'ओहदियां खेदां' के साथ हंस राज हंस की 12 साल बाद संगीत में वापसी, दोस्त संजीव आनंद बने प्रेरणा
सारांश
मुख्य बातें
लोकप्रिय गायक और पूर्व सांसद हंस राज हंस ने 12 से 13 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने नए गाने 'ओहदियां खेदां' के साथ संगीत की दुनिया में शानदार वापसी की है। 4 जुलाई को उन्होंने बताया कि राजनीति में व्यस्तता के चलते गायन से दूरी बन गई थी, लेकिन दोस्त संजीव आनंद के आग्रह ने उन्हें एक बार फिर माइक थामने पर मजबूर किया।
राजनीति ने छुड़ाया संगीत से नाता
हंस राज हंस ने बताया कि शोबिज छोड़कर राजनीति की राह चुनने के बाद उनका ध्यान गायन से पूरी तरह हट गया। उन्होंने कहा, 'मैंने शोबिज छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना, जिसे मैं समाज और देश की सेवा मानता हूं। इसी वजह से मेरे गायन में 12-13 साल का लंबा अंतर आ गया।' यह ऐसे समय में आया है जब कई कलाकार राजनीति और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हंस राज हंस ने दोनों को एक-एक कर चुना।
दोस्त की एक बात ने बदल दिया फैसला
हंस राज हंस के अनुसार, वे सेवानिवृत्ति के बारे में सोच रहे थे, तभी उनके मित्र संजीव आनंद ने उन्हें बताया कि श्रोता आज भी उनकी आवाज़ सुनना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'फिर मैंने सोचा कि अब मुझे अपने सभी कामों से रिटायर हो जाना चाहिए, लेकिन मेरे दोस्त संजीव आनंद ने कहा कि लोग आज भी मेरे गाने सुनना चाहते हैं।' इसी प्रेरणा से उन्होंने 'ओहदियां खेदां' रिलीज करने का निर्णय लिया।
गाने की टीम और संगीत
नए गाने 'ओहदियां खेदां' के बोल संजीव आनंद ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत अमदाद अली ने तैयार किया है। यह गाना 'आनंद रिकॉर्ड्स' के बैनर तले रिलीज हुआ है। हंस राज हंस ने बताया कि यह गाना सीधे तौर पर आध्यात्मिक नहीं है, लेकिन इसके बोल जीवन की गहरी सोच और अनुभवों को बयां करते हैं — और सुनते समय एक अलग तरह का आध्यात्मिक एहसास भी होता है।
हंस राज हंस का सफर — संगीत से राजनीति तक
हंस राज हंस 'दिल तोते-तोते हो गया', 'दिल चोरी साडा हो गया', 'नित खैर मंगा' और 'सिली-सिली हवा' जैसे कालजयी गानों के लिए पहचाने जाते हैं। राजनीतिक सफर में वे शिरोमणि अकाली दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर पंजाब की जालंधर सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में वे सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। गौरतलब है कि यह उनकी पहली बड़ी संगीत परियोजना है जो उनके राजनीतिक जीवन के बाद आई है।
आगे क्या
हंस राज हंस ने संकेत दिए हैं कि यह वापसी केवल एक गाने तक सीमित नहीं रहेगी। उनके श्रोता, जो वर्षों से उनकी आवाज़ के इंतजार में थे, इस कमबैक को उत्साह के साथ देख रहे हैं। 'ओहदियां खेदां' की सफलता यह तय करेगी कि संगीत की दुनिया में उनकी यह वापसी कितनी लंबी और मजबूत होती है।