पीएम-एमकेएसएसवाई से मत्स्य किसानों को बीमा सुरक्षा, मछली उत्पादन 2024-25 में 19.8 मिलियन टन पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा 28 सितंबर को जारी फैक्टशीट के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत बीमा पहल भारत के मत्स्य किसानों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है। देश का कुल मछली उत्पादन 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन तक पहुँच गया है — एक दशक में लगभग दोगुना। इस विस्तार को टिकाऊ बनाए रखने के लिए 2024 में शुरू की गई यह योजना रोग, बाढ़ और जलवायु जोखिमों से किसानों को वित्तीय राहत देने का काम कर रही है।
मत्स्य क्षेत्र की विकास यात्रा
आँकड़ों के अनुसार, अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन 6.1 मिलियन टन से बढ़कर 14.74 मिलियन टन हो गया है, जो इस क्षेत्र की असाधारण प्रगति को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ब्लू इकोनॉमी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि मत्स्य पालन लाखों तटीय और अंतर्देशीय समुदायों की आजीविका का मुख्य आधार है।
योजना की बीमा संरचना और लाभ
पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत पात्र मत्स्य किसानों को बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। तालाब-आधारित जलीय कृषि में यह सहायता ₹25,000 प्रति हेक्टेयर तक है, जबकि अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र के लिए ₹1 लाख तक का लाभ उपलब्ध है। एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसानों को भी अनुपातिक आधार पर सहायता दी जाती है।
आधुनिक तकनीकों — जैसे केज कल्चर, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लॉक, रेसवे — के लिए भी 40 प्रतिशत प्रीमियम सहायता उपलब्ध है। इस श्रेणी में अधिकतम सहायता ₹1 लाख है और पात्र इकाई का आकार 1,800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी की तुलना में अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन भी मिलता है।
कौन-सी बीमा कंपनियाँ शामिल हैं
फिलहाल चार सरकारी बीमा कंपनियाँ — ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ओआईसीएल), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एआईसीएल), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएएल) और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसी) — इस योजना में भागीदार हैं। ये कंपनियाँ झींगा, प्रॉन, ताजे पानी की मछलियों और ठंडे पानी की प्रजातियों के लिए बीमा कवरेज प्रदान कर रही हैं। सरकार निजी बीमा कंपनियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया में है।
योजना के लाभों का वितरण नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है।
अब तक के परिणाम
फैक्टशीट के अनुसार, योजना के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। अब तक 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं। इनमें से 127 आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है और 321.74 हेक्टेयर में मत्स्य पालन करने वाले किसानों को कुल ₹40.03 लाख की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।
दावा निपटान की प्रक्रिया और समय-सीमा
बीमित जोखिम की घटना होने पर किसान को तत्काल संबंधित बीमा कंपनी को सूचित करना होता है। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज जमा कर विशेषज्ञ द्वारा नुकसान का आकलन कराया जाता है और रिपोर्ट के आधार पर दावा निपटाया जाता है। झींगा पालन से जुड़े दावों का निपटारा 30 दिनों के भीतर और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए 45 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। पूरी प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनी अपने पोर्टल पर नियमित स्थिति अपडेट उपलब्ध कराती है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य केवल प्रीमियम सब्सिडी देना नहीं, बल्कि देश में जलीय कृषि बीमा का एक आत्मनिर्भर और मजबूत बाजार विकसित करना है — जिसके लिए केंद्र, राज्य सरकारों, बीमा कंपनियों, किसानों और तकनीकी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।