पश्चिम बंगाल: पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ टेंडर घोटाले की न्यायिक जांच शुरू, करोड़ों की अनियमितता
सारांश
मुख्य बातें
न्यायिक जांच आयोग ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की टेंडर प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह आयोग तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पिछले शासनकाल के दौरान हुए कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की पड़ताल के लिए गठित किया गया था। 2 अक्टूबर 2026 को इस घटनाक्रम की पुष्टि आयोग के एक सदस्य ने की।
मुख्य घटनाक्रम
जांच का केंद्र 'मोदेर गोरोब बांग्ला' (बंगाल, हमारा गौरव) परियोजना है, जिसे इंद्रनील सेन के विभाग में कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य बंगाल की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, इतिहास और पर्यटन को बढ़ावा देना तथा राज्य के प्रत्येक जिले के स्थानीय कलाकारों को अवसर प्रदान करना था। इसके अंतर्गत राज्यभर में मेलों, प्रदर्शनियों और हस्तशिल्प स्टॉलों का आयोजन किया गया।
आयोग को मिली शिकायत के अनुसार, 2022 और 2023 में इन मेलों व प्रदर्शनियों के सभी टेंडर इंद्रनील सेन के कथित तौर पर करीबी कुछ विशेष संगठनों को दिए गए। आरोप है कि सेन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी पसंद के चुनिंदा संस्थानों को करोड़ों के अनुबंध दिलाए, जिनमें से कुछ उनके रिश्तेदार भी बताए जाते हैं।
इंद्रनील सेन की राजनीतिक पृष्ठभूमि
तृणमूल कांग्रेस के पिछले शासनकाल में इंद्रनील सेन ने राज्य मंत्रिमंडल में दो महत्वपूर्ण विभाग संभाले थे। वह पहले सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में राज्य मंत्री रहे और बाद में पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यरत रहे। गौरतलब है कि उनके कार्यकाल के दौरान शुरू हुई परियोजनाएँ अब कई एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं।
ईडी की समानांतर जांच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले से ही सेन और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन से जुड़ी दो कंपनियों की जांच कर रहा है। इनमें से पहली कंपनी 'मास आर्ट' है, जिस पर कथित तौर पर यूनेस्को की अनुमति के बिना उसके नाम और लोगो का उपयोग करके 'दुर्गा पूजा पूर्वावलोकन शो' के पास जारी करने का आरोप है। दूसरी कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स बताई जाती है, जो सेन के स्वामित्व वाली एक प्रोप्राइटरशिप फर्म है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईडी की जांच के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी सामने आया है। हालाँकि, इस संदर्भ में अभी तक कोई आधिकारिक आरोप नहीं लगाया गया है।
आयोग की प्रतिक्रिया
न्यायिक जांच समिति के एक सदस्य ने जांच शुरू होने की पुष्टि करते हुए कहा, "फिलहाल मैं जांच के हित में और अधिक जानकारी नहीं दे सकता।" उन्होंने स्पष्ट किया कि विशिष्ट आरोपों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। आयोग ने अभी तक इंद्रनील सेन को सम्मन जारी किए जाने की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC के पिछले शासनकाल से जुड़े कई भ्रष्टाचार मामले अदालतों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के सामने हैं। न्यायिक आयोग की जांच के दायरे और समयसीमा पर अभी स्पष्टता का इंतजार है। ईडी और आयोग की समानांतर जांच से यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक उलझ सकता है।