पीएमएस इंडस्ट्री का AUM ₹42 लाख करोड़ पार, सेबी ने पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा को बताया अगले विकास की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने 11 जून 2026 को स्पष्ट किया कि देश की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री के अगले विकास चरण में पारदर्शिता, निवेशक सुरक्षा और सुदृढ़ शासन-व्यवस्था निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह विचार एपीएमआई लीडरशीप कॉन्क्लेव 2026 में व्यक्त किए, जहाँ उन्होंने बताया कि पीएमएस इंडस्ट्री की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब करीब ₹42 लाख करोड़ तक पहुँच चुकी है और इसमें 2.1 लाख से अधिक निवेशक सक्रिय हैं।
उद्योग की वर्तमान स्थिति
मनोज कुमार ने कहा, 'भारत में पीएमएस इंडस्ट्री एक अहम मोड़ पर है। जैसे-जैसे निवेशकों की उम्मीदें बदल रही हैं और पर्सनलाइज्ड वेल्थ मैनेजमेंट सॉल्यूशन की माँग बढ़ रही है, इस इंडस्ट्री के पास भारत के इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के एक अहम स्तंभ के तौर पर उभरने का मौका है।' यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा निवेशकों की वित्तीय बाजारों में भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है और वैयक्तिकृत निवेश समाधानों की माँग पहले से कहीं अधिक है।
टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी शर्तें
सेबी के कार्यकारी निदेशक ने रेखांकित किया कि इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए पूरी इंडस्ट्री में स्टैंडर्डाइजेशन, बेहतर डेटा पारदर्शिता और एक मज़बूत वितरण प्रणाली अनिवार्य होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पीएमएस इंडस्ट्री के निर्माण के लिए टियर-2 और टियर-3 बाज़ारों में गहरी पैठ, निवेशक जागरूकता में वृद्धि, जिम्मेदार वितरण प्रथाएँ और सभी पक्षकारों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक होगा।
एपीएमआई की भूमिका और प्रतिबद्धता
'एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया' (एपीएमआई) के चेयरमैन बिहारीलाल देवरा ने कहा कि पीएमएस इंडस्ट्री भारत के वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन चुकी है। उन्होंने इसके पीछे निवेशकों में बढ़ती जागरूकता, कस्टमाइज्ड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन की बढ़ती माँग और एक समर्थ नियामक ढाँचे को प्रमुख कारण बताया।
देवरा ने कहा, 'एपीएमआई में, हम निवेशकों की सुरक्षा, इंडस्ट्री के विकास और बाज़ार की ईमानदारी जैसे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री के लोगों और सेबी के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' उन्होंने आगे बताया कि 2022 में कार्य आरंभ करने के बाद से एसोसिएशन ने निवेशक सुरक्षा, नियम-पालन, पारदर्शिता, डिजिटल परिवर्तन, व्यावसायिक क्षमता संवर्धन और व्यापार सुगमता पर ध्यान केंद्रित करते हुए करीब 50 रणनीतिक पहल की हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि पीएमएस इंडस्ट्री का यह विस्तार भारत के व्यापक वित्तीय समावेशन के एजेंडे से जुड़ा है, जिसमें नियामक और उद्योग दोनों मिलकर खुदरा निवेशकों को संस्थागत-स्तरीय सेवाएँ सुलभ कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। सेबी और एपीएमआई के बीच यह संवाद आने वाले समय में नीतिगत सुधारों की नींव रख सकता है।