जुलाई में कोयले की हिस्सेदारी 65.7% पर एक साल के निचले स्तर पर, रिन्यूएबल एनर्जी ने तोड़े रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पावर मिक्स में जुलाई 2026 के दौरान कोयले की हिस्सेदारी गिरकर 65.7 प्रतिशत पर आ गई — जो पिछले एक साल का सबसे निचला स्तर है — जबकि रिन्यूएबल एनर्जी का मासिक उत्पादन रिकॉर्ड 36.25 अरब किलोवाट-घंटे पर पहुँच गया। ग्रिड-इंडिया के प्रतिदिन के आँकड़ों के अनुसार, जून में कोयले की हिस्सेदारी 69 प्रतिशत थी, जो एक महीने में 3.3 प्रतिशत अंक घट गई। यह बदलाव देश की तेज़ी से बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का स्पष्ट संकेत है।
रिन्यूएबल एनर्जी के रिकॉर्ड आँकड़े
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, जुलाई में रिन्यूएबल बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ा और 36.25 अरब किलोवाट-घंटे के अब तक के सर्वाधिक मासिक स्तर पर पहुँचा। इस दौरान कुल बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत रही।
एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 13 जुलाई को सोलर और विंड एनर्जी से संयुक्त बिजली उत्पादन पहली बार 100 गीगावाट के आँकड़े को पार कर गया। उस दिन भारत की कुल बिजली ज़रूरत का 42.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले इन दो स्रोतों से पूरा हुआ — जो अब तक का सर्वोच्च एकदिवसीय अनुपात है।
कोयला उत्पादन बढ़ा, लेकिन हिस्सेदारी घटी
गौरतलब है कि पावर मिक्स में कोयले की हिस्सेदारी घटने के बावजूद, जुलाई में कोयला-आधारित संयंत्रों से कुल बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 12.8 प्रतिशत बढ़कर 119.40 अरब किलोवाट-घंटे हो गया। इसकी मुख्य वजह बिजली की मज़बूत माँग और जलविद्युत उत्पादन में आई कमी रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से तापमान सामान्य से अधिक रहा, जिससे रात के समय — जब सोलर पावर उपलब्ध नहीं होती — कूलिंग के लिए बिजली की माँग बढ़ी और कोयला संयंत्रों पर निर्भरता बनी रही।
हाइड्रोपावर में लगातार दूसरे महीने गिरावट
अल नीनो के कारण कम वर्षा से जल उपलब्धता प्रभावित हुई और हाइड्रोपावर का हिस्सा घटकर 22.1 प्रतिशत रह गया — यह लगातार दूसरा महीना है जब जलविद्युत उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा, 'बिजली की सबसे अधिक माँग दिन के समय होती है, जब सोलर पावर का योगदान अधिक होता है।' CREA का यह भी अनुमान है कि हाइड्रोपावर उत्पादन में कमी और बढ़ती माँग के चलते लगभग 18 अरब किलोवाट-घंटे का बिजली उत्पादन अंतर पैदा हो सकता है, जिससे आने वाले महीनों में कोयला संयंत्रों पर निर्भरता फिर बढ़ने की आशंका है।
आगे की राह
सोलर और विंड पावर के तेज़ विस्तार ने दिन के समय की बिजली माँग को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन रात की माँग और हाइड्रोपावर की अनिश्चितता यह दर्शाती है कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन अभी एकरेखीय नहीं है। ऊर्जा भंडारण और ग्रिड लचीलेपन में निवेश आने वाले महीनों में निर्णायक भूमिका निभाएगा।