सेबी ने कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में DLT टोकनाइजेशन पायलट लॉन्च किया, लिक्विडिटी और तेज सेटलमेंट का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के लिए डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) आधारित टोकनाइजेशन पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने मंगलवार, 26 मई 2026 को पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य डेट मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाना और सेटलमेंट प्रक्रिया को तेज करना है। यह कदम भारतीय पूंजी बाजार में ब्लॉकचेन तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य और दायरा
पांडे ने स्पष्ट किया कि इस पायलट का मकसद यह परखना है कि क्या ब्लॉकचेन आधारित सिस्टम बॉन्ड ट्रेडिंग और सेटलमेंट को अधिक कुशल बना सकते हैं, और इनसे जुड़े संभावित जोखिम क्या हैं। उन्होंने कहा, "हमने कॉर्पोरेट बॉन्डों के टोकनाइजेशन के लिए DLT के उपयोग पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है।"
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में कॉर्पोरेट बॉन्ड पहले से मौजूदा प्लेटफॉर्मों पर ट्रेड होते हैं, लेकिन सेबी यह मूल्यांकन कर रहा है कि DLT आधारित टोकनाइजेशन इस बाजार के कामकाज को और बेहतर बना सकता है या नहीं।
तरलता और तेज निपटान की संभावना
पांडे के अनुसार, "हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम बॉन्ड के लिए भी DLT और टोकनाइजेशन सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करने से तरलता और तेज निपटान की संभावना बढ़ जाएगी।" उन्होंने आगे कहा कि यह प्रयोग सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने और व्यापक क्रियान्वयन से पहले एक परिचालन एवं तकनीकी मॉडल का परीक्षण करने में सहायक होगा।
आरबीआई के दिशानिर्देश और नियामकीय तैयारी
पांडे ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस विषय पर पहले ही मसौदा दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं और जल्द ही अंतिम नियम आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सेबी और एक्सचेंज, नियामकीय मंजूरी मिलते ही इस ढाँचे को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई देश सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वैश्विक बाजार और भारत की विविधता
वैश्विक इक्विटी बाजारों पर टिप्पणी करते हुए पांडे ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), चिप्स, मेमोरी और AI इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के प्रति निवेशकों का उत्साह फिलहाल प्रमुख बाजारों में मूल्यांकन को ऊँचा रख रहा है। उन्होंने कहा, "इस समय कुछ अग्रणी कंपनियाँ हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से AI से जुड़ी हैं।"
ताइवान और भारत के बाजार पूंजीकरण की तुलना पर पांडे ने रेखांकित किया कि ताइवान में कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियाँ मूल्यांकन पर हावी हैं, जबकि भारत एक विविध बाजार बना हुआ है — जो इसे एकाग्रता-जोखिम से अपेक्षाकृत सुरक्षित रखता है। आगे चलकर DLT पायलट के परिणाम यह तय करेंगे कि क्या भारत का बॉन्ड बाजार तकनीकी नवाचार की अगली लहर में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।