लीना चंदावरकर: राजेश खन्ना की हीरोइन से किशोर कुमार की दुल्हन तक — एक अधूरी रह गई कहानी
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर की अभिनेत्री लीना चंदावरकर ने 1968 से 1989 के बीच हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई — राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, दिलीप कुमार और विनोद खन्ना जैसे दिग्गजों के साथ काम करने वाली इस अभिनेत्री की ज़िंदगी परदे की चमक से कहीं अधिक उतार-चढ़ाव से भरी रही। गायक-अभिनेता किशोर कुमार से विवाह के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और 1987 में किशोर कुमार के निधन के बाद वह पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से पीछे हट गईं।
धारवाड़ से मुंबई तक का सफर
29 अगस्त 1950 को कर्नाटक के धारवाड़ में जन्मी लीना चंदावरकर का परिवार कोंकणी पृष्ठभूमि से था और उनके पिता सेना में अधिकारी थे। फिल्मी दुनिया से उनका कोई शुरुआती जुड़ाव नहीं था। विज्ञापनों में काम करने के बाद उन्होंने फिल्मफेयर फ्रेश फेस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और उपविजेता रहीं — यहीं से उनके लिए बॉलीवुड के दरवाज़े खुले।
उनकी पहली फिल्म 'मन का मीत' थी, जो 1968 में रिलीज़ हुई। इस फिल्म का निर्देशन सुनील दत्त ने किया था और इसमें सोम दत्त उनके साथ थे। फिल्म की सफलता ने लीना को रातोंरात एक जानी-पहचानी चेहरा बना दिया।
करियर का सुनहरा दौर
70 का दशक लीना के करियर का सबसे चमकदार अध्याय रहा। 'महबूब की मेहंदी' में राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा। उस दौर में राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के शीर्ष सितारे थे और उनके साथ परदे पर आना किसी भी अभिनेत्री के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।
इसके अलावा उन्होंने धर्मेंद्र के साथ 'रखवाला' और 'एक महल हो सपनों का', जीतेंद्र के साथ 'हमजोली', 'बिदाई' और 'नालायक', विनोद खन्ना के साथ 'कायद', संजीव कुमार के साथ 'मनचली' और 'अनहोनी', तथा दिलीप कुमार के साथ 'बैराग' जैसी फिल्मों में काम किया। उस युग का शायद ही कोई बड़ा अभिनेता रहा हो जिनके साथ लीना ने सहयोग न किया हो।
निजी जीवन के गहरे ज़ख्म
परदे पर सफलता के बीच लीना की निजी ज़िंदगी में एक के बाद एक त्रासदियाँ आईं। उनकी पहली शादी सिद्धार्थ बांदोडकर से हुई थी, जो गोवा के पहले मुख्यमंत्री दयानंद बांदोडकर के पुत्र थे। विवाह के कुछ ही समय बाद एक दुर्घटना में गोली लगने से सिद्धार्थ का निधन हो गया। उस समय लीना की आयु मात्र 25 वर्ष थी।
कुछ वर्षों बाद उनकी मुलाकात गायक-अभिनेता किशोर कुमार से हुई और दोनों ने विवाह किया। यह रिश्ता उस समय काफी चर्चा में रहा क्योंकि किशोर कुमार पहले तीन विवाह कर चुके थे और लीना से उम्र में काफी बड़े थे। शुरुआत में लीना के पिता इस विवाह के पक्ष में नहीं थे, लेकिन अंततः दोनों ने विवाह किया। इस जोड़े के एक पुत्र सुमित कुमार हुए। परंतु किस्मत ने एक बार फिर करवट ली — 1987 में किशोर कुमार का निधन हो गया, जब लीना मात्र 37 वर्ष की थीं।
फिल्मों से विदाई और बाद के वर्ष
किशोर कुमार से विवाह के बाद लीना ने फिल्मों से धीरे-धीरे दूरी बना ली, हालाँकि वह पूरी तरह पर्दे से अनुपस्थित नहीं रहीं। 1985 में 'सरफरोश' में उन्होंने काम किया और 1989 में आई 'ममता की छांव में' को उनकी अंतिम फिल्म माना जाता है, जिसमें वह एक बार फिर राजेश खन्ना के साथ नज़र आईं।
फिल्मों से दूर होने के बाद भी मनोरंजन जगत से उनका नाता पूरी तरह नहीं टूटा। 2007 में वह म्यूजिक रियलिटी शो 'के फॉर किशोर' के शुरुआती एपिसोड में अतिथि जज के रूप में दिखीं — एक ऐसा मंच जो उनके दिवंगत पति को श्रद्धांजलि था। लीना चंदावरकर की कहानी हिंदी सिनेमा के उस दौर की याद दिलाती है जब प्रतिभा और त्रासदी अक्सर एक साथ चलते थे।