एनएफआर ने जुलाई 2026 तक 42.1 मेगावाट सोलर क्षमता हासिल की, 2025-26 में ₹8.6 करोड़ की बचत
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) ने 2011 में अपनी सोलराइजेशन पहल की शुरुआत के बाद से जुलाई 2026 तक अपने पूरे जोन में कुल 42.1 मेगावाट की संस्थापित सोलर क्षमता हासिल कर ली है। यह उपलब्धि तब और उल्लेखनीय हो जाती है जब जनवरी से जुलाई 2026 के बीच अकेले 23.7 मेगावाट की नई सोलर क्षमता चालू की गई — जो भारतीय रेलवे के सभी जोनल रेलवे में सर्वाधिक है।
मुख्य उपलब्धियाँ
एनएफआर के चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान स्थापित 23.7 मेगावाट की सोलर क्षमता ने एनएफआर को इस अवधि में समूचे भारतीय रेलवे नेटवर्क में शीर्ष स्थान दिलाया। उन्होंने इसे ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल रेलवे संचालन के प्रति एनएफआर की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
डिवीजन-वार प्रदर्शन
डिवीजन स्तर पर देखें तो लुमडिंग डिवीजन (गुवाहाटी क्षेत्र सहित) ने 17.7 मेगावाट की सर्वाधिक संचयी सोलर स्थापना क्षमता दर्ज की। इसके बाद रंगिया डिवीजन का स्थान है, जिसने 9.6 मेगावाट क्षमता हासिल की। अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल), कटिहार (बिहार) और तिनसुकिया (असम) डिवीजन ने भी एनएफआर की कुल सोलर क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वित्तीय और परिचालन लाभ
वित्तीय वर्ष 2025–26 में एनएफआर का सोलर ऊर्जा उत्पादन लगभग 114 लाख यूनिट रहा, जिससे करीब ₹8.6 करोड़ की बचत हुई। यह आँकड़ा 2024–25 की तुलना में उल्लेखनीय है — उस वर्ष लगभग 60 लाख यूनिट सोलर ऊर्जा उत्पन्न हुई थी और बचत करीब ₹4.4 करोड़ रही थी। इस प्रकार एक वर्ष में सोलर उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत और वित्तीय बचत में 95.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
आगे की योजना
एनएफआर के विभिन्न डिवीजन में अभी 9 मेगावाट की अतिरिक्त सोलर क्षमता स्थापित करने का कार्य अलग-अलग चरणों में प्रगति पर है। शर्मा के अनुसार, लुमडिंग, रंगिया, कटिहार और अलीपुरद्वार डिवीजन में बड़े इंस्टॉलेशन की योजना है, जिनसे निकट भविष्य में एनएफआर की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि मालीगांव, गुवाहाटी में मुख्यालय वाला एनएफआर पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सात जिलों और बिहार के पाँच जिलों में रेल सेवाएँ संचालित करता है। यह पहल भारतीय रेलवे के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के दीर्घकालिक विजन में एनएफआर के सक्रिय योगदान को रेखांकित करती है। सोलर क्षमता के निरंतर विस्तार से न केवल कार्बन फुटप्रिंट घट रहा है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक दक्षता भी मजबूत हो रही है।