नीलबड़ी: एक औषधीय झाड़ी जो सेहत के लिए है अद्भुत
सारांश
Key Takeaways
- नीलबड़ी में औषधीय गुण प्रचुर मात्रा में होते हैं।
- यह लिवर के स्वास्थ्य में सुधार करती है।
- बालों की देखभाल में सहायक होती है।
- आयुर्वेद में इसकी महत्ता है।
- यह दक्षिण एशिया में प्रचुरता से पाई जाती है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रकृति ने हमें कई ऐसे पेड़-पौधे प्रदान किए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होते हैं। उनमें से एक है नीलबड़ी, जो आकार में जामुन के समान होती है, लेकिन इसके औषधीय गुण शरीर को अनेक लाभ प्रदान कर सकते हैं।
यह एक औषधीय झाड़ी है, जिसके फल, जड़ और पत्तियों का उपयोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता है। इसकी शाखाएं पीली और भूरी होती हैं, जबकि पत्तियां हरी, अंडाकार या आयताकार होती हैं, जिनकी लंबाई ३-५ सेमी और चौड़ाई २-३ सेमी होती है। इसके फूलों के बाद छोटे गोल फल लगते हैं, जो ४-६ मिमी लंबे होते हैं। ये फल पहले हरे होते हैं और पकने पर नीले-काले हो जाते हैं, जिनमें बैंगनी गूदा और ८-१५ छोटे त्रिकोणीय बीज होते हैं। इसे ताजे या सूखे भागों से अर्क बनाकर उपयोग किया जाता है।
यह विशेष रूप से दक्षिण एशिया में पाया जाता है और इसमें सूजन-रोधी तथा एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम 'फिलैंथस रेटिकुलैटस' है और वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसके एंटीवायरल, एंटीमाइक्रोबियल और सूजन-रोधी गुणों की पुष्टि की है।
आयुर्वेद में नीलबड़ी को कफ और वात दोष को संतुलित करने वाली एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना जाता है। इसके अनुसार, यह मुख्य रूप से लिवर के स्वास्थ्य, बालों की देखभाल, त्वचा रोगों और दर्द निवारक के रूप में उपयोगी है। इसके काढ़े से लिवर विषैले पदार्थों से मुक्त होता है और पत्तियां सफेद बालों को काला करने में सहायता करती हैं।
सुश्रुत संहिता में नीलबड़ी को अधोभागहर-गण (विरेचक) में शामिल किया गया है, जो कफ-पित्त विकारों के उपचार में फायदेमंद होती है। यह पाइल्स, पेट से संबंधित समस्याएं और वात के उपचार में लाभकारी है।
इसके पत्ते बालों के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। कहा जाता है कि ताजे पत्तों का रस या पेस्ट नारियल तेल के साथ लगाने से बाल काले, मजबूत और घने होते हैं, जिससे सफेद बालों की समस्या कम होती है।