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आयकर विभाग सिर्फ कर वसूली नहीं, आम लोगों को समय पर सेवा दे: निर्मला सीतारमण

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आयकर विभाग सिर्फ कर वसूली नहीं, आम लोगों को समय पर सेवा दे: निर्मला सीतारमण

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई के नरीमन पॉइंट पर 'आयकर सिंधु' का उद्घाटन करते हुए दो-टूक कहा — आयकर विभाग सिर्फ कर वसूली की मशीन नहीं है, बल्कि नागरिकों को उनका हक बिना दौड़-धूप के देना उसकी असली जिम्मेदारी है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट पर 'आयकर सिंधु' (13 मंजिला) का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि आयकर विभाग की जिम्मेदारी नागरिकों को बिना परेशानी, समय पर सेवाएँ देना है — न कि केवल कर वसूलना।
जिस ज़मीन पर इमारत बनी, वह 1973 से विभाग के पास थी, लेकिन उपयोग न होने से वहाँ अवैध कब्जे हो गए थे।
मुंबई और नवी मुंबई में लगभग आधे आयकर अधिकारियों को सरकारी आवास नहीं मिल पाता।
सीतारमण ने आवासीय ज़मीन के त्वरित सरकारी हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट पर स्पष्ट किया कि आयकर विभाग की जिम्मेदारी केवल कर वसूलना नहीं, बल्कि नागरिकों को बिना किसी परेशानी के समय पर सेवाएँ उपलब्ध कराना भी है। वे आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत 'आयकर सिंधु' के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं।

उद्घाटन समारोह में क्या बोलीं सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि अधिकारियों से उनकी अपेक्षा नियम तोड़ने की नहीं, बल्कि नागरिकों को उनका जायज हक बिना अनावश्यक देरी के दिलाने की है। उन्होंने अफसोस जताया कि इस देश में लोगों को अपना वैध अधिकार पाने के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ता है। उनके शब्दों में, 'आम आदमी को इधर-उधर दौड़ाना बंद होना चाहिए।'

सरकारी विभागों के 'सुस्त' रवैये पर नाराज़गी

सीतारमण ने सरकारी विभागों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने बताया कि जिस ज़मीन पर 'आयकर सिंधु' खड़ी है, वह 1973 से आयकर विभाग के पास थी, लेकिन उपयोग न होने के कारण वहाँ अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं।

मंजूरी प्रक्रिया की जटिलता पर चिंता

वित्त मंत्री ने इमारत के निर्माण के दौरान आई मंजूरी संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब एक शक्तिशाली सरकारी विभाग को अनुमतियाँ लेने में इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो एक सामान्य नागरिक की परेशानियों का अनुमान लगाना कठिन नहीं। यह टिप्पणी नौकरशाही की जटिलता पर एक स्पष्ट संकेत थी।

आवासीय सुविधाओं पर भी फोकस

सीतारमण ने मुंबई और नवी मुंबई में आयकर अधिकारियों के सरकारी आवास न मिलने के मुद्दे पर भी ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि लगभग आधे अधिकारियों को यह सुविधा नहीं मिल पाती और उन्हें कार्यालय तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे आवासीय उद्देश्य के लिए सरकारी ज़मीन के त्वरित हस्तांतरण को प्राथमिकता देंगी।

आगे की राह

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि ज़मीन हस्तांतरण में वे स्वयं सहयोग करेंगी, जबकि मंजूरी प्रक्रिया, निर्माण कार्य, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के साथ समन्वय और टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी आयकर अधिकारियों की होगी। यह बयान विभागीय जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक स्पष्ट संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा या एक उद्घाटन-भाषण तक सीमित रहेगा। आयकर विभाग में नागरिक-सेवा की शिकायतें वर्षों पुरानी हैं और 'फेसलेस असेसमेंट' जैसे सुधारों के बाद भी प्रक्रियागत देरी की समस्या बनी हुई है। सरकारी ज़मीन पर 1973 से कब्जा और अधिकारियों को आवास न मिलना — ये दोनों तथ्य बताते हैं कि विभागीय प्रबंधन में संरचनात्मक खामियाँ हैं जिन्हें भाषण नहीं, निगरानी तंत्र दूर करेगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को लेकर क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आयकर विभाग की जिम्मेदारी केवल कर वसूलना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को बिना परेशानी के समय पर सेवाएँ देना भी है। उन्होंने अधिकारियों से अनावश्यक देरी से बचने और नागरिकों की समस्याएँ समझने का आग्रह किया।
'आयकर सिंधु' इमारत क्या है और यह कहाँ है?
'आयकर सिंधु' मुंबई के नरीमन पॉइंट पर स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत है, जिसका उद्घाटन 26 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया। यह ज़मीन 1973 से विभाग के पास थी, लेकिन उपयोग न होने के कारण वहाँ अवैध कब्जे हो गए थे।
सीतारमण ने सरकारी अधिकारियों की किस लापरवाही पर नाराज़गी जताई?
उन्होंने सरकारी विभागों के 'सुस्त' रवैये पर नाराज़गी जताई, जिसके कारण सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जे होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुंबई में आयकर अधिकारियों के आवास की क्या स्थिति है?
वित्त मंत्री के अनुसार मुंबई और नवी मुंबई में लगभग आधे आयकर अधिकारियों को सरकारी आवास नहीं मिल पाता और उन्हें कार्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सीतारमण ने आवासीय उद्देश्य के लिए सरकारी ज़मीन के त्वरित हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
क्या सीतारमण ने अधिकारियों से नियम तोड़ने को कहा?
नहीं। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि वे अधिकारियों से नियम तोड़ने या कोई विशेष छूट देने को नहीं कह रहीं। उनका आग्रह यह था कि नागरिकों को उनका वैध हक बिना अनावश्यक देरी और परेशानी के मिलना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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