वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राष्ट्र को समर्पित: ₹1.3 लाख करोड़ की परियोजना से लॉजिस्टिक्स लागत 7% तक आएगी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 सितंबर 2026 को ₹1.3 लाख करोड़ की महत्वाकांक्षी वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग 1,500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश — पाँच राज्यों से होकर गुज़रता है और उत्तर भारत को देश के पश्चिमी तट से जोड़ता है। जेएनपीटी-न्यू उमरगाम खंड के उद्घाटन के साथ यह परियोजना भारत की माल ढुलाई व्यवस्था में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
महाराष्ट्र के उरण में आयोजित समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस उद्घाटन को 'ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी उपलब्धि' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर भारत को कम लागत वाली वैश्विक लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में चीन का मज़बूत प्रतिस्पर्धी बनाएगा। परियोजना को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) का प्रमुख वित्तीय सहयोग प्राप्त है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कॉरिडोर की लगभग 70 से 80 प्रतिशत क्षमता उत्तर भारत के इनलैंड कंटेनर डिपो और जेएनपीटी, मुंद्रा तथा पीपावाव जैसे पश्चिमी बंदरगाहों के बीच आयात-निर्यात कंटेनर यातायात के लिए निर्धारित की गई है।
लॉजिस्टिक्स लागत पर असर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि 2014 से पहले भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 14 प्रतिशत थी, जबकि चीन में उस समय यह करीब 7 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में यह लागत घटकर 10 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। WDFC के पूरी तरह चालू होने के बाद इसके 7 प्रतिशत तक आने की संभावना जताई गई है, जिससे भारत वैश्विक विनिर्माण और सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बन सकेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। उच्च लॉजिस्टिक्स लागत लंबे समय से भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए बड़ी बाधा रही है।
महाराष्ट्र को विशेष लाभ
वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) देश के कुल कंटेनर ट्रैफिक का 55 प्रतिशत से अधिक संभालती है। मुख्यमंत्री के अनुसार आने वाले वर्षों में जेएनपीटी की क्षमता कई मिलियन टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) से अधिक हो जाएगी।
गौरतलब है कि प्रस्तावित वधावन पोर्ट — जो जेएनपीटी से तीन गुना बड़ा होगा — और WDFC मिलकर महाराष्ट्र को समुद्री एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बड़ी ताकत बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, ऐसा फडणवीस ने कहा।
आम जनता और उद्योग पर असर
इस कॉरिडोर के ज़रिए उर्वरक, खाद्यान्न, नमक, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद, सीमेंट और अन्य औद्योगिक सामानों की ढुलाई की जाएगी। यह दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रमुख लॉजिस्टिक्स आधार के रूप में काम करेगा। इसके मार्ग पर मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक केंद्रों के विकास से बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
WDFC के पूरी तरह परिचालन में आने के साथ, विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊँचाई दे सकता है। हालाँकि, परियोजना की वास्तविक क्षमता तब सामने आएगी जब इसके मार्ग पर प्रस्तावित औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे का विकास पूरा होगा। वधावन पोर्ट की समयसीमा और मल्टी-मोडल पार्कों की प्रगति अगले प्रमुख पड़ाव होंगे।