शेयर बाजार लाल निशान में खुला: सेंसेक्स 625 अंक टूटा, कंज्यूमर सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में
सारांश
Key Takeaways
- 23 अप्रैल को सुबह 9:21 बजे सेंसेक्स 625 अंक (0.80%25) गिरकर 77,891 पर आया।
- निफ्टी 50 162 अंक (0.67%25) की कमजोरी के साथ 24,215 पर रहा।
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स सबसे बड़ा लूजर रहा; एमएंडएम, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक भी लाल निशान में।
- निफ्टी फार्मा, डिफेंस और हेल्थकेयर सेक्टर हरे निशान में रहे; सन फार्मा और पावर ग्रिड टॉप गेनर्स।
- ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के बयान के बाद होर्मुज स्ट्रेट विवाद गहराया और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।
- अमेरिकी बाजार बुधवार को तेजी में बंद हुए — डाउ जोन्स 0.69%25 और नैस्डैक 1.64%25 की बढ़त के साथ — लेकिन भारतीय बाजार इस तेजी का लाभ नहीं उठा सका।
मुंबई, 23 अप्रैल: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सेंसेक्स 625 अंक यानी 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,891 पर और निफ्टी 50 162 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,215 पर कारोबार कर रहा था। बाजार खुलने के शुरुआती घंटों में ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे बड़े नुकसान में रहा।
कौन से सेक्टर लाल, कौन से हरे निशान में?
शुरुआती कारोबार में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स सबसे अधिक दबाव में रहा। इसके साथ ही निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सर्विसेज भी लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे।
दूसरी तरफ, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी पीएसई हरे निशान में बने रहे। यह दर्शाता है कि रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिला-जुला कारोबार
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक यानी 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,035 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक की मामूली बढ़त के साथ 17,832 पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि छोटे निवेशक अभी भी छोटी कंपनियों में दांव लगाने को तैयार हैं।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एमएंडएम, इंडिगो, इटरनल, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट और टाटा स्टील गिरावट में रहे। वहीं, पावर ग्रिड और सन फार्मा बढ़त में कारोबार कर रहे थे।
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में टोक्यो, बैंकॉक, सोल, जकार्ता, हांगकांग और शंघाई लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि, अमेरिकी बाजार बुधवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे, जिसमें डाउ जोन्स 0.69 प्रतिशत और नैस्डैक 1.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।
अमेरिकी बाजारों की तेजी के बावजूद भारतीय बाजार पर दबाव बना रहा, जो यह संकेत देता है कि घरेलू और भू-राजनीतिक कारण अधिक प्रभावी रहे।
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल पर असर
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछाल पर आ गईं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गईं। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के बयान को इस तेजी की मुख्य वजह माना जा रहा है।
गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। उनके अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध कर दिया है, जो सीजफायर का उल्लंघन है और इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव होगा जब अमेरिका यह नाकाबंदी समाप्त करे।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। इस रास्ते पर किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे तक हिला सकता है और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
भारतीय बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए दोहरी चुनौती पेश करती हैं — एक तरफ व्यापार घाटा बढ़ता है, दूसरी तरफ महंगाई पर दबाव आता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पहले से ही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश में है और ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें नीतिगत फैसलों को और जटिल बना सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव जल्द नहीं सुलझा, तो वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहेगी और भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रह सकती है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।