देवोलीना भट्टाचार्जी ने करवा चौथ मनाने वाली महिलाओं का बचाव किया, ट्रोल्स को सुनाई खरी बात
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने 29 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर करवा चौथ मनाने वाली महिलाओं का खुलकर समर्थन किया और इस पर्व को लेकर आलोचना करने वालों को कड़ा जवाब दिया। बंगाली और असमिया सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाली इस अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत आस्था और परंपराओं पर दूसरों को निर्णय सुनाने का कोई अधिकार नहीं है।
क्या था देवोलीना का संदेश
देवोलीना ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज करवा चौथ मना रही सभी खूबसूरत महिलाओं को शुभकामनाएं। मैंने कभी करवा चौथ का व्रत नहीं रखा है, क्योंकि बंगाली और असमिया संस्कृति में यह कोई परंपरा नहीं है। हो सकता है कि हमारे यहां हर तरह की रस्में न हों, लेकिन हम कई त्योहार पूरे दिल से मनाते हैं, तो फिर करवा चौथ क्यों नहीं?' उन्होंने यह भी माना कि उनका खुद भी इस व्रत को रखने का मन करता है, लेकिन बिना पानी के पूरा दिन बिताने का डर उन्हें रोकता है।
अभिनेत्री ने बताया कि वे हर सोमवार और कभी-कभी एकादशी का व्रत रखती हैं, लेकिन निर्जला व्रत उनके लिए अलग चुनौती है।
नारीवाद और पितृसत्ता की बहस पर पलटवार
देवोलीना ने त्योहार को 'पितृसत्ता' से जोड़कर देखने वालों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'मुझे सच में लगता है कि कई कपल के लिए यह प्यार जताने का एक तरीका है। मैंने महिलाओं को इसे खुशी-खुशी मनाते देखा है और आज तो कई पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखते हैं। फिर किसी और के जश्न में नारीवाद, पितृसत्ता और जजमेंट को क्यों लाना।' उनका यह बयान उन आलोचकों के जवाब में था जो सोशल मीडिया पर करवा चौथ को महिला-विरोधी परंपरा करार देते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि जब महिलाएं खुद के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग या कीटो डाइट अपनाती हैं, तो उस पर कोई सवाल नहीं उठाता — लेकिन पति के लिए व्रत रखने पर 'पितृसत्ता' का ठप्पा लगाना दोहरा मापदंड है।
पति शान मुकर्जी का ज़िक्र और निजी अनुभव
देवोलीना ने अपने पति शान मुकर्जी के साथ जुड़े एक भावुक अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि शान एक मुस्लिम परिवार से आते हैं, फिर भी हर करवा चौथ पर वे पूछते हैं कि क्या वे व्रत रखेंगी। अभिनेत्री ने बताया कि इस बार वे अपने बच्चे को स्तनपान करा रही हैं, इसलिए फिलहाल व्रत नहीं रख सकतीं, लेकिन अगले साल रखने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, 'पतियों को भी तो प्यार महसूस करने का हक है, है न?' — यह पंक्ति उनकी पोस्ट में सबसे अधिक चर्चित रही।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पैरवी
देवोलीना ने अपनी बात को इस तर्क से समेटा कि जब तक कोई परंपरा किसी पर थोपी नहीं जाती और व्यक्तिगत चुनाव पर आधारित है, तब तक उसे आलोचना का विषय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने लिखा, 'प्यार निजी होता है। परंपराएं निजी होती हैं। जश्न मनाना भी निजी होता है। लोगों को वह चुनने दें, जिससे उन्हें खुशी मिलती है।'
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और करवा चौथ को लेकर चल रही बहस में एक नया आयाम जोड़ गई। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस चर्चा का रुख किस ओर जाता है।