कुमार सानू और उदित नारायण फिर आएंगे साथ, इंस्टाग्राम पोस्ट से दिया नए प्रोजेक्ट का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के दो दिग्गज प्लेबैक गायक कुमार सानू और उदित नारायण एक बार फिर किसी साझा प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं — कम से कम उनकी हालिया मुलाकात और उसके बाद आई एक इंस्टाग्राम पोस्ट यही संकेत देती है। 26 अगस्त 2026 को कुमार सानू ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उदित नारायण के साथ एक तस्वीर साझा की, जिसमें दोनों एक-दूसरे को गले लगाते नज़र आए। इस पोस्ट के साथ लिखे गए कैप्शन ने 90 के दशक के करोड़ों संगीत प्रेमियों की उत्सुकता जगा दी है।
क्या लिखा कुमार सानू ने
कुमार सानू ने इस तस्वीर के साथ लिखा, 'अपने प्यारे दोस्त उदित नारायण से मिलकर बहुत अच्छा लगा। कुछ अच्छा आने वाला है।' यह छोटा-सा कैप्शन फैंस के लिए काफी था। पोस्ट पर हज़ारों कमेंट्स आ गए, जिनमें लोगों ने दोनों की जोड़ी की वापसी का स्वागत किया। हालाँकि, अभी तक दोनों में से किसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किस प्रोजेक्ट पर साथ काम कर रहे हैं — कोई फिल्म, एल्बम या कंसर्ट।
साथ काम करने का पुराना सफर
कुमार सानू और उदित नारायण की जोड़ी 90 के दशक में बॉलीवुड की सबसे पहचानी आवाज़ों में से एक थी। दोनों ने मिलकर 'तेरी मेरी दोस्ती', 'बेवफा बहुत दिन घूमे', 'छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया', 'हम साथ-साथ हैं' और 'अपना बॉम्बे टॉकीज' जैसे गानों में अपनी आवाज़ें दी थीं। यह ऐसे समय में आया है जब रेट्रो बॉलीवुड संगीत की डिजिटल स्ट्रीमिंग पर माँग लगातार बढ़ रही है।
कुमार सानू: एक युग के प्रतीक
कुमार सानू ने 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' से अपनी पहचान बनाई और उस दौर के सबसे लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर बन गए। उन्होंने 'मैं दुनिया भुला दूंगा', 'दिल है कि मानता नहीं', 'चुरा के दिल मेरा', 'बाजीगर ओ बाज़ीगर' और 'आंखों की गुस्ताखियां' जैसे कालजयी गाने दिए। 1993 में उन्होंने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। उनके कई गानों को बीबीसी की 'टॉप 40 बॉलीवुड साउंडट्रैक ऑफ ऑल टाइम' सूची में भी जगह मिली। संगीत में अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2009 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
उदित नारायण: चार राष्ट्रीय पुरस्कारों का सफर
उदित नारायण ने 1980 में फिल्म 'उन्नीस-बीस' से हिंदी प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा था, जहाँ उन्होंने दिग्गज गायक मोहम्मद रफी के साथ गाया था। अपने करियर में उन्होंने चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते — 'लगान' के 'मितवा', 'दिल चाहता है' के 'जाने क्यों लोग', 'जिंदगी खूबसूरत है' के 'छोटे छोटे सपने' और 'स्वदेस' के 'ये तारा वो तारा' के लिए। 2005 में उन्हें भोजपुरी फिल्म 'कब होई गवना हमार' के निर्माता के रूप में भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। महान गायिका लता मंगेशकर ने उन्हें 'प्रिंस ऑफ प्लेबैक सिंगिंग' का खिताब दिया था। नेपाली संगीत में योगदान के लिए नेपाल के राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव ने 2001 में उन्हें 'ऑर्डर ऑफ गोरखा दक्षिण बाहु' से नवाज़ा था।
आगे क्या उम्मीद
फिलहाल न कोई रिलीज़ डेट है, न प्रोजेक्ट का नाम — बस एक तस्वीर और एक वादा। लेकिन जिस तरह से इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया बटोरी है, वह बताता है कि 90 के दशक की इस जोड़ी के लिए दर्शकों की भूख अभी भी कम नहीं हुई है। संगीत प्रेमी अब आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं।