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आरबीआई ने ई-रुपया पायलट का विस्तार किया: डीबीटी, टोकनाइज्ड डिपॉजिट और सीमा पार भुगतान में नई पहल

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आरबीआई ने ई-रुपया पायलट का विस्तार किया: डीबीटी, टोकनाइज्ड डिपॉजिट और सीमा पार भुगतान में नई पहल

सारांश

आरबीआई ने ई-रुपये को महज़ परीक्षण से आगे ले जाते हुए सरकारी सब्सिडी वितरण और वित्तीय बाज़ार उपकरणों में उतारा है। गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में प्रोग्रामेबल CBDC से खाद्य सब्सिडी और UMI पर टोकनाइज्ड डिपॉजिट पायलट — यह भारत की डिजिटल मुद्रा रणनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में CBDC पायलट के विस्तार की घोषणा की।
गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल ई-रुपये से खाद्य सब्सिडी मिली।
यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) पर टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट का पायलट शुरू; निपटान थोक CBDC से।
सिंगापुर MAS के साथ डिजिटल परिसंपत्ति सहयोग MoU और UAE केंद्रीय बैंक के साथ सीमा पार CBDC पर विचार-विमर्श।
RBI ने BIS इनोवेशन हब के प्रोजेक्ट रियाल्टो और प्रोजेक्ट मंडला (चरण-2) में भागीदारी की।
भविष्य में CBDC पायलट को अतिरिक्त DBT योजनाओं और व्यावसायिक अनुप्रयोगों तक बढ़ाने की योजना।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 29 मई 2026 को अपनी वार्षिक रिपोर्ट (वित्त वर्ष 2025-26) में घोषणा की कि उसने अपने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट प्रोजेक्ट का दायरा केंद्र और राज्य सरकारों की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और वित्तीय बाज़ार उपकरणों तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के लिए एक नया पायलट भी शुरू किया गया है।

सब्सिडी वितरण में ई-रुपया का उपयोग

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल CBDC के ज़रिये खाद्य सब्सिडी सीधे प्राप्त हुई। यह डिजिटल मुद्रा केवल उचित मूल्य की दुकानों और नामित व्यापारियों पर पात्र वस्तुओं की खरीद के लिए ही भुनाई जा सकती थी, जिससे सब्सिडी के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना संभव हुआ।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार DBT के माध्यम से लीकेज रोकने पर ज़ोर दे रही है। प्रोग्रामेबल CBDC इस दिशा में एक तकनीकी समाधान के रूप में उभर रहा है।

टोकनाइज्ड डिपॉजिट और UMI प्लेटफॉर्म

RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन को सुगम बनाने के लिए यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) विकसित किया है। रिपोर्ट में कहा गया, "रिज़र्व बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन को सुविधाजनक बनाने के लिए UMI विकसित किया है, जो एक बहुस्तरीय प्लेटफॉर्म है, साथ ही निपटान दक्षता बढ़ाने के लिए थोक CBDC का लाभ उठाता है।"

इस प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के निर्गमन और कारोबार का पायलट शुरू हो चुका है, जिसका निपटान थोक CBDC के माध्यम से किया जा रहा है। इस पहल का मूल उद्देश्य वित्तीय बाज़ारों में डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) और टोकनाइजेशन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक रूप देना है।

सीमा पार भुगतान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग

सीमा पार CBDC पहलों के तहत RBI ने सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) के साथ डिजिटल परिसंपत्ति सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं और चर्चा जारी है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के केंद्रीय बैंक के साथ सीमा पार CBDC पायलट को चालू करने के लिए विचार-विमर्श किया गया है।

गौरतलब है कि RBI ने बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) इनोवेशन हब के नेतृत्व में प्रोजेक्ट रियाल्टो और प्रोजेक्ट मंडला के दूसरे चरण में भी भागीदारी की है। दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य CBDC के उपयोग से सीमा पार भुगतान प्रणाली को अधिक तेज़ और किफायती बनाना है।

आगे की योजना

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि CBDC पायलट को आगे और अधिक DBT योजनाओं तथा व्यावसायिक अनुप्रयोगों तक विस्तारित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रोग्रामेबल CBDC को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तो यह भारत की सार्वजनिक वित्त वितरण प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव ला सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। प्रोग्रामेबल मुद्रा का उपयोग सब्सिडी लीकेज रोकने में कारगर हो सकता है, पर यह निजता और वित्तीय स्वायत्तता के सवाल भी उठाता है जिन पर सार्वजनिक बहस अभी नहीं हुई। टोकनाइज्ड डिपॉजिट और UMI का संयोजन भारतीय वित्तीय बाज़ारों के ढाँचे को बदल सकता है, किंतु इसके लिए नियामकीय स्पष्टता और बैंकिंग क्षेत्र की तैयारी दोनों ज़रूरी हैं। सिंगापुर और UAE के साथ सीमा पार पहल महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इनका असर तब दिखेगा जब ये पायलट से आगे बढ़कर नीतिगत ढाँचे में तब्दील होंगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई का CBDC पायलट विस्तार क्या है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने ई-रुपया (CBDC) पायलट को सरकारी DBT योजनाओं और वित्तीय बाज़ार उपकरणों तक बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में PDS लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल CBDC से खाद्य सब्सिडी दी गई।
टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट पायलट कैसे काम करता है?
RBI के UMI प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड रूप में जमा प्रमाणपत्रों का निर्गमन और कारोबार किया जा रहा है, जिसका निपटान थोक CBDC के माध्यम से होता है। इसका उद्देश्य DLT जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग कर वित्तीय बाज़ारों में निपटान दक्षता बढ़ाना है।
प्रोग्रामेबल CBDC से सब्सिडी वितरण में क्या फर्क पड़ता है?
प्रोग्रामेबल CBDC को केवल उचित मूल्य की दुकानों और नामित व्यापारियों पर पात्र वस्तुओं के लिए ही भुनाया जा सकता है। इससे सब्सिडी का दुरुपयोग रोकना और लक्षित वितरण सुनिश्चित करना संभव होता है।
आरबीआई ने सीमा पार CBDC के लिए किन देशों के साथ सहयोग किया है?
RBI ने सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) के साथ डिजिटल परिसंपत्ति सहयोग MoU पर हस्ताक्षर किए हैं और UAE के केंद्रीय बैंक के साथ सीमा पार CBDC पायलट पर विचार-विमर्श किया है। इसके अलावा, BIS इनोवेशन हब के प्रोजेक्ट रियाल्टो और प्रोजेक्ट मंडला (चरण-2) में भी भागीदारी है।
आगे CBDC पायलट का विस्तार किन क्षेत्रों में होगा?
केंद्रीय बैंक के अनुसार, CBDC पायलट को अतिरिक्त DBT योजनाओं और व्यावसायिक अनुप्रयोगों तक विस्तारित करने की योजना है। इससे डिजिटल रुपये का उपयोग और अधिक सरकारी कल्याण कार्यक्रमों में हो सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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