टैक्सेशन संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश: FDI, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और हीरा व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना, विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करना और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाना है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यह विधेयक वैश्विक निवेश फंड, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और बुनियादी ढाँचा निवेशकों को भारत में परिचालन के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
कर व्यवस्था में स्पष्टता और सरलीकरण
विधेयक का केंद्रीय तत्व कर प्रणाली को सरल और अनुमानित बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, कई विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश से इसलिए हिचकती रही हैं क्योंकि उन्हें अप्रत्याशित कर दायित्वों का भय रहता है। नया विधेयक उन्हें स्पष्ट, स्थिर और अनुमानित कर ढाँचा उपलब्ध कराने का प्रयास करता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सके और अनुपालन का बोझ घटे।
विधेयक में विदेशी निवेश फंड से जुड़े फंड मैनेजरों की पात्रता शर्तों को सुगम बनाने का प्रस्ताव है। केवल वे शर्तें बरकरार रखी गई हैं जो धन के दुरुपयोग और मनी राउंड-ट्रिपिंग को रोकने के लिए आवश्यक हैं। इससे विदेशी फंड मैनेजरों के लिए भारत में स्थानांतरित होकर काम करना सुलभ होगा, जबकि संबंधित विदेशी फंड को भारत में कारोबार करने वाला नहीं माना जाएगा।
REITs, InvITs और डेटा सेंटर को राहत
रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) में निवेशकों को कर छूट पुनः प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिससे रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में पूँजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।
विधेयक में डेटा सेंटर से जुड़े कर नियमों को भी सरल बनाने का प्रस्ताव है। सरकार चाहती है कि विदेशी क्लाउड कंपनियाँ भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करें और देश में एआई डेटा सिटी विकसित हों। सरल कर नियमों से विदेशी कंपनियों के लिए भारत में डेटा सेंटर स्थापित करना और संचालित करना अधिक आसान हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण: 10 साल की अतिरिक्त कर छूट
विधेयक का एक बड़ा हिस्सा भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर केंद्रित है। यदि कोई विदेशी कंपनी भारत में स्थित अपनी अनुबंध-निर्माण इकाई को मशीनरी या टूलिंग उपलब्ध कराती है, तो उससे होने वाली आय पर कर छूट की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर अतिरिक्त 10 साल करने का प्रस्ताव है।
विधेयक में उन उत्पादों की स्पष्ट सूची दी गई है जिन पर ये प्रावधान लागू होंगे — मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर तथा उनके प्रमुख पुर्जे और एक्सेसरी। इससे नियमों की व्याख्या को लेकर किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहेगी।
इसके साथ ही, भारतीय बॉन्डेड वेयरहाउस के जरिए अनुबंध निर्माताओं को पुर्जे आपूर्ति करने वाली विदेशी कंपनियों की आय को 15 वर्षों तक पूरी तरह करमुक्त करने का प्रस्ताव है। यह प्रावधान भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक आकर्षक बना सकता है।
हीरा व्यापार: मुंबई-सूरत बनेंगे वैश्विक केंद्र
विधेयक में मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर विदेशी हीरा खनन कंपनियों और संबंधित व्यापारियों को 15 वर्षों तक पूर्ण कर छूट देने का प्रस्ताव है। अब तक इन कंपनियों को केवल प्रदर्शन की अनुमति थी, बिक्री पर कर राहत सीमित थी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित हो सकता है और दोनों शहरों की अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार केंद्र के रूप में स्थिति और सुदृढ़ होगी।
आगे क्या
विधेयक अब संसद में विचार-विमर्श के अगले चरण में जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन का लाभ उठाने की कोशिश में है और चीन-केंद्रित विनिर्माण से हट रहे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने की होड़ में है। विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक के प्रावधान सही दिशा में हैं, लेकिन क्रियान्वयन की गति और प्रशासनिक पारदर्शिता ही इसकी वास्तविक सफलता तय करेगी।