फिल्म 'धुरंधर 2' में अतीक अहमद के किरदार पर नेताओं में विवाद, रुचि वीरा ने बचाव किया
सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'धुरंधर 2' में अतीक अहमद का किरदार विवाद का विषय बना हुआ है।
- राजनीतिक नेताओं में फिल्म को लेकर विभाजन है।
- कुछ नेता इसे समाज की सच्चाई मानते हैं, जबकि अन्य इसे प्रोपेगेंडा कहते हैं।
- सेंसर बोर्ड की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है।
- फिल्म के दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘धुरंधर 2’ में गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद के किरदार और उनके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंधों को दर्शाने के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस फिल्म पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं, जबकि कुछ नेता इस फिल्म से जुड़े सवालों से बचते हुए नजर आ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस ने समाजवादी पार्टी की मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा से जब इस मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होंने सीधे तौर पर प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। उन्होंने सबसे पहले देशवासियों को आगामी ईद की शुभकामनाएं दीं और जब फिल्म के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'आज खुशी और त्योहार की बात करनी चाहिए। मुझे इस फिल्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है।' इसके बाद उन्होंने कैमरे से बचते हुए कार में बैठने का प्रयास किया।
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने इस फिल्म के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा, 'फिल्में समाज में घटित घटनाओं को ही दर्शाती हैं और लोगों के सामने सच्चाई पेश करती हैं। मैं अतीक अहमद को संसद के समय से जानता था और उन्हें करीब से देखा है। अगर फिल्म में उनकी कहानी दिखाई जा रही है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, यहां तक कि इसके टिकट ब्लैक में भी बिक रहे हैं। मैं फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और कलाकारों को शुभकामनाएं देता हूं।'
वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने इस फिल्म की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की फिल्में राजनीतिक प्रोपेगेंडा का हिस्सा होती हैं। उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के पास एक ऐसी मशीनरी है, जो अपनी मनगढ़ंत कहानियों के आधार पर फिल्में बनवाती है। फिल्मों के जरिए लोगों के मन में एक विशेष छवि बनाने की कोशिश की जाती है।'
जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मामले पर संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'मैं फिल्में नहीं देखता, लेकिन अब यह सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह तय करे कि क्या दिखाना सही है और क्या नहीं। अगर फिल्म नियमों के तहत बनाई गई है, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर किसी अपराध से जुड़े व्यक्ति को महिमामंडित किया जाता है, तो यह समाज के लिए गलत संदेश दे सकता है।'
शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, 'यह बहस का हिस्सा हो सकती है कि फिल्म प्रोपेगेंडा है या नहीं, लेकिन बॉलीवुड का मुख्य उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना है। ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए जिससे विवाद पैदा हो या किसी की भावनाएं आहत हों।'
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'फिल्में सरकार नहीं बनाती, बल्कि फिल्ममेकर बनाते हैं। फिल्म बनाने वाले वही दिखाते हैं जो उन्हें लगता है कि दर्शकों को पसंद आएगा और फिल्म सफल होगी।'