सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक 2% से अधिक गिरावट, कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स और निफ्टी 50 के लिए 24 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुआ कारोबारी सप्ताह भारी दबाव में रहा — सेंसेक्स में 2.2 प्रतिशत और निफ्टी 50 में 2.4 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर किया, जिससे लगातार चार कारोबारी सत्रों में बिकवाली का सिलसिला जारी रहा।
साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े
अवकाश के कारण छोटा रहा यह कारोबारी सप्ताह निवेशकों के लिए कोई राहत नहीं ला सका। शुक्रवार के अंतिम सत्र में सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 22,600.00 पर बंद हुआ।
पूरे सप्ताह में निफ्टी की यह चौथी लगातार गिरावट रही, जिसने बाज़ार की अल्पकालिक तकनीकी संरचना को कमज़ोर कर दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, सूचकांक अपनी हालिया रिकवरी को बरकरार रखने में संघर्ष कर रहा है।
कच्चे तेल का बड़ा झटका
वैश्विक कमोडिटी बाज़ार में ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को छह महीने के उच्चतम स्तर पर जा पहुँचा। यह 3.1 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 29 अप्रैल के बाद का सर्वोच्च स्तर है। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.8 प्रतिशत बढ़कर 103.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
पूरे सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में 6.2 प्रतिशत और WTI में 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की यह बढ़त घरेलू बाज़ारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है, क्योंकि इससे परिवहन एवं ऊर्जा लागत बढ़ती है और उपभोक्ता माँग पर सीधा असर पड़ता है।
सेक्टोरल प्रदर्शन: आईटी मज़बूत, रियल्टी-मेटल धराशायी
सेक्टोरल स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र एकमात्र ऐसा रहा जिसने अपेक्षाकृत मज़बूती दिखाई। सप्ताह की शुरुआत में बिकवाली के दबाव में रहने के बावजूद बेहतर तिमाही नतीजों और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण IT शेयरों ने सप्ताह लगभग स्थिर स्तर पर समाप्त किया।
इसके विपरीत, ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों पर सबसे अधिक दबाव रहा। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और रियल्टी सेक्टर में भारी बिकवाली हुई, क्योंकि बढ़ती लागत और मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंताएँ फिर से उभरी हैं।
व्यापक बाज़ार पर असर: मिडकैप-स्मॉलकैप में तीखा करेक्शन
लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट का असर कहीं अधिक गहरा रहा। ऊँचे वैल्यूएशन और लीवरेज्ड पोजिशन में कमी के कारण इन श्रेणियों में तेज़ करेक्शन देखा गया, जबकि लार्जकैप अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाज़ारों से लगातार पूँजी निकाल रहे हैं, जो घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी के बावजूद बाज़ार पर दबाव बनाए हुए है।
तकनीकी स्तर और आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, जबकि 23,000 का स्तर निर्णायक बाधा माना जा रहा है। सेंसेक्स के लिए 72,600 से 72,500 का दायरा निकटतम समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो उपभोक्ता माँग और तेल-निर्भर उद्योगों के मार्जिन पर दोहरा दबाव पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में निवेशकों की नज़र सबसे अधिक कच्चे तेल की चाल और उससे जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी।