सेंसेक्स 104 अंक टूटा, 78,180 पर बंद; चार सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 7 जुलाई को लगातार चार सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव हावी रहा। बीएसई सेंसेक्स 104.35 अंक यानी 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,180.72 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,398.70 पर टिका रहा। एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की चाल को प्रभावित किया।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली
लार्जकैप के साथ-साथ निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 186.20 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,285.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.70 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,213.40 पर रहा। यह दर्शाता है कि बिकवाली का दबाव बाजार के सभी वर्गों में समान रूप से फैला रहा।
गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाइटन, इटरनल, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी और एसबीआई बढ़त में रहे। दूसरी ओर, ट्रेंट, बीईएल, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, टाटा स्टील, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल गिरावट में बंद हुए।
सेक्टोरल प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी मिड स्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम हरे निशान में बंद हुए। वहीं निफ्टी ऑटो, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सत्र के दूसरे हिस्से में मुनाफावसूली का मुख्य कारण एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेड के मिनट्स से पहले निवेशकों की सतर्कता रही। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आईटी शेयरों ने जून तिमाही के नतीजों के सीजन से पहले अपनी बढ़त बनाए रखी और बाजार को सहारा दिया।
आगे की दिशा
अमेरिका-ईरान विवाद और ट्रेड टैरिफ को लेकर चिंताएँ कम होने के साथ, बाजार का ध्यान अब वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों और मानसून की प्रगति पर केंद्रित हो गया है। विदेशी निवेश में सुधार और रुपए में स्थिरता से निकट भविष्य में बाजार के सेंटीमेंट को बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।