6 अगस्त 2026
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सेंसेक्स की CAS के तहत पहली वीकली एक्सपायरी आज, कम लिक्विडिटी से बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका

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सेंसेक्स की CAS के तहत पहली वीकली एक्सपायरी आज, कम लिक्विडिटी से बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका

सारांश

सेंसेक्स की पहली CAS-आधारित वीकली एक्सपायरी गुरुवार को है — और BSE के कैश मार्केट में कम भागीदारी इसे NSE की तुलना में अधिक जोखिम भरा बना रही है। मंगलवार को निफ्टी एक्सपायरी पर 150 अंक की अचानक तेज़ी ने पहले ही ट्रेडर्स को सतर्क कर दिया है।

मुख्य बातें

सेंसेक्स की क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) के तहत पहली वीकली एक्सपायरी गुरुवार, 7 अगस्त को होगी।
मंगलवार को निफ्टी एक्सपायरी के दौरान ऑक्शन विंडो में 150 अंक से अधिक की तेज़ी ने डेरिवेटिव्स बाज़ार में बड़ी हलचल मचाई थी।
BSE के कैश मार्केट में NSE की तुलना में ऑक्शन भागीदारी कम होने से फाइनल सेटलमेंट प्राइस पर बड़े ट्रेड का असर अधिक पड़ सकता है।
एक्सपायरी से पहले सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि CAS से जुड़ी अस्थिरता अस्थायी होगी और बाज़ार भागीदारी बढ़ने के साथ स्थिति सामान्य होगी।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की गुरुवार, 7 अगस्त को वीकली एक्सपायरी है — और यह पहला मौका है जब यह एक्सपायरी नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) के तहत होगी। BSE के कैश मार्केट में तुलनात्मक रूप से कम तरलता को देखते हुए, बाज़ार विशेषज्ञों ने सत्र के अंत में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना जताई है।

मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी से मिला सबक

इससे पहले मंगलवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दौरान क्लोजिंग ऑक्शन विंडो में बेंचमार्क इंडेक्स में 150 अंक से अधिक की तेज़ी दर्ज की गई थी। इस अप्रत्याशित उछाल ने डेरिवेटिव्स बाज़ार में जबरदस्त हलचल मचाई और कई ट्रेडर्स को हैरत में डाल दिया। उस अनुभव के बाद से बाज़ार भागीदार सावधानी के साथ पोजीशन बना रहे हैं।

सेंसेक्स को लेकर चिंताएं अधिक क्यों

कई विश्लेषकों के अनुसार, सेंसेक्स से जुड़े कैश मार्केट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुकाबले ऑक्शन विंडो के दौरान भागीदारी काफी कम रहती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कुछ बड़े ट्रेड भी फाइनल सेटलमेंट प्राइस को असंगत रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हाल के सत्रों में NSE पर ऑक्शन वॉल्यूम में सुधार हुआ है और निफ्टी स्पॉट तथा फ्यूचर्स की कीमतों के बीच का अंतर घटा है। लेकिन सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी अभी भी तुलनात्मक रूप से कम बनी हुई है।

इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में तेज़ उछाल

अनिश्चितता के माहौल में गुरुवार की एक्सपायरी से पहले सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (IV) में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि ट्रेडर्स सत्र के अंतिम चरण में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना को गंभीरता से ले रहे हैं और उसी के अनुसार अपनी हेजिंग कर रहे हैं।

CAS कैसे काम करता है

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के तहत स्टॉक एक्सचेंज एक निर्धारित ऑक्शन विंडो के दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र करते हैं और एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस तय करते हैं जिस पर अधिकतम ऑर्डर मैच हो सकें। इस प्रणाली का उद्देश्य बाज़ार बंद होने के समय कीमत-निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि कम लिक्विडिटी की स्थिति में इंडेक्स के हेवीवेट शेयरों में मामूली खरीद-बिक्री भी सेंसेक्स के क्लोजिंग स्तर और तदनुसार ऑप्शन सेटलमेंट को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों की राय: अस्थिरता अस्थायी होगी

दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि इन चिंताओं को ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार, मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी के दौरान देखी गई अस्थिरता के बाद ट्रेडर्स आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय अपना एक्सपोजर घटाने को प्राथमिकता देंगे।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि CAS से जुड़ी कोई भी अस्थिरता अस्थायी प्रकृति की होगी। जैसे-जैसे बाज़ार में भागीदारी बढ़ेगी और ट्रेडर्स नई प्रणाली के अभ्यस्त होंगे, कीमत-निर्धारण की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से बेहतर होती जाएगी। सीएएस की दीर्घकालिक सफलता व्यापक बाज़ार भागीदारी पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी NSE की तुलना में कम भागीदारी, इस प्रणाली की असली परीक्षा है। मंगलवार को निफ्टी एक्सपायरी पर 150 अंक की अचानक तेज़ी एक चेतावनी थी कि कम लिक्विडिटी में ऑक्शन विंडो को प्रभावित करना कितना आसान हो सकता है। नियामकों और एक्सचेंज के लिए असली चुनौती यह है कि वे सेंसेक्स के कैश सेगमेंट में भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएं — अन्यथा CAS एक अच्छे इरादे वाला सुधार बनकर रह जाएगा जिसका लाभ केवल बड़े खिलाड़ी उठाएंगे।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) क्या है और यह कैसे काम करता है?
CAS एक ऐसी प्रणाली है जिसमें स्टॉक एक्सचेंज बाज़ार बंद होने से पहले एक निर्धारित विंडो में खरीद-बिक्री के ऑर्डर एकत्र करता है और एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस तय करता है जिस पर अधिकतम ऑर्डर मैच हो सकें। इसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक सटीक और हेरफेर-रोधी बनाना है।
सेंसेक्स की CAS एक्सपायरी में ज़्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका क्यों है?
BSE के कैश मार्केट में NSE की तुलना में ऑक्शन विंडो के दौरान भागीदारी काफी कम रहती है। कम लिक्विडिटी में हेवीवेट शेयरों में बड़े ट्रेड फाइनल सेटलमेंट प्राइस को असंगत रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ऑप्शन सेटलमेंट पर सीधा असर पड़ता है।
मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी में क्या हुआ था?
मंगलवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दौरान क्लोजिंग ऑक्शन विंडो में बेंचमार्क इंडेक्स में 150 अंक से अधिक की अचानक तेज़ी आई थी। इससे डेरिवेटिव्स बाज़ार में जबरदस्त हलचल मची और कई ट्रेडर्स हैरान रह गए।
सेंसेक्स एक्सपायरी पर ट्रेडर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेडर्स को सत्र के अंतिम चरण में आक्रामक पोजीशन लेने से बचना चाहिए और एक्सपोजर सीमित रखना चाहिए। सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में तेज़ बढ़ोतरी संकेत देती है कि बाज़ार बड़े मूल्य-बदलाव की संभावना को पहले ही दर्शा रहा है।
क्या CAS से जुड़ी अस्थिरता दीर्घकालिक होगी?
अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि CAS से उत्पन्न अस्थिरता अस्थायी होगी। जैसे-जैसे बाज़ार में भागीदारी बढ़ेगी और ट्रेडर्स नई प्रणाली के अभ्यस्त होंगे, कीमत-निर्धारण प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से बेहतर होगी।
राष्ट्र प्रेस
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