हेमा मालिनी को 'ड्रीम गर्ल' नाम कैसे मिला? निर्माता की उस चतुर रणनीति का किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी को दशकों से 'ड्रीम गर्ल' के नाम से जाना जाता है — लेकिन यह पहचान उन्हें उनकी 1977 की चर्चित फिल्म से नहीं, बल्कि उससे भी पहले, उनकी पहली हिंदी फिल्म की रिलीज़ से पहले ही मिल गई थी। यह किस्सा खुद हेमा मालिनी ने कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो 'द कपिल शर्मा शो' में सुनाया था।
निर्माता की अनोखी मार्केटिंग रणनीति
हेमा मालिनी ने बताया कि जब उनकी पहली हिंदी फिल्म 'सपनों का सौदागर' रिलीज़ होने वाली थी, तब फिल्म के निर्माता बी. आनंदस्वामी ने प्रमोशन के लिए एक असाधारण तरीका अपनाया। उन्होंने हर जगह 'ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन' लिखवाना शुरू कर दिया — कहीं भी अभिनेत्री का नाम नहीं था।
हेमा मालिनी के अनुसार, 'मैंने निर्माता से सवाल किया कि मेरा नाम क्यों नहीं दिख रहा, तो उन्होंने कहा — यही तुम्हारी नई पहचान बनने वाली है। पहले लोगों के बीच 'ड्रीम गर्ल' का नाम लोकप्रिय होगा, और बाद में बताया जाएगा कि यह 'ड्रीम गर्ल' आखिर है कौन।' निर्माता की यह योजना सफल रही और देखते ही देखते लोग उन्हें इसी नाम से पहचानने लगे।
'सपनों का सौदागर' — पहली फिल्म, पहली पहचान
1968 में रिलीज़ हुई 'सपनों का सौदागर' हेमा मालिनी की पहली हिंदी फिल्म थी। इसका निर्देशन महेश कौल ने किया था। फिल्म में उनके साथ हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कपूर मुख्य भूमिका में थे, और संगीत मशहूर जोड़ी शंकर-जयकिशन ने दिया था। इसी फिल्म से हेमा मालिनी ने बॉलीवुड में कदम रखा और आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई।
नौ साल बाद आई असली 'ड्रीम गर्ल' फिल्म
गौरतलब है कि करीब नौ साल बाद, 1977 में, हेमा मालिनी ने 'ड्रीम गर्ल' शीर्षक वाली फिल्म में भी मुख्य भूमिका निभाई। इसका निर्देशन प्रमोद चक्रवर्ती ने किया था। फिल्म में अशोक कुमार, धर्मेंद्र और प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकार भी थे।
फिल्म की कहानी एक ऐसी युवती की थी जो अनाथालय चलाने के लिए अलग-अलग रूप धारण कर पैसे जुटाती है। हेमा मालिनी ने इस फिल्म में सपना, पद्मा, चंपाबाई, ड्रीम गर्ल और राजकुमारी — पाँच अलग-अलग किरदार निभाए, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
एक नाम, दो कहानियाँ
यह ऐसे समय में दिलचस्प है जब बॉलीवुड में स्टार-ब्रांडिंग अब डिजिटल मार्केटिंग टीमों का काम बन चुकी है। हेमा मालिनी का किस्सा बताता है कि दशकों पहले भी निर्माता 'मिस्ट्री मार्केटिंग' की ताकत समझते थे — बिना नाम के पहचान बनाने की कला। आज भी 'ड्रीम गर्ल' उनकी सबसे स्थायी पहचान बनी हुई है।