सेंसेक्स 71,909 पर बंद, लगातार आठवां गिरावट वाला सप्ताह; निफ्टी के लिए 22,800 का अपसाइड टारगेट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार ने 4 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट दर्ज की — विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली, कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, प्रमुख सपोर्ट स्तरों के करीब पहुँचने और ओवरसोल्ड संकेतकों के कारण निकट अवधि में राहतभरी तेजी (रिलीफ रैली) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
साप्ताहिक गिरावट का ब्यौरा
बीते पूरे सप्ताह में सेंसेक्स कुल 1,670.84 अंक टूटा, जबकि निफ्टी में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। सोमवार को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत लुढ़का और बिकवाली का दबाव पूरे सप्ताह बना रहा। गुरुवार को सूचकांक में 0.79 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज हुई, जो लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मंदी थी।
सत्र के अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 71,292.88 के स्तर तक फिसला, जो इसका नया 52-सप्ताह का निचला स्तर रहा। वहीं निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।
तकनीकी संकेत और सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल सेंसेक्स अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। यह 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 75,544.56 और 200-दिवसीय EMA 77,684.60 — दोनों से नीचे है, जो बाजार में अंतर्निहित कमजोरी का संकेत है।
हालांकि तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि 71,000 से 71,200 के बीच का क्षेत्र सेंसेक्स के लिए एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि यह स्तर टिका रहता है, तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, 72,300 से 72,500 का दायरा निकट अवधि का प्रमुख रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है।
निफ्टी के लिए अपसाइड टारगेट
विशेषज्ञों ने निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और हेज्ड रणनीति अपनाने की सलाह दी है। उनके अनुसार, निफ्टी के लिए 22,800 पहला अपसाइड लक्ष्य हो सकता है, और इसके बाद 23,100 से 23,200 का स्तर अगला संभावित लक्ष्य रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब व्यापक बाजार संरचना अभी भी कमजोर बनी हुई है, लेकिन ओवरसोल्ड संकेतकों और प्रमुख सपोर्ट स्तरों के करीब पहुँचने के कारण निकट अवधि में उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डाउनसाइड जोखिम
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि निफ्टी अप्रैल के निचले स्तरों से भी नीचे चला जाता है, तो रिकवरी की संभावना कमजोर पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 21,700 से 22,000 के दायरे तक फिसल सकता है — जो निवेशकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
आगे क्या देखें
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड्स और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यदि FII की बिकवाली में कमी आती है और तेल कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में राहत की संभावना बढ़ सकती है। वहीं, वैश्विक अनिश्चितताएँ बनी रहने पर अस्थिरता जारी रह सकती है।