OTT बनाम सिनेमाघर 2026: बॉक्स ऑफिस पर बंटी राय, 'धुरंधर' और 'बॉर्डर 2' ने बचाई लाज
सारांश
मुख्य बातें
साल 2026 के पहले छह महीने पूरे होते ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सामने एक अहम सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है — क्या दर्शक अब भी सिनेमाघरों की ओर उसी उत्साह से आ रहे हैं, या OTT प्लेटफॉर्म ने उनकी देखने की आदतें बदल दी हैं? इस सवाल पर देश के दो अनुभवी सिनेमाघर संचालकों की राय एकदम अलग-अलग है — एक में चिंता है, दूसरे में संतोष।
मुंबई से चिंता की आवाज़
मुंबई के ऐतिहासिक गेयटी गैलेक्सी सिनेमाघर के मालिक मनोज देसाई ने पहले छह महीनों के प्रदर्शन को निराशाजनक बताया। उनके अनुसार, 'धुरंधर' और 'बॉर्डर 2' जैसी कुछ फिल्मों को छोड़ दें तो अधिकांश हिंदी फिल्में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रहीं।
देसाई ने कहा, 'ओटीटी के बढ़ते प्रभाव ने सिनेमाघरों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पहले कोई सफल फिल्म कई हफ्ते तक लगातार चलती थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अगर कोई फिल्म केवल एक हफ्ते तक भी अच्छा कारोबार कर ले, तो सिनेमाघर संचालक राहत की सांस लेते हैं।' यह बदलाव, उनके मुताबिक, पूरे कारोबार की तस्वीर बदल चुका है।
उन्होंने अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' का उदाहरण देते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म दर्शकों को लंबे समय तक बांधे नहीं रख सकी। उनका मानना है कि 'केवल बड़े नाम या ज्यादा कलाकार किसी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं होते।'
कहानी और संगीत ही असली सितारे
देसाई ने स्पष्ट किया कि आज के दर्शक कलाकार के नाम पर नहीं, बल्कि कहानी की ताज़गी पर टिकट खरीदते हैं। उनके अनुसार, 'आज लोग वही फिल्म देखना चाहते हैं जिसकी कहानी उन्हें नई लगती है। किसी फिल्म का संगीत भी उसकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है — अच्छे गाने दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाते हैं।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुंबई जैसे शहर में भी कई बार साउथ इंडियन फिल्में हिंदी फिल्मों से बेहतर कारोबार कर रही हैं। 'दर्शक भाषा नहीं, बल्कि अच्छी कहानी और बेहतर प्रस्तुति को महत्व दे रहे हैं' — यह टिप्पणी हिंदी फिल्म निर्माताओं के लिए एक सीधा संदेश है।
पूर्णिया से संतोष की तस्वीर
वहीं बिहार के पूर्णिया के सिनेमाघर संचालक अभिषेक चौहान ने पहले छह महीनों के कारोबार को संतोषजनक बताया। उनके अनुसार 'धुरंधर', 'बॉर्डर 2', 'भूत बंगला' और 'वेलकम टू द जंगल' जैसी फिल्मों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अच्छा प्रदर्शन किया।
चौहान ने कहा, 'फिल्म निर्माता अब फिर से ऐसी कहानियों की ओर लौट रहे हैं जो पूरे देश के दर्शकों से जुड़ सकें। कुछ समय पहले फिल्मों का ध्यान केवल बड़े शहरों पर था, लेकिन अब निर्माता आम लोगों के जीवन और सरल विषयों को अपनी फिल्मों में जगह दे रहे हैं।' यह बदलाव टियर-2 और टियर-3 शहरों में बॉक्स ऑफिस को मज़बूत कर रहा है।
हैरानी और उम्मीद — 'हॉन्टेड' से सबक
अभिषेक चौहान के लिए इस अवधि की सबसे बड़ी हैरानी फिल्म 'हॉन्टेड' की सफलता रही। दूसरी ओर, निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की शुरुआती रफ्तार धीमी रही, जिसे चौहान ने इस तथ्य से जोड़ा कि यह फिल्म मुख्य रूप से बड़े शहरों के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।
गौरतलब है कि दोनों संचालकों की राय में एक साझा सूत्र है — अच्छी और मनोरंजक कहानी के लिए दर्शक आज भी सिनेमाघरों तक पहुँचने को तैयार हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब OTT प्लेटफॉर्म की संख्या और उनकी सामग्री दोनों तेज़ी से बढ़ रही हैं। आने वाले छह महीनों में रिलीज़ होने वाली बड़ी हिंदी फिल्में यह तय करेंगी कि 2026 का पूरा साल इंडस्ट्री के लिए राहत लेकर आता है या चुनौती बनकर रहता है।