आरबीआई ने ई-रुपया पायलट का विस्तार किया: डीबीटी, टोकनाइज्ड डिपॉजिट और सीमा पार भुगतान में नई पहल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 29 मई 2026 को अपनी वार्षिक रिपोर्ट (वित्त वर्ष 2025-26) में घोषणा की कि उसने अपने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट प्रोजेक्ट का दायरा केंद्र और राज्य सरकारों की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और वित्तीय बाज़ार उपकरणों तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के लिए एक नया पायलट भी शुरू किया गया है।
सब्सिडी वितरण में ई-रुपया का उपयोग
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल CBDC के ज़रिये खाद्य सब्सिडी सीधे प्राप्त हुई। यह डिजिटल मुद्रा केवल उचित मूल्य की दुकानों और नामित व्यापारियों पर पात्र वस्तुओं की खरीद के लिए ही भुनाई जा सकती थी, जिससे सब्सिडी के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना संभव हुआ।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार DBT के माध्यम से लीकेज रोकने पर ज़ोर दे रही है। प्रोग्रामेबल CBDC इस दिशा में एक तकनीकी समाधान के रूप में उभर रहा है।
टोकनाइज्ड डिपॉजिट और UMI प्लेटफॉर्म
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन को सुगम बनाने के लिए यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) विकसित किया है। रिपोर्ट में कहा गया, "रिज़र्व बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन को सुविधाजनक बनाने के लिए UMI विकसित किया है, जो एक बहुस्तरीय प्लेटफॉर्म है, साथ ही निपटान दक्षता बढ़ाने के लिए थोक CBDC का लाभ उठाता है।"
इस प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के निर्गमन और कारोबार का पायलट शुरू हो चुका है, जिसका निपटान थोक CBDC के माध्यम से किया जा रहा है। इस पहल का मूल उद्देश्य वित्तीय बाज़ारों में डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) और टोकनाइजेशन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक रूप देना है।
सीमा पार भुगतान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग
सीमा पार CBDC पहलों के तहत RBI ने सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) के साथ डिजिटल परिसंपत्ति सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं और चर्चा जारी है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के केंद्रीय बैंक के साथ सीमा पार CBDC पायलट को चालू करने के लिए विचार-विमर्श किया गया है।
गौरतलब है कि RBI ने बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) इनोवेशन हब के नेतृत्व में प्रोजेक्ट रियाल्टो और प्रोजेक्ट मंडला के दूसरे चरण में भी भागीदारी की है। दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य CBDC के उपयोग से सीमा पार भुगतान प्रणाली को अधिक तेज़ और किफायती बनाना है।
आगे की योजना
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि CBDC पायलट को आगे और अधिक DBT योजनाओं तथा व्यावसायिक अनुप्रयोगों तक विस्तारित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रोग्रामेबल CBDC को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तो यह भारत की सार्वजनिक वित्त वितरण प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव ला सकता है।