4 अगस्त 2026
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टैक्सेशन संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश: FDI, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और हीरा व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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टैक्सेशन संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश: FDI, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और हीरा व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

सारांश

टैक्सेशन संशोधन विधेयक 2026 सिर्फ कर सुधार नहीं — यह भारत की वैश्विक विनिर्माण महत्वाकांक्षा का विधायी खाका है। इलेक्ट्रॉनिक्स पर 15 साल की कर छूट, डेटा सेंटर को राहत और मुंबई-सूरत को हीरा व्यापार का वैश्विक केंद्र बनाने की कोशिश — यह विधेयक एक साथ कई मोर्चों पर दाँव लगाता है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया।
विधेयक का लक्ष्य अधिक FDI आकर्षित करना, विनिर्माण को बढ़ावा देना और कारोबारी सुगमता सुधारना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में मशीनरी/टूलिंग आपूर्ति पर कर छूट 5 साल से बढ़ाकर अतिरिक्त 10 साल करने का प्रस्ताव; बॉन्डेड वेयरहाउस सप्लाई पर 15 वर्ष की पूर्ण कर छूट।
REITs और InvITs निवेशकों को कर छूट पुनः बहाल करने और डेटा सेंटर नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव।
मुंबई और सूरत में कच्चे हीरों की बिक्री पर विदेशी कंपनियों को 15 वर्षों तक पूर्ण कर छूट देने का प्रस्ताव।
विदेशी फंड मैनेजरों की पात्रता शर्तें सरल की जाएँगी; मनी राउंड-ट्रिपिंग रोकने वाली न्यूनतम शर्तें बरकरार रहेंगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना, विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करना और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाना है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यह विधेयक वैश्विक निवेश फंड, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और बुनियादी ढाँचा निवेशकों को भारत में परिचालन के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

कर व्यवस्था में स्पष्टता और सरलीकरण

विधेयक का केंद्रीय तत्व कर प्रणाली को सरल और अनुमानित बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, कई विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश से इसलिए हिचकती रही हैं क्योंकि उन्हें अप्रत्याशित कर दायित्वों का भय रहता है। नया विधेयक उन्हें स्पष्ट, स्थिर और अनुमानित कर ढाँचा उपलब्ध कराने का प्रयास करता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सके और अनुपालन का बोझ घटे।

विधेयक में विदेशी निवेश फंड से जुड़े फंड मैनेजरों की पात्रता शर्तों को सुगम बनाने का प्रस्ताव है। केवल वे शर्तें बरकरार रखी गई हैं जो धन के दुरुपयोग और मनी राउंड-ट्रिपिंग को रोकने के लिए आवश्यक हैं। इससे विदेशी फंड मैनेजरों के लिए भारत में स्थानांतरित होकर काम करना सुलभ होगा, जबकि संबंधित विदेशी फंड को भारत में कारोबार करने वाला नहीं माना जाएगा।

REITs, InvITs और डेटा सेंटर को राहत

रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) में निवेशकों को कर छूट पुनः प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिससे रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में पूँजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

विधेयक में डेटा सेंटर से जुड़े कर नियमों को भी सरल बनाने का प्रस्ताव है। सरकार चाहती है कि विदेशी क्लाउड कंपनियाँ भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करें और देश में एआई डेटा सिटी विकसित हों। सरल कर नियमों से विदेशी कंपनियों के लिए भारत में डेटा सेंटर स्थापित करना और संचालित करना अधिक आसान हो जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण: 10 साल की अतिरिक्त कर छूट

विधेयक का एक बड़ा हिस्सा भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर केंद्रित है। यदि कोई विदेशी कंपनी भारत में स्थित अपनी अनुबंध-निर्माण इकाई को मशीनरी या टूलिंग उपलब्ध कराती है, तो उससे होने वाली आय पर कर छूट की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर अतिरिक्त 10 साल करने का प्रस्ताव है।

विधेयक में उन उत्पादों की स्पष्ट सूची दी गई है जिन पर ये प्रावधान लागू होंगे — मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर तथा उनके प्रमुख पुर्जे और एक्सेसरी। इससे नियमों की व्याख्या को लेकर किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहेगी।

इसके साथ ही, भारतीय बॉन्डेड वेयरहाउस के जरिए अनुबंध निर्माताओं को पुर्जे आपूर्ति करने वाली विदेशी कंपनियों की आय को 15 वर्षों तक पूरी तरह करमुक्त करने का प्रस्ताव है। यह प्रावधान भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक आकर्षक बना सकता है।

हीरा व्यापार: मुंबई-सूरत बनेंगे वैश्विक केंद्र

विधेयक में मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर विदेशी हीरा खनन कंपनियों और संबंधित व्यापारियों को 15 वर्षों तक पूर्ण कर छूट देने का प्रस्ताव है। अब तक इन कंपनियों को केवल प्रदर्शन की अनुमति थी, बिक्री पर कर राहत सीमित थी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित हो सकता है और दोनों शहरों की अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार केंद्र के रूप में स्थिति और सुदृढ़ होगी।

आगे क्या

विधेयक अब संसद में विचार-विमर्श के अगले चरण में जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन का लाभ उठाने की कोशिश में है और चीन-केंद्रित विनिर्माण से हट रहे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने की होड़ में है। विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक के प्रावधान सही दिशा में हैं, लेकिन क्रियान्वयन की गति और प्रशासनिक पारदर्शिता ही इसकी वास्तविक सफलता तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

डेटा सेंटर, हीरा व्यापार, REITs — को संबोधित करता है, जो व्यापक सोच का संकेत है, लेकिन इसी में इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी छिपी है। कर छूट की लंबी अवधि (15 वर्ष) निवेशकों को दीर्घकालिक निश्चितता देती है, पर आलोचकों का कहना है कि बिना मज़बूत निगरानी तंत्र के ऐसी छूटें राजस्व हानि में बदल सकती हैं। गौरतलब है कि भारत पहले भी कर प्रोत्साहन देता रहा है, फिर भी इलेक्ट्रॉनिक्स में चीन और वियतनाम से प्रतिस्पर्धा बनी हुई है — असली परीक्षा नीति की नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी। मुंबई-सूरत को हीरा व्यापार का वैश्विक केंद्र बनाने का प्रस्ताव महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों जैसे दुबई और एंटवर्प से तुलनात्मक लाभ साबित करना होगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक 2026 क्या है?
यह 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया कर संशोधन विधेयक है, जिसका उद्देश्य FDI आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और कर व्यवस्था को सरल बनाना है। इसमें डेटा सेंटर, REITs, InvITs और हीरा व्यापार के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
विधेयक में विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय निर्माण इकाइयों को मशीनरी/टूलिंग आपूर्ति पर कर छूट की अवधि 5 साल से बढ़ाकर अतिरिक्त 10 साल करने का प्रस्ताव है। बॉन्डेड वेयरहाउस के जरिए पुर्जे आपूर्ति पर 15 वर्षों की पूर्ण कर छूट भी प्रस्तावित है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और उनके पुर्जे इस दायरे में आएँगे।
मुंबई और सूरत के हीरा व्यापार को इस विधेयक से क्या फायदा होगा?
विधेयक में मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर विदेशी हीरा खनन कंपनियों को 15 वर्षों तक पूर्ण कर छूट देने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित होगा।
REITs और InvITs निवेशकों पर इस विधेयक का क्या असर होगा?
विधेयक में REITs और InvITs में निवेश करने वालों को कर छूट पुनः बहाल करने का प्रस्ताव है। इससे रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में निवेश बढ़ने और खुदरा निवेशकों के लिए इन साधनों की आकर्षकता बढ़ने की उम्मीद है।
विदेशी फंड मैनेजरों के लिए इस विधेयक में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
विधेयक में विदेशी निवेश फंड के फंड मैनेजरों की पात्रता शर्तें सरल करने का प्रस्ताव है। केवल मनी राउंड-ट्रिपिंग और धन के दुरुपयोग को रोकने वाली न्यूनतम शर्तें बरकरार रखी जाएँगी, जिससे विदेशी फंड मैनेजरों के लिए भारत में स्थानांतरित होकर काम करना आसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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