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पीएम-एमकेएसएसवाई से मत्स्य किसानों को बीमा सुरक्षा, मछली उत्पादन 2024-25 में 19.8 मिलियन टन पहुँचा

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पीएम-एमकेएसएसवाई से मत्स्य किसानों को बीमा सुरक्षा, मछली उत्पादन 2024-25 में 19.8 मिलियन टन पहुँचा

सारांश

भारत का मछली उत्पादन एक दशक में दोगुना होकर 19.8 मिलियन टन पहुँचा, लेकिन असली खबर यह है कि पीएम-एमकेएसएसवाई अब इस विकास को बीमा सुरक्षा का कवच दे रही है — 40% प्रीमियम सहायता, डिजिटल डीबीटी और तय समय-सीमा में दावा निपटान के साथ। छोटे, एससी/एसटी और महिला किसानों को अतिरिक्त 10% का लाभ।

मुख्य बातें

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार भारत का कुल मछली उत्पादन 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन हो गया।
पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत पात्र किसानों को बीमा प्रीमियम पर 40% तक की सहायता; तालाब-आधारित कृषि में अधिकतम ₹1 लाख (चार हेक्टेयर तक)।
अब तक 316 आवेदन प्राप्त, 127 स्वीकृत ; 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को ₹40.03 लाख वितरित।
एससी, एसटी और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी से अतिरिक्त 10% प्रोत्साहन।
झींगा पालन दावों का निपटारा 30 दिन में और अन्य जलीय कृषि दावों का 45 दिन में अनिवार्य।
लाभ नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के जरिए डीबीटी से सीधे किसानों के खातों में।

केंद्र सरकार द्वारा 28 सितंबर को जारी फैक्टशीट के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत बीमा पहल भारत के मत्स्य किसानों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है। देश का कुल मछली उत्पादन 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन तक पहुँच गया है — एक दशक में लगभग दोगुना। इस विस्तार को टिकाऊ बनाए रखने के लिए 2024 में शुरू की गई यह योजना रोग, बाढ़ और जलवायु जोखिमों से किसानों को वित्तीय राहत देने का काम कर रही है।

मत्स्य क्षेत्र की विकास यात्रा

आँकड़ों के अनुसार, अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन 6.1 मिलियन टन से बढ़कर 14.74 मिलियन टन हो गया है, जो इस क्षेत्र की असाधारण प्रगति को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ब्लू इकोनॉमी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि मत्स्य पालन लाखों तटीय और अंतर्देशीय समुदायों की आजीविका का मुख्य आधार है।

योजना की बीमा संरचना और लाभ

पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत पात्र मत्स्य किसानों को बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। तालाब-आधारित जलीय कृषि में यह सहायता ₹25,000 प्रति हेक्टेयर तक है, जबकि अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र के लिए ₹1 लाख तक का लाभ उपलब्ध है। एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसानों को भी अनुपातिक आधार पर सहायता दी जाती है।

आधुनिक तकनीकों — जैसे केज कल्चर, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लॉक, रेसवे — के लिए भी 40 प्रतिशत प्रीमियम सहायता उपलब्ध है। इस श्रेणी में अधिकतम सहायता ₹1 लाख है और पात्र इकाई का आकार 1,800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी की तुलना में अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन भी मिलता है।

कौन-सी बीमा कंपनियाँ शामिल हैं

फिलहाल चार सरकारी बीमा कंपनियाँ — ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ओआईसीएल), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एआईसीएल), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएएल) और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसी) — इस योजना में भागीदार हैं। ये कंपनियाँ झींगा, प्रॉन, ताजे पानी की मछलियों और ठंडे पानी की प्रजातियों के लिए बीमा कवरेज प्रदान कर रही हैं। सरकार निजी बीमा कंपनियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया में है।

योजना के लाभों का वितरण नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है।

अब तक के परिणाम

फैक्टशीट के अनुसार, योजना के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। अब तक 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं। इनमें से 127 आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है और 321.74 हेक्टेयर में मत्स्य पालन करने वाले किसानों को कुल ₹40.03 लाख की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।

दावा निपटान की प्रक्रिया और समय-सीमा

बीमित जोखिम की घटना होने पर किसान को तत्काल संबंधित बीमा कंपनी को सूचित करना होता है। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज जमा कर विशेषज्ञ द्वारा नुकसान का आकलन कराया जाता है और रिपोर्ट के आधार पर दावा निपटाया जाता है। झींगा पालन से जुड़े दावों का निपटारा 30 दिनों के भीतर और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए 45 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। पूरी प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनी अपने पोर्टल पर नियमित स्थिति अपडेट उपलब्ध कराती है।

सरकार का कहना है कि इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य केवल प्रीमियम सब्सिडी देना नहीं, बल्कि देश में जलीय कृषि बीमा का एक आत्मनिर्भर और मजबूत बाजार विकसित करना है — जिसके लिए केंद्र, राज्य सरकारों, बीमा कंपनियों, किसानों और तकनीकी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पीएम-एमकेएसएसवाई की असली परीक्षा उसके प्रारंभिक आँकड़ों में है — 316 आवेदनों में से केवल 127 को मंजूरी और ₹40.03 लाख का वितरण एक विशाल क्षेत्र के लिए अभी बहुत सीमित पैमाने पर है। योजना की संरचना — डीबीटी, तय दावा-समय-सीमा, डिजिटल प्लेटफॉर्म — सही दिशा में है, परंतु जब तक निजी बीमा कंपनियाँ नहीं जुड़तीं और राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन नहीं सुधरता, तब तक छोटे और सीमांत मत्स्य किसान इसके दायरे से बाहर रह सकते हैं। कृषि बीमा के अनुभव से सीख लेते हुए सरकार को दावा अस्वीकृति दर और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी नज़र रखनी होगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-एमकेएसएसवाई क्या है और इसके तहत मत्स्य किसानों को क्या मिलता है?
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) 2024 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जो मत्स्य किसानों को रोग, बाढ़ और जलवायु जोखिमों से बचाने के लिए बीमा प्रीमियम पर 40% तक की वित्तीय सहायता देती है। लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाता है।
बीमा प्रीमियम सहायता कितनी मिलती है और कौन पात्र है?
तालाब-आधारित जलीय कृषि में ₹25,000 प्रति हेक्टेयर (अधिकतम चार हेक्टेयर के लिए ₹1 लाख) की सहायता उपलब्ध है। एससी, एसटी और महिला किसानों को अतिरिक्त 10% प्रोत्साहन मिलता है। एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले छोटे किसान भी अनुपातिक आधार पर पात्र हैं।
योजना के तहत दावा कैसे और कितने समय में निपटाया जाता है?
बीमित जोखिम की घटना पर किसान को तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होता है, दस्तावेज जमा करने के बाद विशेषज्ञ नुकसान का आकलन करता है। झींगा पालन से जुड़े दावे 30 दिनों में और अन्य जलीय कृषि दावे 45 दिनों के भीतर निपटाए जाने अनिवार्य हैं।
अब तक कितने किसानों को योजना का लाभ मिला है?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार अब तक 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं जो 730.61 हेक्टेयर को कवर करते हैं। इनमें से 127 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है और 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को कुल ₹40.03 लाख की सहायता राशि वितरित की गई है।
भारत का मछली उत्पादन कितना बढ़ा है और इसका ब्लू इकोनॉमी से क्या संबंध है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत का कुल मछली उत्पादन 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन हो गया है — एक दशक में लगभग दोगुना। मत्स्य क्षेत्र भारत की ब्लू इकोनॉमी का प्रमुख स्तंभ है और पीएम-एमकेएसएसवाई इस विकास को बीमा सुरक्षा देकर टिकाऊ बनाने की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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