कोलकाता को फिर से बड़ा आर्थिक हब बनाना जरूरी: संजीव सान्याल, विकसित भारत के लिए पूर्वी भारत की भूमिका अहम
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (EAC) के सदस्य संजीव सान्याल ने 26 जून 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने के लिए कोलकाता को एक सशक्त शहरी और आर्थिक केंद्र के रूप में पुनर्जीवित करना अनिवार्य है। उनके अनुसार, पूर्वी भारत के तेज़ आर्थिक विकास के बिना देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा।
मुख्य बयान और तर्क
सान्याल ने कहा, 'विकसित भारत के लिए विकसित पूर्वी भारत और विकसित बंगाल की जरूरत है, और इसमें विकसित कोलकाता की अहम भूमिका है।' उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोलकाता अब भी पूर्वी भारत का सबसे बड़ा शहरी केंद्र है और इस क्षेत्र में विकास की गति तेज़ करने के लिए इसे फिर से सक्रिय करना बेहद ज़रूरी है।
पूर्वी भारत में शहरी नेटवर्क की ज़रूरत
सान्याल ने पटना, गुवाहाटी, रांची और भुवनेश्वर जैसे शहरों को भी ग्रोथ सेंटर के रूप में उभरने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा, 'हमें पटना, गुवाहाटी, रांची और भुवनेश्वर की जरूरत है — उन्हें भी तेजी से आगे बढ़ना होगा, लेकिन सच तो यह है कि कोलकाता अभी भी सबसे बड़ा हब है, इसलिए इस शहरी नेटवर्क को गति देने के लिए कोलकाता को फिर से सक्रिय करना बहुत जरूरी है।'
निवेश और नीतिगत बदलाव पर ज़ोर
सान्याल ने कोलकाता के शहरी इकोसिस्टम में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शहर की विकास गति को पुनः पटरी पर लाने के लिए रीडेवलपमेंट पहलें शुरू करनी होंगी और उन औद्योगिक नीतियों में बदलाव करना होगा जो कारोबार और निवेश के अनुकूल नहीं हैं।
बंगाल की उद्यमशीलता की विरासत
सान्याल ने यह भी रेखांकित किया कि बंगाल का व्यापार और उद्यमिता का एक समृद्ध ऐतिहासिक अध्याय रहा है। उनके अनुसार, इनोवेशन, जोखिम लेने और उद्यमशीलता की उस भावना को पुनर्जीवित करना होगा जिसके लिए बंगाली समाज ऐतिहासिक रूप से जाना जाता था। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच आर्थिक असंतुलन को दूर करना नीतिनिर्माताओं की प्राथमिकता बन रही है।
आगे की राह
सान्याल के अनुसार, विकसित बंगाल और विकसित कोलकाता के बिना 'विकसित भारत' का बड़ा लक्ष्य अधूरा रहेगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वी भारत में बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठा रही है। अब देखना यह होगा कि नीतिगत सुधारों और निवेश प्रोत्साहनों के ज़रिये कोलकाता अपनी खोई हुई आर्थिक प्रतिष्ठा को कितनी तेज़ी से वापस पाता है।