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जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण की लीलाओं पर बनी 5 फिल्में जो इस पर्व को बनाएंगी खास

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जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण की लीलाओं पर बनी 5 फिल्में जो इस पर्व को बनाएंगी खास

सारांश

जन्माष्टमी पर सिर्फ पूजा-अर्चना नहीं — पर्दे पर भी कृष्ण-लीला का आनंद लें। 1918 की दादा साहेब फाल्के की ऐतिहासिक साइलेंट फिल्म से लेकर 2007 की एनिमेशन तक, ये पाँच फिल्में इस पावन पर्व को परिवार के साथ और भी खास बना सकती हैं।

मुख्य बातें

दादा साहेब फाल्के ने 1918 में 'श्री कृष्ण जन्म' बनाई थी — भारतीय सिनेमा की पहली कृष्ण-केंद्रित साइलेंट फिल्म, जो करीब 12 मिनट की थी।
निर्देशक राजीव चिलाका ने 2006-2007 के बीच तीन एनिमेशन फिल्में बनाईं — 'कृष्णा द बर्थ' , 'कृष्ण इन वृंदावन' और 'कृष्णा कंस वध' ।
'कृष्णा कंस वध' की अवधि करीब 69 मिनट है और इसमें कंस के साथ अंतिम संघर्ष को दर्शाया गया है।
'श्री कृष्ण लीला' (1971) का निर्देशन होमी वाडिया ने किया था; इसमें सचिन , जयश्री गाडकर और तबस्सुम जैसे कलाकार थे।
एनिमेशन फिल्में छोटे बच्चों के लिए और 'श्री कृष्ण लीला' बड़े दर्शकों के लिए उपयुक्त विकल्प हैं।

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं को बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव इस त्योहार को और भी यादगार बना सकता है। भारतीय सिनेमा में करीब एक सदी पहले से कृष्ण के जीवन पर फिल्में बनती आई हैं — उनके जन्म की कहानी से लेकर बाल-लीलाओं, सुदामा-मित्रता और कंस-वध तक। इस जन्माष्टमी पर परिवार के साथ इन पाँच फिल्मों का आनंद लिया जा सकता है।

भारतीय सिनेमा और कृष्ण-कथा का शताब्दी-पुराना नाता

भारतीय फिल्म उद्योग में कृष्ण-कथाओं का चित्रण उतना ही पुराना है जितना खुद हिंदी सिनेमा। दादा साहेब फाल्के ने 1918 में ही भगवान कृष्ण के जन्म पर साइलेंट फिल्म बनाकर इस परंपरा की नींव रखी थी। इसके बाद के दशकों में एनिमेशन से लेकर लाइव-एक्शन तक कई फिल्मकारों ने कृष्ण के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को पर्दे पर उतारा।

मुख्य फिल्में और उनकी विशेषताएँ

'श्री कृष्ण जन्म' (1918) — यह भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक धरोहर है। दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्देशित और लिखित इस साइलेंट फिल्म में कृष्ण के जन्म की कहानी को करीब 12 मिनट में दर्शाया गया था। फाल्के की पुत्री मंदाकिनी फाल्के ने कृष्ण का किरदार निभाया, जबकि डी.डी. दाबके और पुरुषोत्तम वैद्य भी इसमें नज़र आए। संवाद-रहित उस दौर की शैली में कहानी को दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था।

'कृष्णा द बर्थ' (2006) — निर्देशक राजीव चिलाका की यह एनिमेशन फिल्म बच्चों और परिवार के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। फिल्म की कहानी देवकी और वासुदेव के पुत्र कृष्ण के जन्म से शुरू होती है। कंस को भविष्यवाणी मिलती है कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा, जिसके बाद वह दोनों को कारागार में डाल देता है। कृष्ण के जन्म के पश्चात वासुदेव उन्हें गोकुल पहुँचाते हैं, जहाँ उनका लालन-पालन होता है। फिल्म में अमरकांत दुबे, अभय कुमार, जॉयदीप मुखर्जी, रमेश राय और दिलीप सिन्हा ने आवाज़ दी।

'कृष्ण इन वृंदावन' (2007)राजीव चिलाका द्वारा ही निर्देशित यह एनिमेशन फिल्म कृष्ण और उनके साथियों की वृंदावन-जीवन पर केंद्रित है। कहानी में कृष्ण और बलराम अनेक खतरनाक राक्षसों का सामना करते हैं। बाल कृष्ण की शरारतों के साथ-साथ उनके अदम्य साहस को रोमांचक ढंग से पेश किया गया है। इसमें अमरकांत दुबे, अभय कुमार, आशीष दवे और बेबी अनुष्का दुबे की आवाज़ें शामिल हैं।

'श्री कृष्ण लीला' (1971) — निर्देशक होमी वाडिया की इस क्लासिक फिल्म में कृष्ण के जन्म से लेकर मथुरा पहुँचने और कंस के साथ अंतिम मुकाबले तक की संपूर्ण कथा को दर्शाया गया है। फिल्म में सचिन, हीना, जयश्री गाडकर, सप्प्रू, मनहर देसाई और तबस्सुम जैसे कलाकारों ने अभिनय किया।

'कृष्णा कंस वध' (2007)राजीव चिलाका निर्देशित इस एनिमेशन फिल्म की अवधि करीब 69 मिनट है। इसमें कृष्ण और बलराम को कंस द्वारा मथुरा बुलाया जाता है, जहाँ उनका सामना राज्य के शक्तिशाली पहलवानों से होता है और कहानी कंस के साथ निर्णायक संघर्ष पर समाप्त होती है। फिल्म में आशीष दवे, अमरकांत दुबे, बेबी अनुष्का दुबे, अभय कुमार और अरुण शेखर की आवाज़ें हैं।

किस उम्र के दर्शकों के लिए कौन-सी फिल्म

एनिमेशन फिल्में — 'कृष्णा द बर्थ', 'कृष्ण इन वृंदावन' और 'कृष्णा कंस वध' — छोटे बच्चों और परिवार के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। वहीं 'श्री कृष्ण लीला' बड़े दर्शकों के लिए एक क्लासिक अनुभव प्रदान करती है। 'श्री कृष्ण जन्म' सिनेमा-इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक दुर्लभ दस्तावेज़ है।

जन्माष्टमी पर सिनेमा का महत्व

गौरतलब है कि धार्मिक और पौराणिक विषयों पर बनी फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पुराण-कथाओं से जोड़ने का माध्यम भी बनती हैं। इस जन्माष्टमी पर इन फिल्मों के ज़रिए भगवान कृष्ण की लीलाओं को घर बैठे परिवार के साथ अनुभव किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उल्लेखनीय है कि कृष्ण-कथा पर सबसे सुलभ और परिवार-अनुकूल फिल्में अभी भी दो दशक पुरानी एनिमेशन हैं। ओटीटी के इस युग में जब धार्मिक कंटेंट की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, नई और उच्च-गुणवत्ता वाली कृष्ण-केंद्रित फिल्मों की स्पष्ट कमी दिखती है। दादा साहेब फाल्के से राजीव चिलाका तक की यात्रा यह भी बताती है कि पौराणिक विषयों पर सिनेमा बनाना हमेशा व्यावसायिक जोखिम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दायित्व भी रहा है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी पर परिवार के साथ देखने के लिए कौन-सी कृष्ण फिल्में सबसे अच्छी हैं?
जन्माष्टमी पर परिवार के साथ देखने के लिए 'कृष्णा द बर्थ' (2006), 'कृष्ण इन वृंदावन' (2007) और 'कृष्णा कंस वध' (2007) जैसी एनिमेशन फिल्में सर्वोत्तम हैं। ये तीनों फिल्में राजीव चिलाका ने निर्देशित की हैं और बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं।
दादा साहेब फाल्के ने कृष्ण पर कौन-सी फिल्म बनाई थी?
'श्री कृष्ण जन्म' — 1918 में दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्मित और निर्देशित यह साइलेंट फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती धरोहरों में से एक है। करीब 12 मिनट की इस फिल्म में फाल्के की पुत्री मंदाकिनी फाल्के ने कृष्ण का किरदार निभाया था।
'श्री कृष्ण लीला' फिल्म में कौन-से कलाकार थे?
1971 में होमी वाडिया द्वारा निर्देशित 'श्री कृष्ण लीला' में सचिन, हीना, जयश्री गाडकर, सप्प्रू, मनहर देसाई और तबस्सुम जैसे कलाकार नज़र आए थे। फिल्म में कृष्ण के जन्म से लेकर कंस-वध तक की पूरी कथा दिखाई गई है।
'कृष्णा कंस वध' एनिमेशन फिल्म की कहानी क्या है?
'कृष्णा कंस वध' (2007) में कृष्ण और बलराम को कंस द्वारा मथुरा बुलाया जाता है, जहाँ उनका सामना शक्तिशाली पहलवानों से होता है और अंततः कंस के साथ निर्णायक युद्ध होता है। राजीव चिलाका निर्देशित इस फिल्म की अवधि करीब 69 मिनट है।
जन्माष्टमी पर छोटे बच्चों के लिए कौन-सी कृष्ण फिल्म देखें?
छोटे बच्चों के लिए 'कृष्ण इन वृंदावन' (2007) एक बेहतरीन विकल्प है, जिसमें बाल कृष्ण की शरारतें और साहसिक कारनामे रोमांचक एनिमेशन के ज़रिए दिखाए गए हैं। 'कृष्णा द बर्थ' (2006) भी बच्चों के लिए उतनी ही उपयुक्त और आसान भाषा में बनी फिल्म है।
राष्ट्र प्रेस
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