ओमान बना भारत का शीर्ष एलएनजी आपूर्तिकर्ता, सितंबर में अमेरिका तीसरे स्थान पर खिसका
सारांश
मुख्य बातें
भारत के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात में सितंबर 2026 के दौरान उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया — ओमान पहली बार भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा और उसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी क्प्लर के आंकड़ों के अनुसार, यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।
आंकड़ों में बदलाव
क्प्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत ने ओमान से 5.85 लाख टन एलएनजी आयात किया, जो अगस्त 2026 की तुलना में 11.6 प्रतिशत अधिक था। इस माह कुल एलएनजी आयात में ओमान की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत रही, जिससे वह सूची में शीर्ष पर आ गया।
नाइजीरिया सितंबर में 3.51 लाख टन आयात के साथ दूसरे स्थान पर रहा, हालांकि यह आंकड़ा अगस्त की तुलना में 35 प्रतिशत कम था। अगस्त में शीर्ष आपूर्तिकर्ता रहा अमेरिका सितंबर में तीसरे स्थान पर खिसक गया — अमेरिका से आयात 59 प्रतिशत घटकर कुल आयात में लगभग 16 प्रतिशत हिस्सेदारी तक सीमित रह गया।
कतर की हिस्सेदारी में भारी गिरावट
एक समय भारत के एलएनजी आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहे कतर की स्थिति सितंबर में और कमज़ोर हो गई। आंकड़ों के अनुसार, कतर से केवल 94,000 टन एलएनजी का आयात हुआ और वह छठे स्थान पर रहा। इसके मुकाबले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 3.11 लाख टन और अंगोला ने 2.05 लाख टन एलएनजी भारत को निर्यात की।
विश्लेषकों के अनुसार, कतर की आपूर्ति में आई गिरावट का प्रमुख कारण मार्च 2026 में रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले का प्रभाव है। यह क्षेत्र कतर का प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्र है और भारत सहित कई देशों के लिए प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।
कुल आयात में भी कमी
सितंबर में भारत का कुल एलएनजी आयात भी घटा। अगस्त 2026 में जहाँ कुल आयात 25 लाख टन था, वहीं सितंबर में यह 14 प्रतिशत घटकर 21.7 लाख टन रह गया। गौरतलब है कि प्राकृतिक गैस भारत की अर्थव्यवस्था के कई अहम क्षेत्रों — उर्वरक उत्पादन, औद्योगिक ताप, बिजली उत्पादन और शहरी परिवहन — के लिए ज़रूरी है। भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है।
ऊर्जा विविधीकरण की रणनीति
वर्तमान में भारत के एलएनजी आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कतर और यूएई सहित पश्चिम एशियाई देशों से आता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है, जिससे क्षेत्रीय तनावों का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
इसी भू-राजनीतिक जोखिम को कम करने के लिए भारत सरकार ने हाल के वर्षों में स्रोत-विविधीकरण की नीति अपनाई है। इसके तहत एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की खरीद कनाडा, अल्जीरिया, अमेरिका, मोजाम्बिक और ब्राजील जैसे देशों से भी बढ़ाई जा रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के कच्चे तेल आयात अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं क्योंकि उनके स्रोत पर्याप्त रूप से विविध हो चुके हैं। लेकिन एलएनजी और एलपीजी के मामले में स्थिति अलग है — इनके विकल्प सीमित हैं और खाड़ी क्षेत्र में किसी भी आपूर्ति या शिपिंग व्यवधान का असर भारतीय बाज़ार पर तेज़ी से पड़ सकता है। सितंबर के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि भारत की आयात रणनीति अब केवल मूल्य-आधारित नहीं, बल्कि जोखिम-आधारित भी होती जा रही है।