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भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल अप्रैल-सितंबर 2026 में 23% उछला, $8.5 अरब पर पहुँचा

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भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल अप्रैल-सितंबर 2026 में 23% उछला, $8.5 अरब पर पहुँचा

सारांश

मध्य पूर्व संघर्ष और होर्मुज़-लाल सागर व्यवधान ने भारत को महंगा अमेरिकी एलएनजी खरीदने पर मजबूर कर दिया। नतीजा: छह महीनों में गैस आयात बिल 23% उछला और आयात निर्भरता 52.3% पर पहुँची — जबकि ONGC व OIL के पुराने होते क्षेत्र घरेलू उत्पादन को खींच रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल अप्रैल-सितंबर 2026 में 23% उछलकर $8.5 अरब डॉलर पर पहुँचा; पिछले वर्ष यह $6.9 अरब डॉलर था।
LNG आयात मात्रा भी 4.4% बढ़कर 18,189 MMSCM हुई।
घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन 4.4% घटकर 16,804 MMSCM ; कारण ONGC और OIL के पुराने क्षेत्र।
प्राकृतिक गैस आयात निर्भरता बढ़कर 52.3% हुई, जो पिछले वर्ष 50.1% थी।
होर्मुज़ स्ट्रेट और लाल सागर व्यवधान के चलते अमेरिका से अधिक एलएनजी खरीदनी पड़ी, जिससे परिवहन लागत बढ़ी।
सितंबर 2026 में गैस आयात बिल $1.2 अरब डॉलर , लेकिन मात्रा 8.5% घटकर 2,957 MMSCM ।

मध्य पूर्व संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में तेज़ी के चलते भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ $8.5 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में $6.9 अरब डॉलर था। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) द्वारा संकलित आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

आयात बिल क्यों बढ़ा

आंकड़ों के अनुसार, आयात बिल में यह उछाल मुख्यतः कीमतों में बढ़ोतरी से प्रेरित है। हालाँकि, इस अवधि में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात की मात्रा में भी 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई — यह 17,414 MMSCM से बढ़कर 18,189 MMSCM हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, होर्मुज़ स्ट्रेट से होने वाली आवाजाही बाधित होने से खाड़ी क्षेत्र से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसके कारण तेल विपणन कंपनियों को अमेरिका से अधिक एलएनजी खरीदनी पड़ी और परिवहन लागत में इज़ाफ़ा हुआ।

घरेलू उत्पादन में गिरावट

एक और चिंताजनक पहलू यह है कि इसी अवधि में घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन 4.4 प्रतिशत घटकर 16,804 MMSCM रह गया, जो एक वर्ष पहले 17,585 MMSCM था। इसका कारण ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के पुराने होते गैस क्षेत्रों को बताया गया है। घरेलू उत्पादन में यह गिरावट और आयात पर बढ़ती निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से एक गंभीर संकेत है।

आयात निर्भरता और खपत के आँकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 में भारत की प्राकृतिक गैस के लिए आयात पर निर्भरता बढ़कर 52.3 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 50.1 प्रतिशत थी। वहीं, कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग स्थिर रही — यह 34,773 MMSCM से मामूली घटकर 34,769 MMSCM दर्ज की गई। सितंबर माह के आंकड़े दर्शाते हैं कि गैस आयात बिल सालाना आधार पर लगभग स्थिर रहकर $1.2 अरब डॉलर रहा, लेकिन आयात मात्रा 8.5 प्रतिशत घटकर 2,957 MMSCM रह गई।

भू-राजनीतिक संकट की भूमिका

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहराता जा रहा है। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों ने लाल सागर क्षेत्र को समुद्री व्यापार के लिए एक नई प्रमुख बाधा में बदल दिया है। गौरतलब है कि होर्मुज़ स्ट्रेट के बाद अब लाल सागर भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के लिए एक बड़ी अड़चन बन चुका है। हूती विद्रोहियों ने तटीय क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है, जिससे जहाज़रानी जोखिम और बीमा प्रीमियम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

आगे की राह

यदि मध्य पूर्व में तनाव बना रहा और घरेलू उत्पादन में गिरावट जारी रही, तो आयात निर्भरता 55 प्रतिशत से ऊपर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को गैस क्षेत्र में दीर्घकालिक घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार के पास अभी तक ONGC व OIL के पुराने होते क्षेत्रों के लिए कोई ठोस त्वरित उपाय सामने नहीं आया है। भू-राजनीतिक जोखिम — होर्मुज़ के बाद अब लाल सागर — भारत की आपूर्ति शृंखला की भेद्यता को उजागर करते हैं। जब तक आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और घरेलू नई खोजों में निवेश नहीं बढ़ता, हर भू-राजनीतिक झटका भारत के आयात बिल को और ऊँचा धकेलता रहेगा।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल इस बार क्यों बढ़ा?
मध्य पूर्व में तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज़ी और होर्मुज़ स्ट्रेट व लाल सागर में आवाजाही बाधित होने से आयात लागत बढ़ी। PPAC आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-सितंबर 2026 में बिल 23% उछलकर $8.5 अरब डॉलर हो गया।
भारत की गैस आयात निर्भरता कितनी हो गई है?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-सितंबर 2026 में भारत की प्राकृतिक गैस आयात निर्भरता बढ़कर 52.3% हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 50.1% थी।
घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट के क्या कारण हैं?
ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के पुराने होते गैस क्षेत्रों को इसका प्रमुख कारण बताया गया है। अप्रैल-सितंबर 2026 में घरेलू उत्पादन 4.4% घटकर 16,804 MMSCM रह गया।
लाल सागर और होर्मुज़ संकट का भारत की गैस आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज़ स्ट्रेट में व्यवधान के बाद यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों से लाल सागर भी जोखिम क्षेत्र बन गया। इससे खाड़ी देशों से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हुई और भारतीय कंपनियों को महंगा अमेरिकी एलएनजी खरीदना पड़ा।
PPAC क्या है और इसके आंकड़े क्यों महत्वपूर्ण हैं?
PPAC यानी पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ भारत सरकार की एक आधिकारिक संस्था है जो ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़े संकलित करती है। इसके आंकड़े नीति-निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा आकलन के लिए आधार माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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