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चिरंजीवी की पहली क्रश थीं बायोलॉजी टीचर, कॉलेज में दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए

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चिरंजीवी की पहली क्रश थीं बायोलॉजी टीचर, कॉलेज में दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए

सारांश

पर्दे पर बेखौफ महानायक, लेकिन कॉलेज में दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं — चिरंजीवी ने खुद बताया कि उनकी पहली क्रश उनकी बायोलॉजी टीचर थीं। यह किस्सा उस इंसान की झलक देता है, जो 'कैदी' और 'इंद्रा' से पहले बस एक आम कॉलेज स्टूडेंट था।

मुख्य बातें

चिरंजीवी ने एक पॉडकास्ट में बताया कि कॉलेज के दिनों में उनकी पहली क्रश उनकी बायोलॉजी टीचर थीं।
उन्होंने कभी टीचर को अपनी भावनाएँ नहीं बताईं और न ही कोई लव लेटर लिखा।
चिरंजीवी का जन्म 22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश में हुआ; असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है।
1983 में 'कैदी' ने उनका करियर बदला; 2024 में पद्म विभूषण से सम्मानित।
माँ की सलाह पर रखा गया 'चिरंजीवी' नाम — जिसका अर्थ है अमर — उनकी सबसे बड़ी पहचान बना।

साउथ सिनेमा के महानायक चिरंजीवी — जिनका असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है — पर्दे पर भले ही बेखौफ एक्शन हीरो रहे हों, लेकिन कॉलेज के दिनों में वह एक बार अपने दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। एक पॉडकास्ट में उन्होंने खुद यह दिलचस्प किस्सा साझा किया — कि उनकी पहली क्रश कोई हमउम्र लड़की नहीं, बल्कि उनकी बायोलॉजी टीचर थीं।

कॉलेज का वह यादगार किस्सा

चिरंजीवी ने बताया कि कॉलेज के दौरान उन्हें बायोलॉजी विषय में गहरी रुचि थी। इसी दौरान उनकी बायोलॉजी टीचर उन्हें पसंद आने लगी थीं, जो उनकी पढ़ाई की तारीफ भी करती थीं। हालाँकि, उन्होंने कभी टीचर को अपनी भावनाएँ नहीं बताईं और न ही कोई लव लेटर लिखा। उन दिनों उनका ध्यान पढ़ाई, नाटक और अभिनय में लगा रहता था।

कौन हैं चिरंजीवी — पहचान और परिवार

22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश में जन्मे चिरंजीवी के पिता कोनिडेला वेंकट राव पुलिस विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई की और बाद में अभिनय का सपना उन्हें चेन्नई के मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट तक ले गया। उनके 'चिरंजीवी' नाम के पीछे भी एक भावुक कहानी है — परिवार भगवान हनुमान (अंजनेय) का भक्त था और उनकी माँ ने सुझाया कि वह इसी नाम से फिल्मों में आएँ। 'चिरंजीवी' का अर्थ है — अमर — और यह नाम भारतीय सिनेमा में उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया।

करियर की शुरुआत और बड़ी पहचान

चिरंजीवी ने 1978 में 'प्रणाम खरीदू' से फिल्मी करियर की विधिवत शुरुआत की, हालाँकि 'पुनाधिरल्लू' में वह पहले काम कर चुके थे — वह फिल्म बाद में रिलीज हुई। शुरुआती दौर में उन्होंने हीरो के साथ-साथ एंटी-हीरो और नकारात्मक किरदार भी निभाए। 1983 में आई 'कैदी' ने उनके करियर को नई दिशा दी और वह तेलुगु सिनेमा के शीर्ष सितारों में शामिल हो गए।

पुरस्कार और उपलब्धियाँ

'रुद्रवीणा', 'स्वयं कृषी', 'गैंग लीडर', 'घराना मोगुडु', 'इंद्रा', 'टैगोर' और 'शंकर दादा एमबीबीएस' जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों का चहेता बनाया। 'स्वयं कृषी' और 'इंद्रा' के लिए उन्हें नंदी पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि वह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ के भी कई बार विजेता रहे हैं।

वापसी और हालिया सफर

करीब एक दशक के फिल्मी विराम के बाद चिरंजीवी ने 2017 में 'कैदी नंबर 150' से शानदार वापसी की। इसके बाद 'सई रा नरसिम्हा रेड्डी', 'आचार्य', 'गॉडफादर' और 'वॉल्टेयर वीरय्या' में उनकी अदाकारी को सराहा गया। 2024 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया — यह उनके छह दशक लंबे सिनेमाई योगदान की आधिकारिक स्वीकृति थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि उसे छुपाते थे। एक पुलिसकर्मी के बेटे से पद्म विभूषण तक का सफर, और बीच में एक टीचर से अनकही मोहब्बत — यह कथा उनके व्यक्तित्व की उस परत को उजागर करती है जो फिल्मी चमक-दमक में अक्सर दब जाती है। मुख्यधारा की कवरेज उनके फिल्मी माइलस्टोन पर केंद्रित रहती है, जबकि यह 'आम इंसान वाला' पक्ष ही उन्हें पीढ़ियों से जोड़ता है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिरंजीवी की पहली क्रश कौन थीं?
चिरंजीवी ने एक पॉडकास्ट में बताया कि कॉलेज के दिनों में उनकी पहली क्रश उनकी बायोलॉजी टीचर थीं, जो उनकी पढ़ाई की तारीफ करती थीं। हालाँकि, उन्होंने कभी अपनी भावनाएँ ज़ाहिर नहीं कीं।
चिरंजीवी का असली नाम क्या है?
चिरंजीवी का असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है। 'चिरंजीवी' नाम उनकी माँ की सलाह पर रखा गया था, जिसका अर्थ है 'अमर'।
चिरंजीवी का फिल्मी करियर कब शुरू हुआ?
चिरंजीवी ने 1978 में 'प्रणाम खरीदू' से विधिवत फिल्मी करियर की शुरुआत की। 1983 में 'कैदी' की सफलता ने उन्हें तेलुगु सिनेमा का शीर्ष सितारा बना दिया।
चिरंजीवी को पद्म विभूषण कब मिला?
भारत सरकार ने 2024 में चिरंजीवी को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। यह उनके छह दशक लंबे सिनेमाई योगदान की मान्यता थी।
चिरंजीवी ने फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी कब की?
करीब एक दशक के विराम के बाद चिरंजीवी ने 2017 में 'कैदी नंबर 150' से वापसी की। इसके बाद 'गॉडफादर', 'वॉल्टेयर वीरय्या' और अन्य फिल्मों में नज़र आए।
राष्ट्र प्रेस
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