स्काईवेज आईपीओ से पहले बड़े खतरे: ईओडब्ल्यू एफआईआर, ₹44.20 करोड़ की ओवर-इनवॉइसिंग और एईओ सर्टिफिकेट निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 24 अगस्त 2026 से खुलने से पहले ही कंपनी गंभीर कानूनी और नियामकीय जोखिमों के घेरे में है। सेबी (SEBI) के पास दाखिल आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कंपनी और उसकी सहायक कंपनी ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी, अधिक बिलिंग, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच कर रही है।
आईपीओ का विवरण
स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड का आईपीओ 24 अगस्त 2026 को निवेशकों के लिए खुलेगा और 27 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा। इसका प्राइस बैंड ₹131 से ₹138 प्रति इक्विटी शेयर निर्धारित किया गया है। इस इश्यू में 2.89 करोड़ इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है।
ईओडब्ल्यू एफआईआर और आरोप
यह जोखिम यूके की पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड की शिकायत पर दिल्ली ईओडब्ल्यू द्वारा 12 दिसंबर 2025 को दर्ज एफआईआर नंबर 0172/2025 से जुड़ा है। इस एफआईआर में स्काईवेज एयर सर्विसेज को आरोपी नंबर 3 और ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स लिमिटेड को आरोपी नंबर 2 बताया गया है। 11 अगस्त 2026 को दाखिल रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में इस एफआईआर का उल्लेख चल रही आपराधिक कार्यवाही के रूप में किया गया है।
पीजी पेपर का आरोप है कि स्काईवेज ग्रुप की कंपनियों — जिनमें ब्रेस पोर्ट, आरआईवी वर्ल्डवाइड लिमिटेड (यूके) और स्काईवेज एसएलएस लॉजिस्टिक्स जीएमबीएच शामिल हैं — ने मिलीभगत से फ्रेट का काम हासिल किया। इसमें बढ़ा-चढ़ाकर फ्रेट इनवॉइस बनाना, कथित रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और गलत जानकारी देना शामिल बताया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2021 से इन तीन सहायक कंपनियों के जरिए ₹800 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ और उन्हें कम से कम ₹44.20 करोड़ का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ। सेबी को दिए गए रिप्रेजेंटेशन में यह भी आरोप लगाया गया है कि ब्रेस पोर्ट और स्काईवेज ने मिलकर पीजी पेपर से लगभग ₹44.20 करोड़ की अतिरिक्त इनवॉइसिंग की।
पीजी पेपर के अनुसार, माल ढुलाई के खर्च को जानबूझकर बढ़ाया गया — कुछ मामलों में यह मौजूदा बाजार दरों से 40% से लेकर 300% तक अधिक था। साथ ही, आरोप है कि माल ढुलाई व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी को लालच देकर कंपनी की आंतरिक जांच प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
एईओ सर्टिफिकेट निलंबन — नियामकीय प्रहार
एफआईआर के बाद नियामकीय मोर्चे पर भी कंपनी को झटका लगा है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 14 मई 2026 को स्काईवेज के 'ऑथराइज्ड इकोनॉमिक ऑपरेटर-एलओ (एईओ-एलओ)' सर्टिफिकेट को निलंबित करने और रद्द करने का प्रस्ताव देते हुए नोटिस जारी किया।
जांच के नतीजे आने तक कंपनी का एईओ-एलओ स्टेटस 4 मई 2026 से निलंबित है। स्काईवेज ने 28 जुलाई 2026 को संबंधित प्राधिकरण को अपना जवाब सौंपा, लेकिन यह मामला अभी भी विचाराधीन है। गौरतलब है कि एईओ दर्जा लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए सीमा शुल्क निकासी में तेजी और विश्वसनीयता का प्रमाण माना जाता है — इसके निलंबन से कंपनी के परिचालन पर सीधा असर पड़ सकता है।
कंपनी की प्रतिक्रिया
संपर्क किए जाने पर स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड ने इन सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की। कंपनी ने आरएचपी में इन जोखिमों का खुलासा किया है, जो सेबी के प्रकटीकरण नियमों के तहत अनिवार्य है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय आईपीओ बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। ईओडब्ल्यू जांच और एईओ निलंबन जैसे जोखिमों को देखते हुए बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को सब्सक्रिप्शन से पहले इन कानूनी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। आईपीओ का अंतिम परिणाम काफी हद तक इन लंबित कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं के नतीजों पर निर्भर करेगा।