दिव्येंदु का 'ग्लोरी' के बाद बड़ा बयान: जुनून और दीवानगी में कोई फर्क नहीं, शब्दों का हल्का इस्तेमाल गलत
सारांश
मुख्य बातें
नेटफ्लिक्स की बॉक्सिंग क्राइम ड्रामा वेब सीरीज 'ग्लोरी' की सफलता के बाद अभिनेता दिव्येंदु ने 14 मई को मुंबई में एक बातचीत के दौरान जुनून, दीवानगी और सब्र जैसे शब्दों के वास्तविक अर्थ पर अपने विचार खुलकर साझा किए। उनका मानना है कि इन शब्दों को लोग बेहद हल्के ढंग से इस्तेमाल करते हैं, जबकि इनके पीछे एक गहरी और टिकाऊ भावना होनी चाहिए।
जुनून और दीवानगी — दिव्येंदु की नज़र में
अभिनेता दिव्येंदु ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मुझे पागलपन की हद तक जुनूनी होने और दीवाना होने के बीच कोई फर्क नजर नहीं आता। ये दोनों एक ही बात हैं।' उनके अनुसार, किसी भी काम के प्रति सच्ची लगन तभी मानी जा सकती है जब वह क्षणिक न हो, बल्कि लंबे समय तक बनी रहे।
किरदार में उतरने की प्रक्रिया
दिव्येंदु ने बताया कि किसी भी किरदार को निभाते वक्त वे पूरी दीवानगी के साथ उसकी गहराई में उतर जाते हैं। लेकिन साथ ही उन्हें एक आंतरिक संतुलन भी बनाए रखना पड़ता है, ताकि वे किसी चीज़ को लेकर हद से ज्यादा न सोचें। उनके अनुसार यह यात्रा 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी मैराथन है — जिसमें धैर्य सबसे बड़ा हथियार है।
एक्टर की यात्रा में सब्र की अहमियत
दिव्येंदु ने कहा, 'एक एक्टर होने के नाते आपको इस पूरी यात्रा के लिए सब्र की जरूरत पड़ती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन शब्दों का अर्थ हर पेशे में अलग होता है — एक खिलाड़ी इन्हें अपने नज़रिए से देखता है, जबकि एक कलाकार का अनुभव सर्वथा भिन्न होता है।
शब्दों के हल्के इस्तेमाल पर चिंता
अभिनेता ने 'दीवाना' शब्द के सतही उपयोग पर विशेष टिप्पणी की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, 'आजकल लोग कहते हैं कि वे किसी शो के दीवाने हैं, छह-सात एपिसोड देखते हैं और फिर उनका मन भर जाता है। वे तुरंत नया शो या नया ट्रेंड ढूंढने लगते हैं।' उनका मानना है कि ऐसे गहरे शब्दों का इस्तेमाल इतनी आसानी से नहीं होना चाहिए।
'ग्लोरी' की सफलता और आगे की राह
नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही 'ग्लोरी' की सफलता से उत्साहित दिव्येंदु इस वक्त अपने करियर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं। उनके ये विचार न केवल अभिनय की दुनिया, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में गहरी प्रेरणा देते हैं — और यह संदेश देते हैं कि असली जुनून वही है जो समय की कसौटी पर खरा उतरे।