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'चौहान' टीजर विवाद: क्षत्रिय परिषद का आरोप, बॉलीवुड फिल्मों से सांप्रदायिक एजेंडा चलाया जा रहा है

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'चौहान' टीजर विवाद: क्षत्रिय परिषद का आरोप, बॉलीवुड फिल्मों से सांप्रदायिक एजेंडा चलाया जा रहा है

सारांश

अजय देवगन की फिल्म 'चौहान' का टीजर रिलीज होते ही विवाद में घिर गया। क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर अभिषेक आनंद ने आरोप लगाया कि डायलॉग ऐतिहासिक रूप से गलत हैं और दो समुदायों को भिड़ाने की कोशिश है — साथ ही बॉलीवुड पर इतिहास को एजेंडे के अनुसार तोड़ने का पुराना आरोप फिर सामने आया।

मुख्य बातें

अजय देवगन की फिल्म 'चौहान' का टीजर रिलीज होते ही विवादों में घिर गया।
क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर अभिषेक आनंद ने आरोप लगाया कि फिल्म के डायलॉग दो समुदायों को आपस में भिड़ाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्म में पठानों को निशाना बनाना ऐतिहासिक रूप से गलत है, क्योंकि पठान कश्मीर में नहीं, अफगानिस्तान में रहते हैं।
बॉलीवुड पर 'तान्हाजी' और 'जोधा-अकबर' जैसी फिल्मों के ज़रिए दोहरा एजेंडा चलाने का आरोप लगाया गया।
1857 की स्वतंत्रता सेनानी धर्मन बाई और बाबू कुंवर सिंह जैसे वास्तविक नायकों पर फिल्म न बनाने पर भी सवाल उठाए गए।

अजय देवगन अभिनीत आगामी एक्शन फिल्म 'चौहान' का टीजर रिलीज होते ही विवादों की चपेट में आ गया है। लखनऊ में 1 जुलाई 2026 को क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर अभिषेक आनंद ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि बॉलीवुड फिल्मों के माध्यम से एक सुनियोजित एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।

टीजर पर क्या है विवाद

अभिषेक आनंद के अनुसार, 'चौहान' फिल्म कथित तौर पर एक पत्थरबाजी की घटना पर आधारित है, लेकिन इसके टीजर में इस्तेमाल किए गए डायलॉग दो समुदायों को आपस में भिड़ाने का काम करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि फिल्म में पठानों को निशाना बनाया गया है, जबकि तथ्य यह है कि कश्मीर में पठान नहीं रहते — पठान समुदाय मुख्यतः अफगानिस्तान में निवास करता है।

उनका कहना था कि यदि फिल्म में ऐतिहासिक संदर्भ देना ही था, तो राजा मानसिंह के किरदार का उपयोग उचित होता, जिन्होंने अफगानिस्तान के पठानों की पाँचों जनजातियों को पराजित करने के बाद अपने पंचरंगा ध्वज में उनका प्रतीक जोड़ा था — जो पहले केवल कचनार का हुआ करता था। अभिषेक आनंद ने स्पष्ट किया कि 'चौहान' फिल्म के डायलॉग का न तो ऐतिहासिक आधार है और न ही तार्किक संगति।

बॉलीवुड पर दोहरे एजेंडे का आरोप

क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर ने आरोप लगाया कि बॉलीवुड दो तरीकों से एजेंडा सेट करता है — पहला, 'तान्हाजी' जैसी फिल्मों के ज़रिए जहाँ ऐतिहासिक खलनायकों के किरदारों को विकृत रूप में दिखाया जाता है, और दूसरा, 'जोधा-अकबर' जैसी फिल्मों के माध्यम से जहाँ एक विशेष दृष्टिकोण को इतिहास के रूप में परोसा जाता है।

उन्होंने कहा कि अजय देवगन की फिल्म 'तान्हाजी' में भी उदयभान के किरदार को तथ्यों से परे जाकर दर्शाया गया था। उनका यह भी कहना था कि बॉलीवुड जब चाहे क्षत्रिय और राजपूत पहचान का व्यावसायिक उपयोग करता है, लेकिन जब इतिहास को प्रामाणिक रूप से पर्दे पर उतारने की बात आती है, तो गलत जानकारी परोसी जाती है।

धर्मन बाई और बाबू कुंवर सिंह का उदाहरण

अभिषेक आनंद ने बॉलीवुड की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए पूछा कि फिल्म निर्माता बाबू कुंवर सिंह और धर्मन बाई जैसे वास्तविक नायकों पर फिल्म क्यों नहीं बनाते। उन्होंने बताया कि धर्मन बाई — जिन्हें धरमन देवी या धरमन बीवी के नाम से भी जाना जाता है — मुस्लिम समुदाय से आती थीं और आरा की एक गायिका थीं, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बाबू कुंवर सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध लड़ा और उन्हीं की गोद में वीरगति को प्राप्त हुईं।

उनका कहना था कि इस प्रकार की सांप्रदायिक सौहार्द की कहानियाँ बॉलीवुड को रास नहीं आतीं, क्योंकि ये उनके तय एजेंडे में फिट नहीं बैठतीं। उन्होंने माँग की कि बॉलीवुड को भारत के इतिहास को उसकी वास्तविक जटिलता और समग्रता के साथ पर्दे पर प्रस्तुत करना चाहिए।

इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों की चुप्पी पर सवाल

अभिषेक आनंद ने यह भी रेखांकित किया कि जब इस तरह की ऐतिहासिक रूप से संदिग्ध फिल्में बनती हैं, तब न तो इतिहासकार और न ही बुद्धिजीवी इन पर कोई सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार, भारत के इतिहास को 'ब्लैक एंड व्हाइट' बनाया जा रहा है — जो न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के साथ अन्याय है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरनाक है। यह विवाद आने वाले समय में फिल्म की रिलीज़ से पहले और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जवाबदेही का भी प्रश्न है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चौहान' फिल्म के टीजर पर विवाद क्यों हुआ?
क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर अभिषेक आनंद के अनुसार, 'चौहान' के टीजर में इस्तेमाल किए गए डायलॉग ऐतिहासिक रूप से गलत हैं और दो समुदायों को आपस में भिड़ाने की मंशा रखते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में पठानों को निशाना बनाना तथ्यात्मक रूप से असंगत है।
क्षत्रिय परिषद ने बॉलीवुड पर क्या आरोप लगाए हैं?
क्षत्रिय परिषद का आरोप है कि बॉलीवुड 'तान्हाजी' और 'जोधा-अकबर' जैसी फिल्मों के ज़रिए दोहरा एजेंडा चलाता है — एक तरफ ऐतिहासिक किरदारों को विकृत रूप में पेश करता है, दूसरी तरफ क्षत्रिय-राजपूत पहचान का व्यावसायिक उपयोग करता है।
धर्मन बाई और बाबू कुंवर सिंह कौन थे?
बाबू कुंवर सिंह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायकों में से एक थे। धर्मन बाई — जिन्हें धरमन देवी या धरमन बीवी भी कहा जाता है — मुस्लिम समुदाय से आने वाली आरा की एक गायिका थीं, जिन्होंने बाबू कुंवर सिंह के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा और उन्हीं की गोद में वीरगति पाई।
राजा मानसिंह और पठानों का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
अभिषेक आनंद के अनुसार, राजा मानसिंह ने अफगानिस्तान के पठानों की पाँचों जनजातियों को पराजित किया था, जिसके बाद उन्होंने अपने ध्वज में पंचरंगा प्रतीक जोड़ा — जो पहले केवल कचनार का हुआ करता था। उनका कहना है कि यदि फिल्म में ऐतिहासिक संदर्भ देना था, तो इस किरदार का उपयोग उचित होता।
इस विवाद का 'चौहान' फिल्म पर क्या असर पड़ सकता है?
फिलहाल फिल्म निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद फिल्म की रिलीज़ से पहले और गहरा हो सकता है, खासकर यदि अन्य सामाजिक या राजनीतिक संगठन भी इसमें शामिल होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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