18 अगस्त 2026
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टेक्नोलॉजी से डीमैट खाता खोलना हुआ आसान, टियर 2-3 शहरों से तेज़ी से बढ़ रहे खाते: NSDL सीबीओ समीर पाटिल

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टेक्नोलॉजी से डीमैट खाता खोलना हुआ आसान, टियर 2-3 शहरों से तेज़ी से बढ़ रहे खाते: NSDL सीबीओ समीर पाटिल

सारांश

डिजिटल क्रांति ने डीमैट खाता खोलने को घर बैठे मिनटों का काम बना दिया है — और अब यह बदलाव टियर 2-3 शहरों तक पहुँच रहा है। NSDL के सीबीओ समीर पाटिल का यह बयान उस बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जहाँ भारत का अगला निवेशक मेट्रो नहीं, छोटे शहरों से आएगा।

मुख्य बातें

NSDL के सीबीओ समीर पाटिल ने 18 अगस्त 2026 को मुंबई में कहा कि तकनीक ने डीमैट खाता खोलना सरल बना दिया है।
टियर 2 और टियर 3 शहरों से डीमैट खातों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज हो रही है।
ग्रेट इंडियन बॉन्ड फेस्टिवल (ग्रिप) में सेबी , NSDL और उद्योग जगत मिलकर बॉन्ड मार्केट में निवेशक जागरूकता बढ़ाने में जुटे हैं।
ग्रिप सीईओ वैभव लड्डा के अनुसार टैक्स के बाद एफडी का रिटर्न महंगाई दर से कम हो सकता है, जबकि बॉन्ड इक्विटी जोखिम के बिना बेहतर विकल्प दे सकते हैं।
यह बॉन्ड उद्योग का पहला वार्षिक महोत्सव है, जिसका लक्ष्य रिटेल निवेशकों को बॉन्ड बाज़ार से जोड़ना है।

नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड (NSDL) के चीफ बिजनेस ऑफिसर समीर पाटिल ने 18 अगस्त 2026 को मुंबई में कहा कि डिजिटल तकनीक ने डीमैट खाता खोलने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है, जिसके चलते टियर 2 और टियर 3 शहरों से खातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हो रही है। यह बयान मुंबई में आयोजित 'ग्रेट इंडियन बॉन्ड फेस्टिवल' (ग्रिप) के दौरान दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

ग्रिप कार्यक्रम के साइडलाइन में पाटिल ने कहा, 'पहले के समय में डीमैट अकाउंट खुलने में काफी समय लगता था, लेकिन जब से टेक्नोलॉजी आई है, इसने सब कुछ बदल दिया है और अब आप घर बैठे अकाउंट खोल सकते हैं।' उन्होंने रेखांकित किया कि छोटे शहरों में डिजिटल पहुँच बढ़ने से खुदरा निवेशकों की भागीदारी में तेज़ी आई है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और सेबी (SEBI) खुदरा निवेशकों को पूँजी बाज़ार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। गौरतलब है कि महामारी के बाद से ऑनलाइन केवाईसी और आधार-आधारित सत्यापन ने खाता खोलने की प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों तक सीमित कर दिया है।

बॉन्ड मार्केट में जागरूकता की ज़रूरत

पाटिल ने यह भी स्वीकार किया कि बॉन्ड मार्केट को लेकर अधिकांश निवेशकों में जानकारी का अभाव है। इसी कमी को दूर करने के लिए ग्रिप कार्यक्रम में सेबी, NSDL और उद्योग के अन्य प्रमुख पक्षकार एकत्रित हुए हैं, ताकि निवेशकों को बॉन्ड में निवेश के तरीके और उसके फायदे समझाए जा सकें।

ग्रिप सीईओ का नज़रिया

ग्रिप के सीईओ वैभव लड्डा ने बताया कि यह पहली बार है जब बॉन्ड उद्योग के लिए इस तरह का वार्षिक उत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा मकसद लोगों को निवेश के ज़रिए बॉन्ड के बारे में जागरूक और शिक्षित करना है और यह बताना है कि रिटेल निवेशक और पूरी इंडस्ट्री के लिए इनका क्या मतलब है।'

एफडी बनाम बॉन्ड: निवेशकों पर असर

लड्डा ने तर्क दिया कि जब निवेशक निश्चित रिटर्न की बात करते हैं, तो उनके ज़ेहन में केवल फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) आती है। उन्होंने चेताया कि टैक्स कटौती के बाद एफडी पर मिलने वाला वास्तविक रिटर्न महंगाई दर से कम हो सकता है। इसके विपरीत, बॉन्ड बाज़ार इक्विटी जैसे उतार-चढ़ाव के बिना बेहतर रिटर्न की संभावना देता है, जिससे यह खुदरा निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनता है।

क्या होगा आगे

ग्रिप जैसे आयोजन और डिजिटल तकनीक का विस्तार मिलकर भारत के खुदरा निवेशक आधार को व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बॉन्ड मार्केट में जागरूकता बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में खुदरा भागीदारी में उल्लेखनीय इज़ाफा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये नए निवेशक टिकाऊ हैं या बाज़ार की तेज़ी में आए अल्पकालिक भागीदार। पिछले कुछ वर्षों में भी खाता खुलने की रफ्तार तेज़ हुई थी, लेकिन बाज़ार में गिरावट आते ही निष्क्रिय खातों की संख्या भी बढ़ी। बॉन्ड मार्केट जागरूकता की पहल सराहनीय है, पर जब तक छोटे शहरों में वित्तीय साक्षरता की गहरी नींव नहीं रखी जाती, तब तक खाता खोलना और समझदारी से निवेश करना — दोनों अलग-अलग बातें रहेंगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीमैट खाता खोलना अब पहले से कैसे आसान हो गया है?
डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन केवाईसी और आधार-आधारित सत्यापन के चलते अब घर बैठे कुछ ही मिनटों में डीमैट खाता खोला जा सकता है। NSDL के सीबीओ समीर पाटिल के अनुसार, पहले इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था, जो अब नहीं लगता।
टियर 2 और 3 शहरों में डीमैट खाते क्यों बढ़ रहे हैं?
स्मार्टफोन की पहुँच, सस्ता इंटरनेट और सरल डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के कारण छोटे शहरों के निवेशक अब पूँजी बाज़ार में आसानी से प्रवेश कर पा रहे हैं। NSDL के अनुसार इन शहरों से खातों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो रही है।
ग्रेट इंडियन बॉन्ड फेस्टिवल (ग्रिप) क्या है?
यह बॉन्ड उद्योग का पहला वार्षिक महोत्सव है, जो मुंबई में आयोजित किया गया। इसमें सेबी, NSDL और उद्योग के प्रमुख पक्षकार रिटेल निवेशकों को बॉन्ड बाज़ार की जानकारी और उसके फायदे समझाने के लिए एकत्रित हुए।
बॉन्ड में निवेश फिक्स्ड डिपॉज़िट से बेहतर क्यों हो सकता है?
ग्रिप के सीईओ वैभव लड्डा के अनुसार, टैक्स कटौती के बाद एफडी का वास्तविक रिटर्न महंगाई दर से कम हो सकता है। बॉन्ड बाज़ार इक्विटी जैसे उतार-चढ़ाव के बिना बेहतर रिटर्न की संभावना देता है, जिससे यह रिटेल निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनता है।
NSDL बॉन्ड मार्केट में जागरूकता कैसे बढ़ा रहा है?
NSDL, सेबी और ग्रिप जैसे मंचों के साथ मिलकर निवेशक शिक्षा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। ग्रेट इंडियन बॉन्ड फेस्टिवल इसी दिशा में एक कदम है, जहाँ रिटेल निवेशकों को बॉन्ड के फायदे और निवेश प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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