जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि: सोनापुर में उमड़ा जनसैलाब, गायक शान ने नया गाना किया समर्पित
सारांश
मुख्य बातें
असमिया संगीत के अप्रतिम सितारे जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि पर 19 सितंबर 2026 को गुवाहाटी के बाहरी इलाके सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में सैकड़ों प्रशंसक, परिजन और कलाकार एकत्रित हुए। यही वह स्थान है जहाँ पिछले वर्ष दिवंगत गायक का अंतिम संस्कार किया गया था। श्रद्धालुओं ने उनके प्रिय गीत गाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी।
तीन दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन
असम सरकार के सांस्कृतिक विभाग ने इस अवसर पर तीन दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया है। गुरुवार की सुबह प्रार्थना सभा से कार्यक्रम का आरंभ हुआ, जिसके बाद दोपहर में 'नाम-प्रसंग' का आयोजन हुआ — जो असमिया वैष्णव परंपरा में भक्ति संगीत का एक महत्त्वपूर्ण स्वरूप है। दूसरे दिन विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ निर्धारित हैं, जबकि अंतिम दिन भागवत पाठ और असम की परंपरागत वैष्णव नाट्य-शैली भाओना का मंचन होगा।
शान ने नया गाना किया समर्पित
बॉलीवुड गायक शान ने अपने करीबी मित्र और असमिया संगीत के प्रतीक जुबीन गर्ग को उनकी पहली बरसी पर एक नया गाना समर्पित किया। शान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जुबीन के दृश्यों वाला एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा — 'जुबीन अमर रहें, वो सबका अपना और हमेशा रहेगा।' यह ट्रिब्यूट गाना शान ने गायिका महालक्ष्मी के साथ मिलकर रिकॉर्ड किया है।
जुबीन गर्ग का निधन कैसे हुआ था
जुबीन गर्ग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में प्रस्तुति देने के लिए सिंगापुर गए थे। 20 सितंबर को उनका प्रदर्शन निर्धारित था, परंतु उससे एक दिन पहले लेजरस आइलैंड के समीप तैराकी के दौरान उनका दुखद निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन ने पूरे उत्तर-पूर्व भारत को शोक में डुबो दिया था और असमिया संगीत जगत ने एक अपूरणीय क्षति महसूस की।
व्यवस्था और अनुशासन की अपील
भारी भीड़ को देखते हुए असम सरकार ने जुबीन क्षेत्र में सुविधाओं का प्रबंध किया है। आयोजकों ने उपस्थित प्रशंसकों और श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे पूरे समारोह के दौरान अनुशासन बनाए रखें और शांतिपूर्वक भाग लें। गौरतलब है कि असम की सांस्कृतिक पहचान में जुबीन के असाधारण योगदान को याद करने के लिए राज्यभर से बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी, जो सच साबित हुई।
जुबीन गर्ग की विरासत
जुबीन गर्ग न केवल असमिया संगीत के बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत के लोकप्रिय सांस्कृतिक दूत थे। उनके गीतों ने असमिया लोकसंगीत, भक्ति और आधुनिक पॉप को जोड़ते हुए एक विशाल श्रोता वर्ग तैयार किया। उनकी पहली पुण्यतिथि पर यह उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि उनकी आवाज़ और भावनाएँ आज भी लाखों दिलों में जीवित हैं।