अदिवी शेष का बड़ा बयान: 'पैन इंडिया' नहीं, कहानी बने फिल्म की असली पहचान
सारांश
मुख्य बातें
तेलुगु सिनेमा के चर्चित अभिनेता और कहानीकार अदिवी शेष ने 14 जुलाई 2026 को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में 'पैन इंडिया' की अवधारणा पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया — क्या किसी फिल्म की पहचान उसकी भाषा से तय होनी चाहिए, या उसकी कहानी से? उनके मुताबिक, जब तक दर्शक और निर्माता फिल्मों को 'हिंदी', 'तेलुगु' या 'तमिल' के खाँचों में बाँटते रहेंगे, तब तक सच्चे अर्थों में 'पैन इंडिया सिनेमा' की शुरुआत नहीं हो सकती।
भाषा नहीं, कहानी हो पहचान
अदिवी शेष ने कहा, 'मुझे यह दिलचस्प लगता है कि आज भी हम फिल्मों को 'हिंदी फिल्म', 'तेलुगु फिल्म' या 'तमिल फिल्म' कहते हैं और फिर अलग से 'पैन इंडिया फिल्म' जैसा शब्द इस्तेमाल करते हैं। अगर कोई फिल्म पूरे देश के दर्शकों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकती है, तो फिर उसकी पहचान किसी एक भाषा तक सीमित क्यों होनी चाहिए?' यह बयान ऐसे समय में आया है जब RRR, KGF और बाहुबली जैसी फिल्मों ने भाषाई सीमाएँ लाँघकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है।
दर्शक बदल चुके हैं, सोच भी बदले
शेष ने तर्क दिया कि आज के दर्शक पहले से कहीं अधिक खुले विचारों वाले हैं। उनके शब्दों में, 'वे इस बात की परवाह नहीं करते कि फिल्म किस भाषा में बनी है, बल्कि यह देखते हैं कि कहानी कितनी दमदार है और उसे किस तरह पर्दे पर पेश किया गया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाषा के आधार पर फिल्मों को श्रेणियों में बाँटना उस 'अदृश्य दीवार' का संकेत है जिसे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री अभी पूरी तरह नहीं तोड़ पाई है।
कलाकार की जिम्मेदारी
एक कलाकार और कहानीकार के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए शेष ने कहा, 'मेरी जिम्मेदारी ऐसी कहानियाँ सुनाना है जो सच्ची हों और देश के हर हिस्से के दर्शकों तक पहुँच सकें। फिल्म निर्माताओं का सपना केवल किसी एक भाषा के बाज़ार तक सीमित नहीं होना चाहिए।' गौरतलब है कि अदिवी शेष खुद अभिनय के साथ-साथ पटकथा लेखन में भी सक्रिय रहे हैं, जो उनके इस दृष्टिकोण को और विश्वसनीय बनाता है।
वर्कफ्रंट: 'डकैत: ए लव स्टोरी'
अदिवी शेष हाल ही में रोमांटिक एक्शन ड्रामा फिल्म 'डकैत: ए लव स्टोरी' में नज़र आए हैं। फिल्म का निर्देशन शेनिल देव ने किया है और इसमें मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिका में हैं। अनुराग कश्यप, प्रकाश राज, सुनील, जेन मैरी खान और अतुल कुलकर्णी भी अहम किरदारों में हैं।
आगे की राह
अदिवी शेष का यह विचार भारतीय सिनेमा के उस व्यापक बहस का हिस्सा है जिसमें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सिनेमा के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। जब भारतीय फिल्में वैश्विक मंचों पर पहचान बना रही हैं, तब यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि क्या 'पैन इंडिया' एक मार्केटिंग लेबल है या एक सांस्कृतिक सच्चाई।