उदय कोटक की चेतावनी: बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड से महंगाई और ब्याज दरों में उछाल का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने 2 सितंबर 2026 को निवेशकों को आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे में हो रही बढ़ोतरी केंद्रीय बैंकों को अपनी बैलेंस शीट विस्तारित करने — यानी अधिक मात्रा में मुद्रा छापने — पर मजबूर कर सकती है। उनके अनुसार, इस कदम का सीधा परिणाम महंगाई में वृद्धि और अल्पावधि में ऊँची ब्याज दरों के रूप में सामने आ सकता है।
कोटक ने क्या कहा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उदय कोटक ने लिखा, 'जापान के 10 साल की बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत और अमेरिका की 4.8 प्रतिशत के पार पहुँच गई है। जैसे-जैसे सरकारों पर कर्ज और घाटा बढ़ रहा है, केंद्रीय बैंकों के पास बैलेंस शीट बढ़ाने — यानी और पैसे छापने — के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। ऐसा होने पर महंगाई बढ़ेगी और छोटी अवधि में ब्याज दरें भी ऊपर जाएंगी। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहें!'
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में बॉन्ड यील्ड को लेकर अनिश्चितता का माहौल है और निवेशक केंद्रीय बैंकों की अगली चाल का इंतज़ार कर रहे हैं।
जापान और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड की स्थिति
जापान के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3 प्रतिशत को पार कर गई है, जो 1996 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। पिछले दो वर्षों में यह यील्ड तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई, देश की राजकोषीय स्थिति को लेकर गहराती चिंताएँ और यह अनुमान प्रमुख कारण हैं कि बैंक ऑफ जापान ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गति तेज़ कर सकता है।
वहीं, अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.8 प्रतिशत के करीब बनी हुई है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।
जापानी बॉन्ड यील्ड का वैश्विक असर
गौरतलब है कि पारंपरिक रूप से जापान वैश्विक बचत का एक विशाल केंद्र रहा है। वहाँ ब्याज दरें अत्यंत कम होने के कारण जापानी निवेशक विदेशी बॉन्ड और अन्य परिसंपत्तियों में भारी निवेश करते रहे हैं। यह स्थिति अब धीरे-धीरे बदल सकती है।
यदि जापान में घरेलू परिसंपत्तियों पर बेहतर रिटर्न मिलने लगे, तो जापानी निवेशक विदेशी बॉन्ड में अपनी खरीदारी घटा सकते हैं। इससे वैश्विक यील्ड पर ऊपर की ओर अतिरिक्त दबाव बन सकता है, जो पहले से ही तनाव में है।
निवेशकों पर संभावित असर
कोटक की चेतावनी का सार यह है कि यदि केंद्रीय बैंक मुद्रा आपूर्ति बढ़ाते हैं, तो महंगाई दर ऊँची बनी रह सकती है, जिससे अल्पावधि ब्याज दरों में उछाल आ सकता है। यह परिदृश्य उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होगा जिन्होंने स्थिर-आय उत्पादों में निवेश किया हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत समेत उभरते बाज़ारों के केंद्रीय बैंक भी वैश्विक यील्ड के रुझान पर नज़र रखते हुए अपनी मौद्रिक नीति तय कर रहे हैं। आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा वैश्विक और घरेलू दोनों बाज़ारों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।