सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का अनुमान: पीएमएस इंडस्ट्री 20% सालाना की रफ्तार से बढ़ सकती है
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 30 सितंबर 2026 को कहा कि शेयर बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री के 20 प्रतिशत सालाना की दर से विस्तार की संभावना है। उन्होंने यह विचार एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) की तीसरी वार्षिक इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में नई दिल्ली में व्यक्त किए।
मुख्य बातें जो पांडे ने कही
पांडे ने स्पष्ट किया कि यह 20 प्रतिशत का आँकड़ा कोई औपचारिक वृद्धि पूर्वानुमान नहीं है, बल्कि यह निवेश क्षेत्र में वेल्थ क्रिएशन और निवेशकों की सहभागिता में हो रही बढ़ोतरी के आधार पर संभावनाओं का आकलन है। उन्होंने बताया कि भारत के निवेश क्षेत्र के कई हिस्से पहले से ही 15 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रहे हैं, जो पीएमएस के लिए और तेज़ गति की गुंजाइश बनाता है।
पीएमएस, म्यूचुअल फंड और एआईएफ — प्रतिस्पर्धा नहीं, पूरकता
सेबी चेयरमैन ने निवेश उत्पादों के बीच के संबंध को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, 'हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि हमारे पास दूसरे विकल्प भी हैं। हमारे पास म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री और एआईएफ हैं। ये ऐसे माध्यम हैं जो अलग-अलग तरह के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करते हैं। जरूरी नहीं कि वे एक-दूसरे के साथ मुकाबला ही करें।' गौरतलब है कि जैसे-जैसे निवेश माहौल में उत्पादों की विविधता बढ़ रही है, हर श्रेणी के लिए एक अलग निवेशक वर्ग उभर रहा है।
पीएमएस की विशिष्ट भूमिका
पांडे ने बताया कि पीएमएस विशेष रूप से उच्च नेट-वर्थ वाले निवेशकों की जरूरतों को पूरा करता है, जो व्यक्तिगत और पेशेवर तरीके से प्रबंधित पोर्टफोलियो चाहते हैं। यह म्यूचुअल फंड जैसे मास-मार्केट उत्पादों से मौलिक रूप से अलग है। दूसरी ओर, पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट उन निवेशकों को आकर्षित करते हैं जो लागत-दक्षता को प्राथमिकता देते हैं।
इंडस्ट्री के सामने चुनौती और अवसर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डीमैट खातों की संख्या और खुदरा निवेशकों की भागीदारी दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। पांडे ने चेतावनी दी कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ पीएमएस इंडस्ट्री को अपनी विशिष्ट उपयोगिता स्पष्ट करनी होगी और निवेशकों का दीर्घकालिक विश्वास अर्जित करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडस्ट्री को तेजी से बदलते और विविध निवेश माहौल में अपनी प्रासंगिकता साबित करनी होगी।
आगे की दिशा
सेबी की ओर से इस क्षेत्र में निवेशक संरक्षण और पारदर्शिता पर जोर जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीएमएस इंडस्ट्री अपने प्रदर्शन की जवाबदेही और उत्पाद स्पष्टता में सुधार करे, तो 20 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करना कठिन नहीं होगा।