित्तपोषण और ज़िम्मेदार व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से एसडीजी की प्राप्ति में योगदान पर चर्चा हुई।

आगे की राह

प्रतिभागियों ने वार्षिक बजट प्रक्रिया में एसडीजी बजटिंग को शामिल करने से जुड़े संस्थागत दायित्वों, व्ययों के मिलान, गुणवत्ता आश्वासन, रिपोर्टिंग प्रणाली और प्रदर्शन ऑडिट जैसे पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया। नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कार्यशाला राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी योजना, बजट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सतत विकास लक्ष्यों को प्रभावी रूप से शामिल करने में सहायता देने की उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — भारत में बजट घोषणाओं और ज़मीनी खर्च के बीच की खाई ऐतिहासिक रूप से चौड़ी रही है। गौरतलब है कि 32 राज्यों की भागीदारी संख्या में प्रभावशाली है, परंतु जब तक राज्य वित्त विभाग इस टैगिंग को अपनी बजट प्रणाली में सांस्थानिक रूप से नहीं अपनाते, यह अभ्यास महज कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह सकता है। नीति आयोग, सीएजी और यूएनडीपी का साझा मार्गदर्शन सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे बाध्यकारी रिपोर्टिंग और स्वतंत्र प्रदर्शन ऑडिट से जोड़े बिना एसडीजी 2030 के लक्ष्य अधूरे रहने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की एसडीजी बजटिंग कार्यशाला क्या थी?
यह कोलकाता में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला थी, जिसमें राज्यों की बजट प्रक्रियाओं को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इसका आयोजन नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत पश्चिम बंगाल सरकार और यूएनडीपी के सहयोग से हुआ।
एसडीजी बजट टैगिंग क्या होती है और यह क्यों ज़रूरी है?
एसडीजी बजट टैगिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सरकारी व्यय को सतत विकास लक्ष्यों से स्पष्ट रूप से जोड़ा जाता है। इससे यह पारदर्शी होता है कि सार्वजनिक धन किन विकास प्राथमिकताओं पर खर्च हो रहा है और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
इस कार्यशाला में कितने राज्यों ने भाग लिया?
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। नीति आयोग, सीएजी, एमओएसपीआई और विभिन्न सरकारी संस्थानों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एसडीजी बजट गाइड किसने तैयार की है?
'राज्य के बजट को एसडीजी से जोड़ने के लिए गाइड' को नीति आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और यूएनडीपी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह मार्गदर्शिका राज्यों को उनकी बजट प्रक्रिया में एसडीजी को व्यावहारिक रूप से शामिल करने का ढाँचा प्रदान करती है।
इस कार्यशाला में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका रही?
कार्यशाला में निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें नीति ढाँचे, नवाचारी वित्तपोषण और ज़िम्मेदार व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति में निजी क्षेत्र के योगदान पर चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले