27 जुलाई 2026
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पीएमएस इंडस्ट्री का AUM ₹42 लाख करोड़ पार, सेबी ने पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा को बताया अगले विकास की कुंजी

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पीएमएस इंडस्ट्री का AUM ₹42 लाख करोड़ पार, सेबी ने पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा को बताया अगले विकास की कुंजी

सारांश

भारत की पीएमएस इंडस्ट्री ₹42 लाख करोड़ AUM के साथ एक निर्णायक मोड़ पर है। सेबी ने साफ कहा — अगला विकास चरण तभी टिकाऊ होगा जब पारदर्शिता, स्टैंडर्डाइजेशन और टियर-2/3 बाज़ारों में पैठ सुनिश्चित हो। नियामक और उद्योग का यह साझा संकल्प भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

भारत की पीएमएस इंडस्ट्री की AUM करीब ₹42 लाख करोड़ तक पहुँची; 2.1 लाख से अधिक निवेशक सक्रिय।
सेबी के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने 11 जून 2026 को एपीएमआई कॉन्क्लेव में पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा को विकास की अनिवार्य शर्त बताया।
टिकाऊ विकास के लिए स्टैंडर्डाइजेशन , बेहतर डेटा पारदर्शिता और टियर-2/3 बाज़ारों में विस्तार ज़रूरी।
एपीएमआई ने 2022 से अब तक करीब 50 रणनीतिक पहल की हैं — निवेशक सुरक्षा, अनुपालन और डिजिटल परिवर्तन पर केंद्रित।
एपीएमआई चेयरमैन बिहारीलाल देवरा ने सेबी और उद्योग के बीच रचनात्मक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने 11 जून 2026 को स्पष्ट किया कि देश की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री के अगले विकास चरण में पारदर्शिता, निवेशक सुरक्षा और सुदृढ़ शासन-व्यवस्था निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह विचार एपीएमआई लीडरशीप कॉन्क्लेव 2026 में व्यक्त किए, जहाँ उन्होंने बताया कि पीएमएस इंडस्ट्री की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब करीब ₹42 लाख करोड़ तक पहुँच चुकी है और इसमें 2.1 लाख से अधिक निवेशक सक्रिय हैं।

उद्योग की वर्तमान स्थिति

मनोज कुमार ने कहा, 'भारत में पीएमएस इंडस्ट्री एक अहम मोड़ पर है। जैसे-जैसे निवेशकों की उम्मीदें बदल रही हैं और पर्सनलाइज्ड वेल्थ मैनेजमेंट सॉल्यूशन की माँग बढ़ रही है, इस इंडस्ट्री के पास भारत के इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के एक अहम स्तंभ के तौर पर उभरने का मौका है।' यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा निवेशकों की वित्तीय बाजारों में भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है और वैयक्तिकृत निवेश समाधानों की माँग पहले से कहीं अधिक है।

टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी शर्तें

सेबी के कार्यकारी निदेशक ने रेखांकित किया कि इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए पूरी इंडस्ट्री में स्टैंडर्डाइजेशन, बेहतर डेटा पारदर्शिता और एक मज़बूत वितरण प्रणाली अनिवार्य होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पीएमएस इंडस्ट्री के निर्माण के लिए टियर-2 और टियर-3 बाज़ारों में गहरी पैठ, निवेशक जागरूकता में वृद्धि, जिम्मेदार वितरण प्रथाएँ और सभी पक्षकारों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक होगा।

एपीएमआई की भूमिका और प्रतिबद्धता

'एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया' (एपीएमआई) के चेयरमैन बिहारीलाल देवरा ने कहा कि पीएमएस इंडस्ट्री भारत के वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन चुकी है। उन्होंने इसके पीछे निवेशकों में बढ़ती जागरूकता, कस्टमाइज्ड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन की बढ़ती माँग और एक समर्थ नियामक ढाँचे को प्रमुख कारण बताया।

देवरा ने कहा, 'एपीएमआई में, हम निवेशकों की सुरक्षा, इंडस्ट्री के विकास और बाज़ार की ईमानदारी जैसे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री के लोगों और सेबी के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' उन्होंने आगे बताया कि 2022 में कार्य आरंभ करने के बाद से एसोसिएशन ने निवेशक सुरक्षा, नियम-पालन, पारदर्शिता, डिजिटल परिवर्तन, व्यावसायिक क्षमता संवर्धन और व्यापार सुगमता पर ध्यान केंद्रित करते हुए करीब 50 रणनीतिक पहल की हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि पीएमएस इंडस्ट्री का यह विस्तार भारत के व्यापक वित्तीय समावेशन के एजेंडे से जुड़ा है, जिसमें नियामक और उद्योग दोनों मिलकर खुदरा निवेशकों को संस्थागत-स्तरीय सेवाएँ सुलभ कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। सेबी और एपीएमआई के बीच यह संवाद आने वाले समय में नीतिगत सुधारों की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह विकास समावेशी और टिकाऊ है। पीएमएस अब भी मुख्यतः उच्च-निवल-संपत्ति वाले शहरी निवेशकों तक सीमित है, और टियर-2/3 विस्तार की बात वर्षों से होती आई है। सेबी का यह संदेश — कि स्टैंडर्डाइजेशन और जवाबदेही के बिना विकास टिकाऊ नहीं होगा — सही दिशा में है, पर क्रियान्वयन की रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक डेटा पारदर्शिता और वितरण सुधार ठोस नीतिगत कदमों में नहीं बदलते, यह संकल्प भी कॉन्क्लेव की चार दीवारों तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पीएमएस इंडस्ट्री की AUM अभी कितनी है?
भारत की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹42 लाख करोड़ तक पहुँच गई है और इसमें 2.1 लाख से अधिक निवेशक सक्रिय हैं। यह आँकड़ा सेबी के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने 11 जून 2026 को एपीएमआई कॉन्क्लेव में साझा किया।
सेबी ने पीएमएस इंडस्ट्री के विकास के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
सेबी ने स्पष्ट किया है कि पीएमएस इंडस्ट्री की टिकाऊ वृद्धि के लिए स्टैंडर्डाइजेशन, बेहतर डेटा पारदर्शिता और एक मज़बूत वितरण प्रणाली अनिवार्य है। इसके साथ ही टियर-2 और टियर-3 बाज़ारों में विस्तार और निवेशक जागरूकता को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
एपीएमआई क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
'एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया' (एपीएमआई) सेबी-पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों का प्रतिनिधि संगठन है। 2022 में स्थापना के बाद से इसने निवेशक सुरक्षा, अनुपालन, पारदर्शिता और डिजिटल परिवर्तन पर केंद्रित करीब 50 रणनीतिक पहल की हैं।
पीएमएस इंडस्ट्री में टियर-2 और टियर-3 बाज़ारों का विस्तार क्यों ज़रूरी है?
फिलहाल पीएमएस सेवाएँ मुख्यतः बड़े शहरों के उच्च-निवल-संपत्ति वाले निवेशकों तक सीमित हैं। सेबी के अनुसार, एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद पीएमएस इंडस्ट्री के लिए छोटे शहरों तक पहुँच, जिम्मेदार वितरण प्रथाएँ और सभी पक्षकारों का सहयोग आवश्यक है।
एपीएमआई लीडरशीप कॉन्क्लेव 2026 में मुख्य संदेश क्या था?
कॉन्क्लेव का मुख्य संदेश था कि पीएमएस इंडस्ट्री एक निर्णायक मोड़ पर है और पारदर्शिता, निवेशक सुरक्षा तथा मज़बूत शासन-व्यवस्था के बिना इसका अगला विकास चरण टिकाऊ नहीं होगा। सेबी और एपीएमआई दोनों ने उद्योग व नियामक के बीच रचनात्मक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्र प्रेस
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