दिव्या दत्ता की सिफारिश से मिली अनूप सोनी को पहली पंजाबी फिल्म 'देस होया परदेस'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अनूप सोनी ने खुलासा किया है कि उनकी करीबी दोस्त और अभिनेत्री दिव्या दत्ता की एक सिफारिश ने उन्हें पंजाबी सिनेमा में पहला कदम रखने का मौका दिलाया। शुक्रवार, 12 जून को सोनी ने इंस्टाग्राम पर पंजाबी फिल्म 'देस होया परदेस' का एक दृश्य साझा करते हुए इस दिलचस्प किस्से का विस्तार से ज़िक्र किया।
कैसे मिला यह किरदार
अनूप सोनी ने बताया कि इस फिल्म के लिए पहले किसी अन्य अभिनेता को चुना गया था, लेकिन शूटिंग शुरू होने से कुछ दिन पहले उस अभिनेता का एक्सीडेंट हो गया। उस मुश्किल घड़ी में दिव्या दत्ता, जो पहले से फिल्म का हिस्सा थीं, ने निर्देशक मनोज पुंज के सामने अनूप सोनी का नाम सुझाया। पुंज ने उस सुझाव पर भरोसा जताया और कुछ ही दिनों में सोनी चंडीगढ़ के सेट पर पहुँच गए।
उन्हें फिल्म में एक लालची और नैतिक रूप से भ्रष्ट पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने को मिला — जो उनके तब तक के किरदारों से बिल्कुल अलग था।
दिव्या दत्ता के साथ भावनात्मक दृश्य
सोनी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि उन्होंने जो दृश्य साझा किया, वह दिव्या दत्ता के साथ था और वह दृश्य 'काफी गंभीर, असहज और भावनाओं से भरा हुआ था।' उन्होंने इसे अपने करियर के यादगार अनुभवों में से एक बताया।
गुरदास मान की सादगी ने छोड़ी गहरी छाप
अनूप सोनी ने यह भी बताया कि इस फिल्म की वजह से उन्हें दिग्गज गायक-अभिनेता गुरदास मान के साथ स्क्रीन साझा करने का अवसर मिला। उन्होंने लिखा कि मान की सादगी और विनम्रता ने उन पर गहरी छाप छोड़ी। इसके अलावा अभिनेत्री जूही चावला और फिल्म की पूरी टीम के साथ काम करने का अनुभव भी उनके लिए यादगार रहा।
फिल्म की पृष्ठभूमि
निर्देशक मनोज पुंज द्वारा निर्देशित 'देस होया परदेस' 1980 के दशक के अशांत पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित एक मार्मिक प्रेम और देशभक्ति की कहानी है। फिल्म में गुरदास मान, जूही चावला, दिव्या दत्ता और अनूप सोनी ने अभिनय किया था। यह फिल्म पंजाबी सिनेमा की उन कृतियों में गिनी जाती है जिन्होंने उस दौर की सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल को संवेदनशीलता से पर्दे पर उतारा।
अनूप सोनी का आभार
पोस्ट के अंत में सोनी ने लिखा कि आज पीछे मुड़कर देखते हुए वे दिव्या के सुझाव, मनोज पुंज के भरोसे और 'देस होया परदेस' का शुक्रिया अदा करते हैं, जिसने उन्हें पंजाबी सिनेमा का पहला अनुभव दिया। यह किस्सा इस बात की याद दिलाता है कि फ़िल्म इंडस्ट्री में कभी-कभी एक दोस्त का एक शब्द किसी के करियर की दिशा बदल सकता है।