कंगना रनौत का सवाल: वर्कप्लेस पर कामकाजी माँओं के लिए चाइल्डकेयर रूम क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने 1 जून 2026 को अपनी आगामी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के प्रमोशन के दौरान कामकाजी माँओं के लिए वर्कप्लेस पर चाइल्डकेयर सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब महिलाओं को कार्यबल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, तो उनके बच्चों की देखभाल के लिए कार्यस्थल पर पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की जाती।
शूटिंग सेट से उठा सवाल
कंगना ने फिल्म की शूटिंग के अनुभव को साझा करते हुए कहा, 'मेरी को-स्टार स्मिता तांबे की बेटियाँ अक्सर सेट पर आया करती थीं। वहीं अभिनेता अक्षत का बच्चा भी कई बार शूटिंग सेट पर मौजूद रहता था। बच्चे शूटिंग के बीच खाली समय में एक-दूसरे के साथ खेलते थे और कलाकार अपने काम में व्यस्त रहते थे। इन सबको देखकर मेरे मन में एक सवाल बार-बार उठता था कि आखिर काम की जगहों को इस तरह क्यों नहीं बनाया जाता? कामकाजी माँओं के लिए बच्चों के कमरे क्यों नहीं हैं?'
यह टिप्पणी महज़ एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं थी — यह उस व्यापक बहस की ओर इशारा था जो भारत में महिला श्रम भागीदारी दर और उसके सामने आने वाली संरचनात्मक बाधाओं को लेकर वर्षों से चल रही है।
वर्कप्लेस सुविधाओं पर सीधा सवाल
कंगना ने कहा, 'आजकल वर्कप्लेस पर कर्मचारियों के लिए कई तरह की सुविधाओं की चर्चा होती है — कहीं प्रार्थना कक्ष बनाए जाते हैं, तो कहीं अन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर खास इंतजाम किए जाते हैं। लेकिन बच्चों के लिए अलग कमरों या देखभाल की व्यवस्था बहुत कम देखने को मिलती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 'केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक आवश्यक व्यवस्था होनी चाहिए।'
गौरतलब है कि भारत में मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में क्रेच सुविधा अनिवार्य की गई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर आलोचक अक्सर सवाल उठाते रहे हैं।
नीति और व्यवहार के बीच की खाई
कंगना ने तर्क दिया, 'महिलाओं को वर्कप्लेस पर लाने और उन्हें लंबे समय तक काम से जुड़े रहने के लिए केवल नीतियाँ बनाना काफी नहीं है। एक माँ अपने बच्चे की चिंता से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकती। अगर कार्यस्थल पर बच्चों के लिए सुरक्षित जगह हो, तो महिलाएँ ज़्यादा आत्मविश्वास और सुकून के साथ अपना काम कर पाएंगी।'
उन्होंने यह भी कहा कि आज कई महिलाओं के सामने ऐसी स्थिति आती है जहाँ उन्हें परिवार और करियर में से किसी एक को प्राथमिकता देनी पड़ती है। उचित सहयोग न मिलने के कारण महिलाएँ अक्सर अपने पेशेवर सपनों से समझौता कर लेती हैं।
महिला भागीदारी और भविष्य की चुनौतियाँ
कंगना ने इस मुद्दे को देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जोड़ते हुए कहा, 'जब बड़ी संख्या में महिलाएँ वर्कप्लेस में आएंगी, तब बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सवाल और ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा।' उनका मानना है कि जैसे-जैसे अधिक महिलाएँ नेतृत्व की भूमिकाओं में आएंगी, चाइल्डकेयर से जुड़ी सुविधाओं की माँग भी बढ़ेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'महिला-नेतृत्व विकास' के नारे के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। कंगना का यह बयान उस नारे को ज़मीनी हकीकत से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।