नोएडा सेक्टर 79: सिक्का किमांतरा ग्रीन्स के 250 निवासियों का सिक्का बिल्डर्स के खिलाफ विरोध, बिजली-पानी संकट तीन साल से जारी
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर 79 स्थित सिक्का किमांतरा ग्रीन्स सोसाइटी के करीब 250 निवासियों ने 22 अगस्त 2026 (शनिवार) को सिक्का बिल्डर्स के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। निवासियों का आरोप है कि फ्लैट खरीदने के तीन साल बाद भी उन्हें बिजली और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं, और बार-बार शिकायत के बावजूद बिल्डर की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्य घटनाक्रम
निवासियों के अनुसार, सोसाइटी में पानी इतना खारा है कि उसे पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। एक निवासी ने बताया, 'खारे पानी की वजह से हमारे बाल झड़ने लगे हैं। बिजली दिन में 10 से 25 बार गुल हो जाती है और 10-10 मिनट बाद आती है।' यह स्थिति सोसाइटी के अस्तित्व में आने के पहले दिन से ही बनी हुई है।
बिल्डर पर आरोप
निवासियों का कहना है कि सिक्का बिल्डर्स ने फ्लैट की पूरी कीमत के साथ-साथ अतिरिक्त राशि भी वसूल की है, फिर भी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। एक निवासी ने आरोप लगाया, 'शिकायत करने पर वे 'बस अगले महीने हो जाएगा' कहकर टाल देते हैं। बिल्डर्स का काम करने का कोई इरादा ही नहीं दिखता।' निवासियों ने बताया कि वे बिल्डर के कार्यालय जाकर बैठक करने का अनुरोध भी कर चुके हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य और स्वच्छता संकट
सोसाइटी में साफ-सफाई की भी गंभीर कमी बताई जा रही है। निवासियों के अनुसार, एक फव्वारे में पानी भर जाने से वह सड़ गया है, जिससे डेंगू का खतरा पैदा हो गया है। कथित तौर पर आए दिन लोग बीमार पड़ रहे हैं और अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान डेंगू के मामले पहले से बढ़े हुए हैं।
निवासियों की माँग
प्रदर्शनकारियों ने माँग की है कि सिक्का बिल्डर्स तत्काल स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति और सोसाइटी में उचित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें। निवासियों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों और नोएडा प्राधिकरण के पास भी अपनी शिकायत दर्ज कराएँगे। गौरतलब है कि यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों और बिल्डरों की जवाबदेही के व्यापक सवाल को भी उजागर करता है।
आगे क्या
अब तक सिक्का बिल्डर्स की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि तीन साल से चली आ रही इस समस्या पर अब तक कोई हस्तक्षेप क्यों नहीं हुआ। यदि बिल्डर ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो निवासी रेरा (RERA) के तहत कानूनी कार्रवाई का विकल्प भी तलाश सकते हैं।