26 अगस्त 2026
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हिजाब विवाद पर रामदास आठवले: 'इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का पालन हो, कानून से ऊपर कुछ नहीं'

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हिजाब विवाद पर रामदास आठवले: 'इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का पालन हो, कानून से ऊपर कुछ नहीं'

सारांश

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हिजाब विवाद पर दो-टूक कहा — परंपरा का सम्मान, लेकिन कानून सर्वोच्च। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अयोध्या की तरह स्वीकारने की अपील करते हुए उन्होंने मुस्लिम समुदाय से भाईचारे की राह पर चलने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई में हिजाब विवाद पर अपना रुख स्पष्ट किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
आठवले ने कहा — परंपरा हो सकती है, लेकिन कानून और संविधान सर्वोपरि हैं; कोर्ट के आदेश का पालन ज़रूरी।
उन्होंने अयोध्या सुप्रीम कोर्ट फैसले का उदाहरण देते हुए मुस्लिम समाज से फैसला स्वीकारने की अपील की।
असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी के संदर्भ में आठवले ने कहा — मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने वाले बड़े नेता की ज़रूरत।

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई में हिजाब विवाद पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि हिजाब मुस्लिम समुदाय की पारंपरिक प्रथा हो सकती है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करना और उसका पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उनके अनुसार, संविधान और कानून सर्वोच्च हैं।

मुख्य घटनाक्रम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री आठवले ने कहा, 'मुस्लिम समुदाय की महिलाएं और स्कूल जाने वाली लड़कियां हिजाब पहनती हैं — यह उनकी पारंपरिक प्रथा है। लेकिन हम अपने संविधान और कानून के अनुसार चलते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश का आदर और पालन दोनों ज़रूरी हैं।

आठवले ने आगे कहा, 'जैसा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि हिजाब पहनना ज़रूरी नहीं है — तो हिजाब नहीं पहना जाना चाहिए। हमें कानून के हिसाब से चलना है।'

अयोध्या फैसले से तुलना

आठवले ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए अयोध्या राम मंदिर विवाद का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामला दशकों तक अनसुलझा रहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले एक-तिहाई भूमि मुस्लिम पक्ष को देने का निर्णय लिया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट — जिसमें एक मुस्लिम अधिकारी भी उत्खनन टीम में शामिल थे — के आधार पर पूरी भूमि राम मंदिर को देने का फैसला सुनाया।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ने उस फैसले को स्वीकार किया था। 'इसी तरह हाईकोर्ट का यह फैसला भी स्वीकार किया जाना चाहिए। हम 21वीं शताब्दी में आगे बढ़ रहे हैं — परंपराएं हो सकती हैं, लेकिन वे कानून के दायरे में होनी चाहिए।'

ओवैसी और मुस्लिम नेतृत्व पर टिप्पणी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की हाईकोर्ट फैसले पर टिप्पणी के संदर्भ में आठवले ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपना नेतृत्व चुनने और मज़बूत करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, 'ओवैसी उनके नेता हैं, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और मेरी पार्टी आईपीआई में भी मुस्लिम नेता हैं।'

आठवले ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज में एक ऐसे नेता की ज़रूरत है जो पूरे समुदाय को एकजुट कर सके। उनके अनुसार, सभी पार्टियों में मुस्लिम समर्थक हैं और भाईचारे को मज़बूत करना सबकी साझी ज़िम्मेदारी है।

आम जनता पर असर

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उत्तर प्रदेश सहित देश के उन राज्यों के स्कूलों में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्राओं को सीधे प्रभावित करता है जहाँ हिजाब पहनने की परंपरा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पहचान और शैक्षणिक संस्थाओं में ड्रेस कोड को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थाओं के नियमों के बीच संतुलन का प्रश्न अंततः देश की सर्वोच्च अदालत तय करेगी। आठवले के बयान से यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार न्यायपालिका के निर्णय को लागू करने के पक्ष में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वह फैसले को 'मुस्लिम स्वीकृति के उदाहरण' के रूप में प्रस्तुत करती है। हालांकि, आलोचक यह पूछ सकते हैं कि क्या धार्मिक पहचान और शैक्षणिक समानता के जटिल प्रश्न को केवल 'कानून मानो' तक सीमित करना पर्याप्त है। असली परीक्षा तब होगी जब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुँचेगा और केंद्र सरकार को अपना आधिकारिक पक्ष रखना होगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब पर क्या फैसला दिया है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसका अर्थ है कि स्कूल परिसर में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं माना जाएगा।
रामदास आठवले ने हिजाब विवाद पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि हिजाब मुस्लिम समुदाय की पारंपरिक प्रथा हो सकती है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का पालन करना ज़रूरी है। उनके अनुसार, संविधान और कानून सर्वोच्च हैं और परंपराएं कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।
आठवले ने अयोध्या का उदाहरण क्यों दिया?
आठवले ने अयोध्या राम मंदिर विवाद का उदाहरण यह समझाने के लिए दिया कि मुस्लिम समाज ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को स्वीकार किया था जो उनके पक्ष में नहीं था। उन्होंने कहा कि उसी तरह हाईकोर्ट के हिजाब फैसले को भी स्वीकार किया जाना चाहिए।
क्या इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थाओं के नियमों के बीच संतुलन का अंतिम निर्णय देश की सर्वोच्च अदालत करेगी।
आठवले ने मुस्लिम नेतृत्व पर क्या कहा?
आठवले ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपना नेतृत्व चुनने का पूरा अधिकार है और सभी प्रमुख पार्टियों में मुस्लिम नेता मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय में एक ऐसे एकजुट करने वाले नेता की ज़रूरत है और सभी को भाईचारे को मज़बूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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