अमिताभ बच्चन का संघर्ष: 'लोग कहते थे एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ नहीं आता, घर जाओ'
सारांश
मुख्य बातें
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने क्विज़ रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति सीजन-18' के एक विशेष एपिसोड में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को खुलकर साझा किया। इस एपिसोड में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन, जसवंत कुमार, शर्मिला धनकर और अस्मिता डे मेहमान के तौर पर शामिल थीं। बच्चन ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में पाँव जमाने से पहले उन्हें कड़ी आलोचनाओं और बार-बार अस्वीकृति का सामना करना पड़ा था।
जब कहा गया — 'एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ नहीं आता'
शो के दौरान अस्मिता ने बच्चन से पूछा कि क्या एक्टर्स को भी फिल्म सेट पर डायरेक्टर्स से डांट सुननी पड़ती है, जैसे एथलीट्स को ट्रेनिंग में कोच से मिलती है। इस पर अमिताभ बच्चन ने कहा, 'हमको बड़ी डांटे पड़ती थीं, शुरू-शुरू में तो लोग बोलते थे कि तुमको तो एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता ही नहीं, बहुत लंबे हो अपने घर जाओ।' उनकी यह स्वीकारोक्ति उपस्थित मेहमानों और दर्शकों दोनों को भावुक कर गई।
देर से सेट पहुँचे तो फिल्म से ही निकाल दिया
बच्चन ने एक और किस्सा साझा किया जब काम मिलने के बावजूद मुश्किलें कम नहीं हुईं। उन्होंने बताया, 'आमतौर हममें से सभी समय पर पहुंचने का प्रयास करते हैं, लेकिन एक बार मुझे पहुंचने में देर हो गई। सेट के बाहर डायरेक्टर खड़े थे और हम किसी और की गाड़ी लेकर पहुंचे, तब हमारे पास नहीं हुआ करती थी। सेट पर हम जैसे ही पहुंचे, तो डायरेक्टर ने हमें फिल्म से ही निकाल दिया था।' यह प्रसंग दर्शाता है कि शुरुआती दौर में उन्हें किस हद तक अपमान और निराशा झेलनी पड़ी।
पाँच दशकों का सफर — वॉइस आर्टिस्ट से महानायक तक
अमिताभ बच्चन पिछले पाँच दशकों से भी अधिक समय से भारतीय मनोरंजन उद्योग का अभिन्न हिस्सा हैं। सिनेमा से उनका पहला नाता अभिनय से नहीं, बल्कि एक वॉइस-ओवर आर्टिस्ट के रूप में हुआ था। 1969 में उन्होंने निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म 'भुवन शोम' में अपनी विशिष्ट बैरिटोन आवाज़ दी, जो भारत के पैरेलल सिनेमा आंदोलन की एक महत्वपूर्ण कृति बन गई।
संघर्ष से प्रेरणा — एथलीट्स और कलाकारों की साझी कहानी
यह ऐसे समय में आया है जब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की विजेता लवलीना बोरगोहेन जैसी खिलाड़ियाँ भी अपने संघर्ष के किस्से साझा कर रही हैं। गौरतलब है कि बच्चन का यह अनुभव एथलीट्स की उस यात्रा से मेल खाता है, जहाँ असफलता और अस्वीकृति ही आगे बढ़ने की नींव बनती है। KBC का यह एपिसोड इस दृष्टि से विशेष रहा कि दो अलग-अलग क्षेत्रों के संघर्षों को एक मंच पर रखा गया।
आगे क्या
'कौन बनेगा करोड़पति सीजन-18' का यह विशेष एपिसोड जल्द ही प्रसारित होने वाला है। अमिताभ बच्चन की यह बेबाकी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जो अपने सपनों को पूरा करने की राह में रुकावटों से जूझ रहे हैं।