'मसकली' का राज़: प्रसून जोशी ने KBC 18 में बताई 'दिल्ली 6' के आइकॉनिक गाने की असली कहानी
सारांश
मुख्य बातें
गीतकार प्रसून जोशी ने हाल ही में अमिताभ बच्चन के चर्चित क्विज़ शो 'कौन बनेगा करोड़पति 18' में शिरकत की और फिल्म 'दिल्ली 6' के कालजयी गाने 'मसकली' के पीछे की अनसुनी कहानी से पर्दा उठाया। उनके इस खुलासे ने संगीत प्रेमियों को उस पुरानी यादगार धुन के जन्म की कहानी से रूबरू कराया।
कैसे पड़ा 'मसकली' नाम
शो में अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत के दौरान प्रसून जोशी ने याद किया कि जब फिल्म 'दिल्ली 6' की पटकथा पर काम चल रहा था, तब सोनम कपूर के किरदार 'बिट्टू' के पास एक पालतू कबूतर था। उन्होंने बताया, "फिल्म 'दिल्ली 6' की जब स्क्रिप्ट में काम चल रहा था, तो गाना मसकली की वजह फिल्म में सोनम कपूर के कबूतर का नाम ही मसकली रख दिया गया था।" गौरतलब है कि तुर्की भाषा में 'मसकली' शब्द का अर्थ 'परीकथा' होता है।
शब्द की ध्वनि ने बाँधा जोशी को
प्रसून जोशी ने बताया कि यह शब्द उनके ज़हन में इस कदर बस गया कि इसके इर्द गिर्द ही पूरा गाना बुना गया। उनके अपने शब्दों में, "तो ये मसकली इतना अटका, कई बार क्या होता है शब्द की ध्वनि इतनी सुंदर लगती है कि लगता है कि सारा संसार उसके चारों ओर घूमता हुआ है।" यह बयान किसी गीतकार की रचना प्रक्रिया की एक दुर्लभ झलक है — जहाँ एक शब्द की गूँज पूरे भाव संसार को आकार देती है।
गाने की पहचान और संगीत टीम
'मसकली' गाना 2009 में रिलीज़ हुई फिल्म 'दिल्ली 6' का सबसे लोकप्रिय गीत बना। इसे मोहित चौहान ने अपनी सुरीली आवाज़ दी, संगीत की रचना ए.आर. रहमान ने की और बोल प्रसून जोशी की कलम से निकले। परदे पर यह गाना अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर पर फिल्माया गया था। गाने में आज़ादी, शांति और ऊँची उड़ान की भावना को कबूतर के रूपक के ज़रिये खूबसूरती से पिरोया गया है।
फिल्म 'दिल्ली 6' की पृष्ठभूमि
निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की इस फिल्म में अभिषेक बच्चन (रोशन), सोनम कपूर (बिट्टू), वहीदा रहमान (दादी अन्नपूर्णा), ओम पुरी, ऋषि कपूर, दिव्या दत्ता और अतुल कुलकर्णी मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कथा एक प्रवासी भारतीय युवक रोशन के इर्द गिर्द बुनी गई है, जो अपनी बीमार दादी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें पुरानी दिल्ली के अपने पुराने मोहल्ले ले जाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब पुरानी दिल्ली जातिभेद, सांप्रदायिक तनाव और संकीर्ण सोच जैसी सामाजिक कुरीतियों से जूझ रही होती है। साथ ही पूरे इलाके में 'काले बंदर' नाम के एक रहस्यमयी जीव के हमलों की अफवाहें फैलती हैं, जिनका इस्तेमाल स्वार्थी तत्त्व धार्मिक उन्माद भड़काने के लिए करते हैं।
KBC मंच पर रचनाकार का आत्म कथन
'कौन बनेगा करोड़पति 18' का यह प्रसंग केवल एक मनोरंजक खुलासा नहीं था — यह हिंदी सिनेमा के उस स्वर्णिम दौर की याद दिलाता है जब शब्द, संगीत और कहानी तीनों एक दूसरे में इस तरह घुले मिले होते थे कि दर्शक दशकों बाद भी उन्हें नहीं भूल पाते। प्रसून जोशी का यह संस्मरण आने वाले लेखकों और गीतकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।