कोलकाता का पुनरुद्धार पूर्वी भारत के विकास की कुंजी: EAC सदस्य संजीव सान्याल
सारांश
EAC सदस्य संजीव सान्याल ने NSE के मंच से स्पष्ट किया कि भारत की असली आर्थिक खाई उत्तर-दक्षिण नहीं, बल्कि पूर्व-पश्चिम है। उनके अनुसार कोलकाता का पुनरुद्धार ही पूर्वी भारत को विकास की मुख्यधारा में लाने की कुंजी है — और उद्योगपति संजीव गोयनका भी राजनीतिक स्थिरता से निवेश की उम्मीद जगा रहे हैं।
मुख्य बातें
EAC सदस्य संजीव सान्याल ने 6 मई 2026 को NSE, मुंबई में कहा कि भारत की असली आर्थिक समस्या पूर्व-पश्चिम विभाजन है, उत्तर-दक्षिण नहीं।
सान्याल के अनुसार कोलकाता के पास पहले से औद्योगिक क्लस्टर और समृद्ध इतिहास है, जो पूर्वी भारत के पुनरुद्धार की नींव बन सकते हैं।
RPSG ग्रुप के चेयरमैन संजीव गोयनका ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिर सरकार बनने पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
गोयनका ने नीतिगत स्थिरता और शहरी भूमि सीमा जैसे पुराने नियमों को हटाने की वकालत की।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ आर्थिक विकास चुनिंदा बड़े शहरों और विकास केंद्रों के ज़रिए ही आगे बढ़ता है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्य संजीव सान्याल ने 6 मई 2026 को कहा कि कोलकाता को एक सशक्त विकास केंद्र के रूप में पुनर्जीवित करना भारत के पूर्वी हिस्से की आर्थिक तरक्की के लिए सबसे ज़रूरी कदम है, क्योंकि यह क्षेत्र देश के पश्चिमी हिस्से की तुलना में 'काफी अधिक गरीब' है। यह बात उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), मुंबई में आयोजित 'भारतीय राज्यों के सापेक्ष आर्थिक प्रदर्शन' विषयक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कही।
असली चुनौती: पूर्व-पश्चिम विभाजन
सान्याल ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन इसे EAC के मंच से कहना नीतिगत प्राथमिकता का संकेत देता है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार कोलकाता के पुनरुद्धार के लिए ठोस नीतिगत हस्तक्षेप करेगी, या यह चर्चा महज़ बौद्धिक विमर्श तक सिमटी रहेगी। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता और नीतिगत उलटफेर का लंबा इतिहास रहा है, जो निवेशकों को हिचकिचाता रहा है। गोयनका जैसे उद्योगपतियों की उम्मीद तभी साकार होगी जब राज्य सरकार बिजनेस-फ्रेंडली सुधारों को ज़मीन पर उतारे — न केवल मंच से वादे करे।
RashtraPress
14 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संजीव सान्याल ने कोलकाता के पुनरुद्धार को क्यों ज़रूरी बताया?
सान्याल के अनुसार भारत का पूर्वी हिस्सा पश्चिमी हिस्से की तुलना में काफी अधिक गरीब है और देश की आर्थिक तरक्की बड़े विकास केंद्रों के ज़रिए होती है। कोलकाता के पास पहले से औद्योगिक क्लस्टर और ऐतिहासिक बुनियाद है, इसलिए इसका पुनरुद्धार पूर्वी भारत को मुख्यधारा में ला सकता है।
EAC सदस्य सान्याल ने यह बात कहाँ और कब कही?
यह बयान 6 मई 2026 को NSE, मुंबई में आयोजित 'भारतीय राज्यों के सापेक्ष आर्थिक प्रदर्शन' विषयक कार्यक्रम के दौरान दिया गया। सान्याल ने वहाँ पत्रकारों से बातचीत में भारत के पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन पर विस्तार से चर्चा की।
संजीव गोयनका ने पश्चिम बंगाल में निवेश को लेकर क्या कहा?
RPSG ग्रुप के चेयरमैन संजीव गोयनका ने कहा कि राज्य में स्थिर सरकार बनने पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने नीतिगत स्थिरता और शहरी भूमि सीमा जैसे पुराने नियमों में सुधार की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
भारत में पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन क्या है?
सान्याल के अनुसार भारत में प्रचलित उत्तर-दक्षिण विभाजन की चर्चा से इतर असली आर्थिक खाई पूर्वी और पश्चिमी राज्यों के बीच है। पूर्वी राज्य प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षण के मामले में पश्चिमी राज्यों से काफी पीछे हैं।
कोलकाता के विकास में क्या बाधाएँ हैं?
सान्याल ने खुद माना कि पिछले 50 वर्षों में कोलकाता में गिरावट आई है। गोयनका ने नीतिगत अस्थिरता, बार-बार नियमों में बदलाव और शहरी भूमि सीमा जैसे पुराने कानूनों को निवेश में बाधक बताया।