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'बीड़ी जलाईले' में सुखविंदर सिंह की एंट्री थी अचानक — गुलजार की एक लाइन ने बदल दी किस्मत

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'बीड़ी जलाईले' में सुखविंदर सिंह की एंट्री थी अचानक — गुलजार की एक लाइन ने बदल दी किस्मत

सारांश

स्टूडियो में एक इत्तेफाक और गुलजार साहब की एक सुझाव-भरी पहल — बस इतने से सुखविंदर सिंह बन गए 'बीड़ी जलाईले' की आवाज। 'इंडियन आइडल' पर साझा किया यह किस्सा बताता है कि बॉलीवुड के सबसे यादगार गाने कभी-कभी सबसे अनचाहे लम्हों में जन्म लेते हैं।

मुख्य बातें

गायक सुखविंदर सिंह ने 'इंडियन आइडल' के मंच पर खुलासा किया कि वे मूल रूप से 'बीड़ी जलाईले' गाने के लिए नहीं बुलाए गए थे।
वे फिल्म 'ओमकारा' के टाइटल ट्रैक की कुछ लाइनें रिकॉर्ड करने स्टूडियो पहुँचे थे।
गीतकार गुलजार के सुझाव पर संगीतकार विशाल ददलानी ने उन्हें 'बीड़ी जलाईले' की लाइनें गाने दीं।
पहली ही लाइन — 'ना गिलाफ, ना लिहाफ, ठंडी हवा भी खिलाफ ससुरी' — ने सबको प्रभावित किया और वे पूरे गाने का हिस्सा बन गए।
जज श्रेया घोषाल और विशाल ददलानी ने सुखविंदर की गायकी की सराहना की।

गायक सुखविंदर सिंह ने हाल ही में रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के मंच पर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया — कि फिल्म 'ओमकारा' का आइकॉनिक गाना 'बीड़ी जलाईले' गाना उनके लिए कभी तय नहीं था। मशहूर गीतकार गुलजार की एक सुझाव-भरी पहल ने उन्हें इस गाने का हिस्सा बना दिया, और बाकी इतिहास है।

स्टूडियो में कैसे हुई अचानक एंट्री

सुखविंदर सिंह ने बताया कि वे मूल रूप से फिल्म के टाइटल ट्रैक — 'धम-धम धड़म धरैया रे, सबसे बड़े लड़ैया रे, ओमकारा' — की कुछ लाइनें रिकॉर्ड करने स्टूडियो पहुँचे थे। 'बीड़ी जलाईले' की रिकॉर्डिंग उनके एजेंडे में बिल्कुल नहीं थी।

उन्होंने कहा, 'शुरुआत में मैं इस गाने का हिस्सा नहीं था। मुझे फिल्म के एक दूसरे हिस्से की रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया गया था।'

गुलजार साहब की पहल और वो यादगार लाइन

रिकॉर्डिंग के दौरान प्रसिद्ध गीतकार गुलजार ने संगीतकार विशाल ददलानी से कहा कि सुखविंदर को 'बीड़ी जलाईले' की कुछ लाइनें गाने दी जाएँ। सुखविंदर के अनुसार, गुलजार साहब का मानना था कि शायद उनकी आवाज गाने को एक नया रंग दे सके।

सुखविंदर ने बताया, 'मैंने गाना शुरू किया — 'ना गिलाफ, ना लिहाफ, ठंडी हवा भी खिलाफ ससुरी'... यह लाइन गाने के बाद मुझे आगे भी गाने को कहा गया। मैंने पूरी एनर्जी के साथ कुछ और लाइनें रिकॉर्ड कीं।'

सबको पसंद आई आवाज, और बन गए गाने का चेहरा

सुखविंदर ने कहा कि उनकी आवाज और अंदाज वहाँ मौजूद सभी को पसंद आया, और इस तरह वे पूरे गाने का हिस्सा बन गए। उन्होंने स्वीकार किया, 'यह सब इतना अचानक हुआ कि मुझे खुद भी विश्वास नहीं हो पाया था।'

आज दो दशक बाद भी 'बीड़ी जलाईले' भारतीय फिल्म संगीत के सबसे पहचाने जाने वाले गानों में शुमार है — और इसकी जड़ें उस एक सहज-सी पहल में हैं जो गुलजार साहब ने स्टूडियो में की थी।

श्रेया घोषाल और विशाल ददलानी ने की जमकर तारीफ

यह किस्सा सुनकर शो की जज और मशहूर गायिका श्रेया घोषाल ने सुखविंदर की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'आपकी आवाज में इबादत है, जब भी आप गाते हैं तो दिल से गाते हैं।'

संगीतकार विशाल ददलानी ने भी सहमति जताते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह की गायकी ने भारतीय संगीत को कई यादगार गीत दिए हैं और उनकी आवाज किसी भी गीत को अलग पहचान देने की क्षमता रखती है।

कब और कहाँ देखें 'इंडियन आइडल'

'इंडियन आइडल' हर शनिवार और रविवार को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होता है और सोनी लिव पर भी स्ट्रीम किया जाता है। सुखविंदर सिंह के इस खुलासे ने शो को एक नई चर्चा का केंद्र बना दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्टूडियो में हुए सहज प्रयोगों से निकले हैं। गुलजार जैसे दिग्गज की श्रवण-संवेदनशीलता — कि किस आवाज में कौन-सा गाना खिलेगा — वह कौशल है जो आज के डेटा-चालित संगीत उद्योग में दुर्लभ होता जा रहा है। 'बीड़ी जलाईले' की स्थायी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि सही आवाज और सही गाने का मेल कितना निर्णायक होता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखविंदर सिंह 'बीड़ी जलाईले' गाने का हिस्सा कैसे बने?
सुखविंदर सिंह मूल रूप से 'ओमकारा' के टाइटल ट्रैक की रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो आए थे। गीतकार गुलजार के सुझाव पर संगीतकार विशाल ददलानी ने उन्हें 'बीड़ी जलाईले' की कुछ लाइनें गाने दीं, जो सबको इतनी पसंद आईं कि वे पूरे गाने का हिस्सा बन गए।
'बीड़ी जलाईले' किस फिल्म का गाना है?
'बीड़ी जलाईले' मल्टीस्टारर फिल्म 'ओमकारा' का लोकप्रिय गाना है। इसे गायक सुखविंदर सिंह ने गाया था और इसके गीत गुलजार ने लिखे थे।
इस किस्से का खुलासा कहाँ और कब हुआ?
सुखविंदर सिंह ने यह किस्सा रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के मंच पर साझा किया। शो हर शनिवार और रविवार को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होता है।
श्रेया घोषाल और विशाल ददलानी ने सुखविंदर के बारे में क्या कहा?
श्रेया घोषाल ने कहा कि 'आपकी आवाज में इबादत है, जब भी आप गाते हैं तो दिल से गाते हैं।' विशाल ददलानी ने कहा कि सुखविंदर की गायकी ने भारतीय संगीत को कई यादगार गीत दिए हैं और उनकी आवाज किसी भी गीत को अलग पहचान देने की क्षमता रखती है।
गुलजार ने 'बीड़ी जलाईले' में सुखविंदर को क्यों गाने दिया?
सुखविंदर सिंह के अनुसार, गुलजार साहब का मानना था कि उनकी आवाज गाने को एक नया रंग दे सकती है। यह एक सहज सुझाव था जो अंततः गाने की पहचान बन गया।
राष्ट्र प्रेस
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