19 सितंबर 2026
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जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि: हिमंत सरमा बोले 'मिस यू जुबीन', सोनापुर में तीन दिवसीय 'जुबीन दिवस' शुरू

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जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि: हिमंत सरमा बोले 'मिस यू जुबीन', सोनापुर में तीन दिवसीय 'जुबीन दिवस' शुरू

सारांश

एक साल बाद भी जुबीन गर्ग की आवाज़ असम के दिलों में गूँजती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के 'मिस यू जुबीन' से लेकर सोनापुर में हज़ारों प्रशंसकों के जुटने तक — 'प्राणोर शिल्पी' की पहली पुण्यतिथि यह साबित करती है कि असमिया संस्कृति के इस सितारे की विरासत अजर-अमर है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 19 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर जुबीन गर्ग की तस्वीरें साझा कर लिखा — 'जुबीन, तुम्हारी याद आती है।' जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लैजरस द्वीप के पास तैरते समय हुआ था।
सोनापुर के जुबीन क्षेत्र में तीन दिवसीय 'जुबीन दिवस' का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ उनकी समाधि है।
कार्यक्रम में नाम-प्रसंग , सांस्कृतिक संध्या, भागवत पाठ और भओना नाट्य परंपरा शामिल है।
असम सरकार ने स्मारक स्थल पर भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं के लिए सहयोग किया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को असमिया संगीत के दिग्गज जुबीन गर्ग को उनकी पहली पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सरमा ने सोशल मीडिया पर गर्ग के साथ दो तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'जुबीन, तुम्हारी याद आती है।' गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में लैजरस द्वीप के निकट तैरते समय हुआ था, और उनके जाने से पूरे असम में शोक की लहर दौड़ गई थी।

पुण्यतिथि और जुबीन दिवस का आयोजन

गर्ग की याद में सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र — जहाँ उनकी समाधि है — पर तीन दिवसीय 'जुबीन दिवस' का आयोजन किया जा रहा है। स्मारक स्थल को ताज़े फूलों और पारंपरिक गमोसा से सजाया गया है। हज़ारों प्रशंसकों के यहाँ पहुँचकर श्रद्धांजलि देने की उम्मीद है।

आयोजन की शुरुआत गुरुवार की सुबह प्रार्थना से हुई, जिसके बाद दोपहर में 'नाम-प्रसंग' का कार्यक्रम रखा गया। दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्धारित हैं, जबकि अंतिम दिन भागवत पाठ और असम की प्राचीन नाट्य परंपरा भओना का आयोजन होगा — जो गर्ग की विरासत को असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ता है।

दुखद परिस्थितियाँ: परफॉर्मेंस से एक दिन पहले हुई थी त्रासदी

गौरतलब है कि जुबीन गर्ग 20 सितंबर 2025 को नॉर्थ ईस्ट इंटरनेशनल फेस्टिवल में प्रस्तुति देने वाले थे — लेकिन उससे एक दिन पहले ही लैजरस द्वीप के पास तैरते समय उनका निधन हो गया। यह त्रासदी असमिया संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बन गई।

सरकार और प्रशंसकों की भागीदारी

असम सरकार ने तीन दिवसीय आयोजन के दौरान स्मारक स्थल पर व्यवस्थाओं में सहयोग दिया है, ताकि बड़ी संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं और प्रशंसकों को कोई असुविधा न हो। आयोजकों ने सभी आगंतुकों से अपील की है कि वे पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन बनाए रखें और शांतिपूर्ण ढंग से भाग लें।

जुबीन गर्ग की अमिट विरासत

अपने प्रशंसकों के बीच 'प्राणोर शिल्पी' (दिल के कलाकार) के नाम से मशहूर जुबीन गर्ग का असमिया संगीत और सिनेमा जगत में एक विशेष स्थान था। उनके सुरों ने न केवल असम, बल्कि देश-विदेश में बसे असमिया समुदाय के दिलों को छुआ। जुबीन क्षेत्र में उनकी समाधि अब एक ऐसे तीर्थ-स्थल का रूप ले रही है, जहाँ उनकी कलात्मक विरासत और सांस्कृतिक योगदान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी याद किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उनकी असामयिक मृत्यु ने यह रेखांकित किया कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक आइकॉन की अनुपस्थिति एक समूचे समाज को कितना प्रभावित करती है। सवाल यह है कि क्या यह स्मृति-उत्सव केवल भावनात्मक श्रद्धांजलि तक सीमित रहेगा, या असमिया लोक संगीत और उभरते कलाकारों के लिए दीर्घकालिक सांस्कृतिक नीति का आधार बनेगा।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुबीन गर्ग का निधन कब और कैसे हुआ?
जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लैजरस द्वीप के पास तैरते समय हुआ था। वे अगले दिन नॉर्थ ईस्ट इंटरनेशनल फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले थे।
'जुबीन दिवस' क्या है और कहाँ मनाया जा रहा है?
'जुबीन दिवस' असम के सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में आयोजित तीन दिवसीय स्मृति-उत्सव है, जहाँ गायक की समाधि है। इसमें नाम-प्रसंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भागवत पाठ और भओना नाट्य परंपरा शामिल है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जुबीन गर्ग को कैसे याद किया?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 19 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर जुबीन गर्ग के साथ दो तस्वीरें साझा कीं और लिखा — 'जुबीन, तुम्हारी याद आती है।'
जुबीन गर्ग को 'प्राणोर शिल्पी' क्यों कहा जाता था?
'प्राणोर शिल्पी' का अर्थ है 'दिल के कलाकार'। यह उपाधि असमिया प्रशंसकों ने उन्हें उनके संगीत और सिनेमा के ज़रिये लोगों के दिलों से किए गहरे जुड़ाव के कारण दी थी।
पुण्यतिथि आयोजन में असम सरकार की क्या भूमिका है?
असम सरकार ने जुबीन क्षेत्र में तीन दिवसीय आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन में सहयोग दिया है, ताकि हज़ारों श्रद्धालु और प्रशंसक सुचारु रूप से श्रद्धांजलि दे सकें।
राष्ट्र प्रेस
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