सेंसेक्स की CAS के तहत पहली वीकली एक्सपायरी आज, कम लिक्विडिटी से बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की गुरुवार, 7 अगस्त को वीकली एक्सपायरी है — और यह पहला मौका है जब यह एक्सपायरी नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) के तहत होगी। BSE के कैश मार्केट में तुलनात्मक रूप से कम तरलता को देखते हुए, बाज़ार विशेषज्ञों ने सत्र के अंत में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना जताई है।
मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी से मिला सबक
इससे पहले मंगलवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दौरान क्लोजिंग ऑक्शन विंडो में बेंचमार्क इंडेक्स में 150 अंक से अधिक की तेज़ी दर्ज की गई थी। इस अप्रत्याशित उछाल ने डेरिवेटिव्स बाज़ार में जबरदस्त हलचल मचाई और कई ट्रेडर्स को हैरत में डाल दिया। उस अनुभव के बाद से बाज़ार भागीदार सावधानी के साथ पोजीशन बना रहे हैं।
सेंसेक्स को लेकर चिंताएं अधिक क्यों
कई विश्लेषकों के अनुसार, सेंसेक्स से जुड़े कैश मार्केट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुकाबले ऑक्शन विंडो के दौरान भागीदारी काफी कम रहती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कुछ बड़े ट्रेड भी फाइनल सेटलमेंट प्राइस को असंगत रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हाल के सत्रों में NSE पर ऑक्शन वॉल्यूम में सुधार हुआ है और निफ्टी स्पॉट तथा फ्यूचर्स की कीमतों के बीच का अंतर घटा है। लेकिन सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी अभी भी तुलनात्मक रूप से कम बनी हुई है।
इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में तेज़ उछाल
अनिश्चितता के माहौल में गुरुवार की एक्सपायरी से पहले सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (IV) में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि ट्रेडर्स सत्र के अंतिम चरण में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना को गंभीरता से ले रहे हैं और उसी के अनुसार अपनी हेजिंग कर रहे हैं।
CAS कैसे काम करता है
क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के तहत स्टॉक एक्सचेंज एक निर्धारित ऑक्शन विंडो के दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र करते हैं और एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस तय करते हैं जिस पर अधिकतम ऑर्डर मैच हो सकें। इस प्रणाली का उद्देश्य बाज़ार बंद होने के समय कीमत-निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि कम लिक्विडिटी की स्थिति में इंडेक्स के हेवीवेट शेयरों में मामूली खरीद-बिक्री भी सेंसेक्स के क्लोजिंग स्तर और तदनुसार ऑप्शन सेटलमेंट को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय: अस्थिरता अस्थायी होगी
दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि इन चिंताओं को ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार, मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी के दौरान देखी गई अस्थिरता के बाद ट्रेडर्स आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय अपना एक्सपोजर घटाने को प्राथमिकता देंगे।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि CAS से जुड़ी कोई भी अस्थिरता अस्थायी प्रकृति की होगी। जैसे-जैसे बाज़ार में भागीदारी बढ़ेगी और ट्रेडर्स नई प्रणाली के अभ्यस्त होंगे, कीमत-निर्धारण की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से बेहतर होती जाएगी। सीएएस की दीर्घकालिक सफलता व्यापक बाज़ार भागीदारी पर निर्भर करेगी।